
14 मार्च 1879 उल्म, जर्मनी में अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म हुआ। अल्बर्ट आइंस्टीन सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी बने, मुख्य रूप से सापेक्षता का सिद्धांत विकसित करने के लिए जाने गए। आइंस्टीन ने क्वांटम सिद्धांत में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता सूत्र विशेष सापेक्षता से निकला है, उसे दुनिया का सबसे प्रसिद्ध समीकरण कहा गया है। यहां पेश हैं अल्बर्ट आइंस्टीन के कुछ उद्धरण,
मुश्किलें इंसान को खुद से रूबरू कराती हैं।
हर किसी का एक व्यक्ति के तौर पर सम्मान होना चाहिए, लेकिन किसी को भी आदर्श बनाकर पूजा नहीं जानी चाहिए।
जिस व्यक्ति ने कभी कोई गलती नहीं की, उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की।
शिक्षक की सबसे बड़ी कला रचनात्मक अभिव्यक्ति और ज्ञान में आनंद जगाना है।
हर किसी का एक व्यक्ति के तौर पर सम्मान होना चाहिए, लेकिन किसी को भी आदर्श बनाकर पूजा नहीं जानी चाहिए।
सफल होने की कोशिश मत करो, बल्कि मूल्यवान बनने की कोशिश करो।
अगर मैं भौतिक विज्ञानी नहीं होता, तो शायद मैं एक संगीतकार होता। मैं अक्सर संगीत में ही सोचता हूँ। मैं अपने दिवास्वप्नों को संगीत में ही जीता हूँ। मैं अपने जीवन को संगीत के नजरिए से देखता हूँ।
रचनात्मकता वह बुद्धिमत्ता है जो मौज-मस्ती कर रही हो।
सबसे खूबसूरत चीज जिसका हम अनुभव कर सकते हैं, वह है रहस्यमयता। यही सभी सच्ची कला और विज्ञान का स्रोत है।
कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है। ज्ञान सीमित है। कल्पना पूरी दुनिया को घेरे हुए है।
कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
शिक्षा वह है जो स्कूल में सीखी हुई बातें भूल जाने के बाद भी याद रह जाती है।
हर चीज को जितना हो सके, उतना सरल बनाओ, लेकिन उससे ज्यादा सरल नहीं।
शांति जोर-जबरदस्ती से कायम नहीं रखी जा सकती, इसे केवल आपसी समझ से ही हासिल किया जा सकता है।
महान लोगों को हमेशा औसत दर्जे की सोच वाले लोगों से विरोध का सामना करना पड़ा है। औसत दर्जे की सोच वाला व्यक्ति उस इंसान को समझने में असमर्थ होता है, जो पुरानी रूढ़ियों के आगे आँख मूँदकर झुकने से इनकार कर देता है और इसके बजाय अपनी राय को हिम्मत और ईमानदारी से जाहिर करना चुनता है।
सामान्य बुद्धि उन पूर्वाग्रहों का संग्रह है, जो अठारह साल की उम्र तक हासिल हो जाते हैं।
ऐसा जीवन जो मुख्य रूप से अपनी निजी इच्छाओं को पूरा करने में लगा हो, वह देर-सवेर हमेशा कड़वी निराशा ही देगा।
जो औरत भीड़ के पीछे चलती है, वह आमतौर पर भीड़ से आगे कभी नहीं जा पाती। जो औरत अकेले चलती है, उसके ऐसे मुकाम पर पहुँचने की संभावना होती है, जहाँ पहले कभी कोई नहीं पहुँचा हो।
सबसे जरूरी बात यह है कि सवाल पूछना कभी बंद न करें। जिज्ञासा के अस्तित्व का अपना ही एक कारण होता है। जब कोई अनंतता, जीवन और वास्तविकता की अद्भुत संरचना के रहस्यों पर विचार करता है, तो वह विस्मय से भरे बिना नहीं रह पाता। अगर कोई हर दिन इस रहस्य का थोड़ा-सा हिस्सा भी समझने की कोशिश करे, तो इतना ही काफी है। अपनी पवित्र जिज्ञासा को कभी मत खोना।
महान लोगों को हमेशा औसत दर्जे की सोच वाले लोगों से जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा है।
सहज बुद्धि एक पवित्र तोहफा है और तार्किक बुद्धि एक वफादार नौकर। हमने एक ऐसा समाज बना लिया है, जो नौकर का तो सम्मान करता है, लेकिन तोहफे को भूल गया है।
कल से सीखो, आज के लिए जियो, और आने वाले कल के लिए उम्मीद रखो। कल। सबसे जरूरी बात यह है कि सवाल पूछना कभी बंद न करें।
जिंदगी जीने के दो तरीके हैं, आप ऐसे जी सकते हैं जैसे कुछ भी चमत्कार न हो, या आप ऐसे जी सकते हैं जैसे सब कुछ ही चमत्कार हो।
जिंदगी साइकिल चलाने जैसी है। अपना संतुलन बनाए रखने के लिए, आपको चलते रहना होगा।
अगर हमें पता होता कि हम क्या कर रहे हैं, तो इसे रिसर्च (अनुसंधान) नहीं कहा जाता, है ना?
हम अपनी समस्याओं को उसी सोच से हल नहीं कर सकते, जिसका इस्तेमाल हमने उन्हें पैदा करते समय किया था।

