
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लुधियाना के एक कपड़ा व्यापारी द्वारा दायर उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें याचिका का मसौदा तैयार करने के लिए एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) उपकरणों का उपयोग करने की बात स्वीकार की गई और एआई याचिका में प्रयुक्त जटिल कानूनी शब्दों की व्याख्या करने में असमर्थ था। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा, जाओ, लुधियाना में 2-3 और स्वेटर बेचो… जिन लोगों का काम है ऐसी याचिका दाखिल करना, वो नुकसान कर देंगे आपका जुर्माना लगवा कर।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ को उस समय संदेह हुआ जब 12वीं कक्षा तक पढ़े कपड़ा व्यापारी रजनीश सिद्धू पीएम केयर फंड से संबंधित अपनी याचिका पर बहस करने के लिए खड़े हुए। सिद्धू ने जैसे ही लिखित दलीलें पढ़नी शुरू कीं, प्रधान न्यायाधीश ने उनकी शैक्षणिक और अन्य पृष्ठभूमि पर सवाल किया। जब याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने पहले कोई याचिका दायर नहीं की थी और वह सीधे शीर्ष अदालत में अपनी पहली याचिका दायर करने आया है, तो प्रधान न्यायाधीश ने व्यंग्यपूर्वक कहा, बड़ा बहादुरी का काम किया, सीधा लुधियाना से चलकर आ गए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, मैं यहीं आपकी अंग्रेजी की परीक्षा लूंगा और अगर आप 30 प्रतिशत अंक भी प्राप्त कर लेते हैं, तो मैं मान लूंगा कि आपने ही यह याचिका तैयार की है।
इसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने जनहित याचिका में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों के बारे में पूछा, जिसका सिद्धू जवाब नहीं दे सके। साथ ही याचिकाकर्ता ने इस बात को स्वीकार किया कि उन्होंने याचिका तैयार करने के लिए एआई उपकरणों का इस्तेमाल किया। इस पर जस्टिस सूर्यकांत बिफर पड़े और उपरोक्त टिप्पणी करते हुए याचिका खारिज कर दी।
मालूम हो कि कोरोना के वक्त बनाए गए पीएम केयर फंड पर लगातार सवाल उठते रहे हैं लेकिन सरकार ने उसे सवालों और जवाबों से परे रखा है। उस पर संसद में भी सवाल उठाने की मनाही है।

