वाशिंगटन। अपनी सनक में इस्राइल के साथ ईरान के खिलाफ सैन्य हमला कर बैठे ट्रंप वैश्विक पैमाने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर भी बुरी तरह आलोचनाओं के शिकार हो रहे हैं। ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से आम अमेरिकियों का जीवन मुश्किल में पड़ गया है। अमेरिका में ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और घरेलू आर्थिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि रिपब्लिकन नीतियों ने आम अमेरिकी नागरिकों की जिंदगी महंगी बना दी है और देश को ईरान के खिलाफ लापरवाह और बेवजह के युद्ध में धकेल दिया है। जेफ्रीज ने कहा कि यह अमेरिका के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण समय है। राष्ट्रपति ट्रंप और रिपब्लिकन की नीतियों ने अमेरिकी लोगों की जीवन गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाया है। इन नीतियों के कारण आम लोगों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। जेफ्रीज ने दावा किया कि रिपब्लिकन नीतियों की वजह से स्वास्थ्य सेवा, ईंधन, आवास, बच्चों की देखभाल और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने हाल ही में पारित किए गए कानून का जिक्र करते हुए कहा कि रिपब्लिकनों ने अपने वन बिग अग्ली बिल के जरिए अमेरिकी इतिहास में मेडिकेड पर सबसे बड़ी कटौती लागू की है। इस फैसले के कारण कई अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बंद हो रहे हैं, जबकि 2 करोड़ से अधिक कामकाजी अमेरिकी नागरिकों के स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम बढ़ गए हैं।
जेफ्रीज (Hakeem Jeffries, Minority Leader of the U.S House of Representatives) ने घरेलू आर्थिक मुद्दों को विदेश नीति से जोड़ते हुए मध्य पूर्व में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, रिपब्लिकन हमें ईरान के खिलाफ एक लापरवाह युद्ध में ले गए हैं। अरबों डॉलर मध्य पूर्व में बम गिराने पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन आम लोगों के लिए जीवन सस्ता बनाने के लिए एक पैसा भी नहीं है। हकीम जेफ्रीज ने प्रशासन की रणनीति और तैयारी पर भी सवाल खड़े किए। जेफ्रीज ने कहा कि सरकार अब तक अमेरिकी जनता को यह नहीं समझा पाई है कि ईरान में रोजाना बमबारी पर अरबों डॉलर क्यों खर्च किए जा रहे हैं। इस अभियान के लिए कोई स्पष्ट योजना, लक्ष्य या बाहर निकलने की रणनीति नहीं है।
जेफ्रीज ने चेतावनी दी कि इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है। खासतौर पर, उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जिक्र करते हुए कहा कि यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है और यहां अस्थिरता बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने इस संभावित खतरे के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं की और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों की निकासी की भी कोई ठोस योजना नहीं बनाई। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा विभाग के बजट को लेकर चल रही बातचीत पर भी बात की। जेफ्रीज ने कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी द्विदलीय समझौते के लिए तैयार है, लेकिन सुधार साहसी, सार्थक और परिवर्तनकारी होने चाहिए। उन्होंने रिपब्लिकनों पर आरोप लगाया कि वे एफईएमए, टीएसए और कोस्ट गार्ड जैसी एजेंसियों के बजट के बजाय जहरीली निर्वासन मशीन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
हकीम जेफ्रीज ने यह भी स्पष्ट किया कि इस समय युद्ध के लिए अतिरिक्त फंडिंग की मांग स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, अगर प्रशासन और पैसा मांगता है, तो यह इस समय बिल्कुल अनुचित होगा। पहले उन्हें अपने कदमों का ठोस कारण बताना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन लोगों की आर्थिक परेशानियों को दूर करने के बजाय वोटर सप्रेशन कानूनों पर ध्यान दे रहा है। हकीम जेफ्रीज ने कहा, ऐसा लगता है कि उनके लिए आवास, स्वास्थ्य सेवा और किराने के बढ़ते बिल कोई मायने ही नहीं रखते।
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने तमाम देशों से मदद मांगी लेकिन कोई मदद करने नहीं आया। ईरान पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। सुपर पावर अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में बौना पड़ गया। अन्य देशों के लिए इस अनैतिक युद्ध में शामिल होने के लिए कोई ठोस तर्क नहीं है। इस्राइल के उकसावे में आकर ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ तो दिया लेकिन न वह ईरान को हरा पाए न अब बाहर निकलने का कोई रास्ता नजर आ रहा है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है अमेरिकियों और बाकी देशों की जनता की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ईरान ने पलटवार में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाया है, उनकी हालत अमेरिका के कारण खराब हो गई है। अब लगता है खाड़ी के अमेरिकी सहयोगी देश जल्द समाधान खोजने का ट्रंप पर दबाव बना रहे हैं। ट्रंप के बयान भी रोज बदल रहे हैं।