मैं गुलामी के साथ शांति के बजाय, खतरे के साथ आजादी को चुनूंगा, फ्रांसीसी नाटककार और कवि रूसो के उद्धरण
6 अप्रैल 1671 को पेरिस, फ्रांस में जीन-बैप्टिस्ट रूसो का जन्म हुआ। रूसो विश्व विख्यात फ्रांसीसी नाटककार और कवि और विशेष रूप से अपने व्यंग्यात्मक सूक्तियों के लिए जाने जाने गए।
जो लोग कम जानते हैं, वे अक्सर बहुत ज्यादा बोलते हैं, जबकि जो लोग बहुत ज्यादा जानते हैं, वे बहुत कम बोलते हैं।
मैं गुलामी के साथ शांति के बजाय, खतरे के साथ आजादी को चुनूंगा।
इंसान आजाद पैदा होता है, लेकिन हर जगह वह जंजीरों में जकड़ा हुआ है।
हकीकत की दुनिया की अपनी सीमाएँ होती हैं, लेकिन कल्पना की दुनिया की कोई सीमा नहीं होती।
मैं पूर्वाग्रहों से भरा इंसान होने के बजाय, विरोधाभासों से भरा इंसान बनना पसंद करूँगा।
मैं अपने दिल की भावनाओं को जानता हूँ, और मैं इंसानों को भी जानता हूँ। मैं उन लोगों जैसा बिल्कुल नहीं हूँ जिन्हें मैंने देखा है। मुझमंे यह मानने की हिम्मत है कि मैं उन लोगों जैसा भी नहीं हूँ जो इस दुनिया में अभी मौजूद हैं। अगर मैं दूसरों से बेहतर नहीं हूँ, तो कम से कम मैं उनसे अलग तो हूँ ही। प्रकृति ने जिस साँचे में मुझे ढाला था, उसे तोड़कर उसने सही किया या गलत, इसका फैसला तभी हो पाएगा, जब लोग मुझे पूरी तरह से पढ़ लेंगे।
जब इंसान सिर्फ अपनी रोजी-रोटी कमाने के बारे में सोचता है, तो उसके लिए ऊँचे विचार रखना बहुत मुश्किल हो जाता है।
पागलों से भरी इस दुनिया में समझदार बने रहना, अपने आप में एक तरह का पागलपन ही है।
दयालुता से बढ़कर और कौन सी बुद्धिमानी हो सकती है?
हमें अपनी खुशी दूसरों की राय पर क्यों आधारित करनी चाहिए, जबकि हम उसे अपने ही दिल के अंदर पा सकते हैं?
हर इंसान को अपनी जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने का पूरा अधिकार है।
एक अच्छा प्रेम-पत्र लिखने के लिए, आपको यह सोचे बिना लिखना शुरू करना चाहिए कि आप क्या कहना चाहते हैं, और यह सोचे बिना उसे खत्म करना चाहिए कि आपने क्या लिख दिया है।
जो लोग वादा करने में सबसे ज्यादा समय लेते हैं, वे ही उसे निभाने में सबसे ज्यादा वफादार साबित होते हैं।
सभ्यता एक ऐसी कभी न खत्म होने वाली दौड़ है, जिसमें इंसान उन बुराइयों का इलाज खोजने की कोशिश करता रहता है, जिन्हें उसने खुद ही पैदा किया है।
जो लोग खुद को दूसरों का मालिक समझते हैं, वे असल में उन दूसरों से भी कहीं ज्यादा बड़े गुलाम होते हैं।
हर इंसान आजाद पैदा होता है और खुद का मालिक होता है इसलिए कोई भी दूसरा इंसान, किसी भी बहाने से, उसकी मर्जी के बिना उसे अपना गुलाम नहीं बना सकता। यह कहना कि एक गुलाम का बेटा भी गुलाम ही पैदा होता है, इसका मतलब यह कहना है कि वह इंसान के रूप में पैदा ही नहीं हुआ है।
मेरी सारी मुसीबतें सिर्फ इसलिए आईं, क्योंकि मैंने अपने साथी इंसानों के बारे में कुछ ज्यादा ही अच्छा सोच लिया था। जहाँ तक मेरी बात है, मैंने कभी यह नहीं सोचा कि मनुष्य की स्वतंत्रता इसमें निहित है कि वह जो चाहे कर सके, बल्कि इसमें है कि किसी भी मानवीय शक्ति द्वारा उसे वह करने के लिए विवश न किया जाए, जो उसकी इच्छा के विरुद्ध हो।
सच तो यह है कि कानून हमेशा उन लोगों के लिए उपयोगी होते हैं जिनके पास संपत्ति होती है, और उन लोगों के लिए हानिकारक होते हैं जिनके पास कुछ भी नहीं होता, जिसका निष्कर्ष यह निकलता है कि सामाजिक व्यवस्था मनुष्यों के लिए तभी लाभकारी होती है, जब सभी के पास कुछ न कुछ हो और किसी के पास भी आवश्यकता से अधिक न हो।
सृष्टि के रचयिता के हाथों से निकली हर चीज अच्छी होती है, परंतु मनुष्य के हाथों में पहुँचते ही वह विकृत हो जाती है।
कई बार ऐसा होता है जब मैं खुद से इतना अलग होता हूँ कि लोग मुझे बिल्कुल अलग तरह का कोई और समझ लेते हैं।
जीने का मतलब सांस लेना नहीं बल्कि काम करना है। यह हमारे अंगों, हमारे सेंस, हमारी काबिलियत, हमारे उन सभी हिस्सों का इस्तेमाल करना है जो हमें हमारे होने का एहसास देते हैं। जो इंसान सबसे ज्यादा जिया है, वह वह नहीं है जिसने सबसे ज्यादा साल गिने हैं, बल्कि वह है जिसने जिंदगी को सबसे ज्यादा महसूस किया है। -जीन-बैप्टिस्ट रूसो
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