27 मार्च 1797 को लोशे, फ्रांस में अल्फ्रेड डी विग्नी (अल्फ्रेड विक्टर, कॉम्टे डी विग्नी) का जन्म हुआ। अल्फ्रेड डी विग्नी प्रसिद्ध फ्रांसीसी कवि और शुरुआती फ्रांसीसी रोमांटिसिस्ट बने। उन्होंने उपन्यास, नाटक लिखे और शेक्सपियर के अनुवाद भी किए। यहां पेश हैं, अल्फ्रेड डी विग्नी के कुछ विचारणीय उद्धरण
सिर्फ खामोशी ही महान है, बाकी सब कमजोरी है।
तथ्यों की याद का क्या फायदा, अगर वह अच्छाई या बुराई के उदाहरण के तौर पर काम न आए?
जिस दिन इंसान ने दूसरे इंसान को अपनी जिंदगी की कहानी सुनाई, उसी दिन इतिहास का जन्म हुआ।
जो दिखाई नहीं देता, वही असली है। आत्माओं की अपनी एक अलग दुनिया होती है।
कलाओं का क्या फायदा, अगर वे सिर्फ जिंदगी की नकल और दोहराव ही हों?
कमजोर दिल वाले जानवर झुंड में चलते हैं। शेर रेगिस्तान में अकेला चलता है। कवि को भी हमेशा ऐसे ही चलना चाहिए।
इंसानियत में सबसे आगे हमेशा वे लोग होंगे जो कागज के एक टुकड़े, कैनवस, संगमरमर के एक टुकड़े या कुछ आवाजों से कुछ अमर चीज बना देते हैं।
हर इंसान ने वह दीवार देखी है जो उसके मन की सीमा तय करती है।
इतिहास एक ऐसा उपन्यास है जिसके लेखक खुद लोग होते हैं।
अपना लंबा और भारी काम पूरी ऊर्जा के साथ करो, उस रास्ते पर चलते हुए जिस पर किस्मत ने तुम्हें बुलाया है।
कविता दिमाग की एक बीमारी है।
मुझे इंसानी दुख की गरिमा से प्यार है।
एक महान जिंदगी क्या है? यह जवानी के उन सपनों का सच होना है जो बुढ़ापे में पूरे होते हैं।
जैसे हम अपने जमीर में उतरकर उन कामों को परखते हैं जिन्हें हमारा दिमाग नहीं तौल पाता, क्या हम अपने अंदर उस भावना को भी नहीं खोज सकते जो विचारों के रूपों को जन्म देती है, जो हमेशा धुंधले और अस्पष्ट होते हैं?
जिन घटनाओं की मुझे तलाश थी, वे कभी भी उतनी महान नहीं थीं जितनी मुझे जरूरत थी।
एक शांत निराशा, जिसमें न कोई गुस्से वाला उबाल हो और न ही आसमान की तरफ कोई शिकायत, ही असल समझदारी है।
हमें अपने बेचैन दिलों में, जहाँ अक्सर मनमुटाव रहता है, दो ऐसी जरूरतें मिलेंगी जो एक-दूसरे के उलट लगती हैं, लेकिन मेरे हिसाब से, वे एक ही स्रोत में जाकर मिल जाती हैंरू सच्चाई से प्यार और कल्पना से प्यार।
ताकत रखने का मतलब हमेशा से ही बेवकूफों और हालात को अपने हिसाब से चलाना रहा है, और वे हालात और वे बेवकूफ, जब आपस में मिल जाते हैं, तो ऐसे इत्तेफाक पैदा करते हैं जिनके बारे में बड़े-से-बड़े लोग भी मानते हैं कि उनकी ज्यादातर शोहरत इन्हीं की वजह से है।
एक महान जिंदगी और क्या है, सिवाय जवानी में देखे गए किसी इरादे को बुढ़ापे में पूरा करने के? केवल मौन ही महान है, बाकी सब कमजोरी है… अपने लंबे और भारी काम को पूरे दिल से करो… फिर मेरी तरह, कुछ मत कहो, बस सहो और मर जाओ।
लेकिन जीवन से परे, समय से परे, अनंत काल में जाने का क्षेत्र केवल धर्म, दर्शन और विशुद्ध कविता का ही है।
कोई भी लेखक, चाहे वह कितना भी प्रतिभाशाली क्यों न हो, तब तक खुद को अमर नहीं बना पाता, जब तक कि वह मानव हृदय की शाश्वत भावनाओं और अभिलाषाओं को अभिव्यंजक और मौलिक शब्दों में ढाल न दे।
मृत्युदंड के बाद, सैनिक का अस्तित्व ही बर्बरता का सबसे दुखद अवशेष है, जो आज भी मनुष्यों के बीच बचा हुआ है।
एक महान जीवन और क्या है, यदि वह परिपक्व उम्र के किसी व्यक्ति द्वारा साकार किया गया कोई युवा विचार न हो?
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