
31 मार्च 1914 को मेक्सिको सिटी में ओक्टेवियो पाज लोजानो का जन्म हुआ। ओक्टेवियो पाज विश्व विख्यात मेक्सिकन दार्शनिक, कवि और राजनयिक बने। उन्हें 1977 में जेरूसलम पुरस्कार, 1981 में मिगुएल डे सर्वेंट्स पुरस्कार, 1982 में साहित्य के लिए न्यूस्टाड्ट अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार और 1990 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। ओक्टेवियो पाज के उद्धरण निम्नलिखित हैं
बिना डंठल का फूल, ऐसी सुंदरता है जो मरने का इंतजार कर रही है। बिना प्रेम का हृदय, ऐसा आँसू है जो बहने का इंतजार कर रहा है।
प्रेम सुंदरता की चाह नहीं है, यह तो पूर्णता की एक ललक है।
अपने सपनों के योग्य बनो।
एकांत ही मानवीय स्थिति का सबसे गहरा सत्य है। मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसे यह भान है कि वह अकेला है।
प्रेम किसी अन्य प्राणी की अंतरात्मा में उतरने का एक प्रयास है, परंतु इसकी अनुभूति तभी संभव है जब यह समर्पण दोनों ओर से हो।
स्वयं से परे, कहीं दूर, मैं अपने ही आगमन की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।
मेरा यह मानना नहीं है कि कोई लेखक खतरनाक होता है, कुछ पुस्तकों में निहित खतरा स्वयं उन पुस्तकों में नहीं, बल्कि उनके पाठकों के मन में उठने वाली तीव्र भावनाओं में छिपा होता है।
स्वयं को पूर्णतः समर्पित कर देना सदैव ही एक कठिन कार्य रहा है, विरले ही लोग ऐसा करने में सफल हो पाते हैं, और उससे भी कम लोग उस अधिकार-भाव से ऊपर उठकर प्रेम के वास्तविक स्वरूप को जान पाते हैं जो कि एक निरंतर चलने वाली खोज है, यथार्थ के सागर में एक गहरा अवगाहन है, और एक कभी न समाप्त होने वाला नवनिर्माण है।
न कोई पीछे है, न कोई आगे।
प्राचीन मनीषियों द्वारा प्रशस्त किया गया मार्ग अब अवरुद्ध हो चुका है।
और वह दूसरा मार्ग, जो कि सबका मार्ग है
जो अत्यंत सुगम और चौड़ा है, वह कहीं भी नहीं जाता।
मैं अकेला हूँ, और मैं अपना मार्ग स्वयं ढूँढ़ लेता हूँ।
आत्म-खोज का सबसे प्रमुख पहलू यह बोध है कि हम इस संसार में अकेले हैं।
प्रेम करने का अर्थ है, अपने नाम और पहचान के आवरण को उतार फेंकना।
संभवतः यही कविता का सबसे उदात्त उद्देश्य है, अपने आस-पास के संसार के साथ स्वयं को एकाकार कर लेना, अपनी कामनाओं को प्रेम में रूपांतरित कर देना, और अंततः उस तत्व को अंगीकार कर लेना जो सदैव हमारी पकड़ से परे रहता है, जो हमारी पहुँच से बाहर है, किंतु जो सदैव वहीं विद्यमान है, वह अनकहा, वह चेतन-तत्व, और वह आत्मा।
जब हम बोलना सीखते हैं, तब हम वास्तव में अनुवाद करना सीखते हैं।
मनुष्य वह नहीं होता जो वह वर्तमान में है, बल्कि वह वह होता है जिसकी वह निरंतर खोज कर रहा है।
यदि हम स्वयं को इस संपूर्ण ब्रह्मांड का एक रूपक मानें, तो नर-नारी का जोड़ा (मानवीय युगल) उस रूपक का सर्वोत्कृष्ट और पूर्णतम उदाहरण है, यह समस्त शक्तियों का मिलन-बिंदु है, और समस्त रूपों का मूल बीज है। यह युगल ही वह माध्यम है जिसके द्वारा समय को पुनः प्राप्त किया जा सकता है, यह उस आदि-काल (समय से भी पूर्व के काल) में लौटने जैसा है।
सब कुछ दिखाई देता है, फिर भी सब कुछ पकड़ से बाहर है
सब कुछ नजदीक है, फिर भी उसे छुआ नहीं जा सकता।
प्रेम, किसी दूसरे व्यक्ति की आजादी का ही एक प्रकटीकरण है।
लोकतंत्र के बिना, आजादी महज एक भ्रम है। -ओक्टेवियो पाज
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