3 अप्रैल 1950 को शॉ, वाशिंगटन, डी.सी में कार्टर जी. वुडसन (कार्टर गॉडविन वुडसन, जन्म 19 दिसंबर 1875 न्यू कैंटन, वर्जीनिया) का निधन हुआ। कार्टर जी. वुडसन अमेरिकी इतिहासकार, लेखक, पत्रकार, शिक्षक, अश्वेत अधिकार कार्यकर्ता, समाज सुधारक और एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ अफ्रीकन अमेरिकन लाइफ एंड हिस्ट्री के संस्थापक थे। कार्टर जी. वुडसन उन शुरुआती विद्वानों में से एक थे जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में अश्वेत अफ्रीकी प्रवासियों के इतिहास का अध्ययन किया। कार्टर जी. वुडसन के चुनिंदा उद्धरण
यदि आप किसी व्यक्ति की सोच को नियंत्रित कर सकते हैं, तो आपको उसके कार्यों के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। जब आप यह तय कर लेते हैं कि कोई व्यक्ति क्या सोचेगा, तो आपको इस बात की परवाह करने की जरूरत नहीं है कि वह क्या करेगा। यदि आप किसी व्यक्ति को यह महसूस कराते हैं कि वह हीन है, तो आपको उसे हीन दर्जा स्वीकार करने के लिए मजबूर करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह स्वयं ही उस दर्जे की तलाश करेगा। यदि आप किसी व्यक्ति को यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि वह सही मायनों में एक बहिष्कृत व्यक्ति है, तो आपको उसे पिछले दरवाजे से जाने का आदेश देने की आवश्यकता नहीं है। वह बिना कहे ही चला जाएगा और यदि कोई पिछला दरवाजा नहीं भी है, तो उसका अपना स्वभाव ही एक दरवाजे की माँग करेगा।
मेरे लिए, शिक्षा का अर्थ है लोगों को अधिक समृद्ध जीवन जीने के लिए प्रेरित करना, उन्हें यह सिखाना कि वे जीवन को जैसा पाते हैं, वहीं से शुरुआत करें और उसे बेहतर बनाएँ।
यदि किसी जाति का कोई इतिहास नहीं है, यदि उसकी कोई सार्थक परंपरा नहीं है, तो वह विश्व की सोच में एक नगण्य कारक बनकर रह जाती है, और उसके विलुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो जाता है।
इतिहास यह दर्शाता है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सत्ता में कौन है या कौन सी क्रांतिकारी शक्तियाँ सरकार पर काबिज हो जाती हैंय जिन लोगों ने अपने लिए स्वयं कुछ करना नहीं सीखा है और जो पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें अंत में उतने भी अधिकार या विशेषाधिकार प्राप्त नहीं होते, जितने उनके पास शुरुआत में थे।
आपको अपनी कहानी दुनिया के सामने अवश्य रखनी चाहिए।
केवल जानकारी प्रदान करना ही शिक्षा नहीं है। सबसे बढ़कर, शिक्षा के प्रयास का परिणाम यह होना चाहिए कि व्यक्ति स्वयं अपने लिए सोचना और कार्य करना सीखे।
दार्शनिकों ने लंबे समय से यह स्वीकार किया है कि प्रत्येक व्यक्ति के दो शिक्षक होते हैं, एक वह जो उसे दूसरों से मिलता है, और दूसरा वह जो वह स्वयं अपने आप को देता है। इन दोनों प्रकारों में से, दूसरा प्रकार कहीं अधिक वांछनीय है। वास्तव में, मनुष्य में जो कुछ भी सबसे अधिक मूल्यवान है, उसे उसे स्वयं ही अपने प्रयासों से अर्जित करना और जीतना होता है। यही वह चीज है जो हमारे वास्तविक और सर्वोत्तम पोषण का निर्माण करती है। जो कुछ हमें केवल सिखाया जाता है, वह शायद ही कभी हमारे मस्तिष्क का उस तरह से पोषण कर पाता है, जिस तरह से वह ज्ञान करता है जो हम स्वयं अपने प्रयासों से सीखते हैं। जिन लोगों के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं होता कि उनके पूर्वजों ने क्या हासिल किया है, वे उस प्रेरणा से वंचित रह जाते हैं जो जीवनी और इतिहास की शिक्षा से मिलती है।
कोई भी इंसान तब तक यह नहीं जान पाता कि वह क्या कर सकता है, जब तक वह कोशिश नहीं करता।
हमारा इतिहास बहुत शानदार रहा है। … अगर आप दुनिया को यह साबित नहीं कर पाते कि आपके पास यह इतिहास मौजूद है, तो दुनिया आपसे कहेगी, आप लोकतंत्र या किसी भी अन्य चीज के फायदों का आनंद लेने के लायक नहीं हैं।
अगर बस्ती में रहने वाले अश्वेतों को हमेशा उसी हाथ से खाना खिलाया जाता रहेगा जिसने उन्हें उस बस्ती में धकेला है, तो वे कभी भी इतने मजबूत नहीं बन पाएंगे कि उस बस्ती से बाहर निकल सकें।
लोगों का सच्चा सेवक वही होता है जो उनके बीच रहे, उनके साथ सोचे, उनके लिए महसूस करे और उनके लिए अपनी जान भी दे दे।
जब आप किसी इंसान की सोच को नियंत्रित कर लेते हैं, तो आपको उसके कामों की चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती। आपको उसे यह बताने की जरूरत नहीं पड़ती कि वह यहाँ खड़ा न हो या वहाँ न जाए। वह खुद ही अपनी सही जगह ढूँढ़ लेगा और वहीं रहेगा। आपको उसे पिछले दरवाजे से भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगीय वह बिना कहे ही चला जाएगा। असल में, अगर कोई पिछला दरवाजा नहीं भी होगा, तो वह अपने खास फायदे के लिए खुद ही एक दरवाजा बना लेगा। उसकी शिक्षा ही उसे ऐसा करने पर मजबूर कर देती है।
वही शिक्षा-प्रक्रिया जो जुल्म करने वाले को यह सोचकर प्रेरित और उत्साहित करती है कि वह ही सब कुछ है और उसने ही दुनिया के सारे जरूरी काम किए हैं, वही प्रक्रिया दूसरी तरफ अश्वेतों के अंदर की प्रतिभा की चिंगारी को दबा देती है और कुचल देती है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह उन्हें यह महसूस कराती है कि उनकी नस्ल की कोई खास अहमियत नहीं है और वे कभी भी दूसरे लोगों के मानकों की बराबरी नहीं कर पाएंगे।
जैसा कि किसी और ने भी सही ही कहा है, किसी छात्र को यह सिखाकर कमजोर बना देना कि उसका काला रंग एक अभिशाप है और अपनी हालत सुधारने के लिए उसका संघर्ष बेकार है, यह सबसे बुरे किस्म का लिंचिंग (अत्याचार) है।
हमें किसी चुनिंदा नस्ल या देश के इतिहास की नहीं, बल्कि एक ऐसे विश्व इतिहास की जरूरत है जो राष्ट्रीय पक्षपात, नस्लीय नफरत और धार्मिक पूर्वाग्रहों से पूरी तरह मुक्त हो।
सच्चाई को अतीत की गहराइयों से खोदकर बाहर निकालना होगा और विद्वानों के सामने वैज्ञानिक रूप में पेश करना होगा और फिर कहानियों और नाटकों के जरिए उसे हमारी शिक्षा-व्यवस्था का एक अभिन्न अंग बनाना होगा।
हमारे तथाकथित लोकतंत्र में, हमें इस बात की आदत पड़ गई है कि हम बहुमत को वही देते हैं जो वे चाहते हैं, बजाय इसके कि हम उन्हें यह समझने के लिए शिक्षित करें कि उनके लिए असल में सबसे अच्छा क्या है।
जब आप किसी इंसान की सोच को नियंत्रित कर लेते हैं, तो आपको उसके कामों की चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती।
असल में लोगों का भरोसा पैसे से कहीं ज्यादा कीमती होता है। नीग्रो लोगों के हीन होने का विचार, लगभग हर उस क्लास में, जिसमें वे जाते हैं, और लगभग हर उस किताब में, जिसे वे पढ़ते हैं, उनके दिमाग में बिठा दिया जाता है।
तो फिर सच हमारे पास अतीत से आता है, ठीक वैसे ही, जैसे पहाड़ों से बहकर सोना नीचे आता है।
मुझे गोरे व्यापारियों द्वारा मुझ पर मुकदमा किए जाने का कोई डर नहीं है। असल में, मैं तो ऐसे मुकदमे का स्वागत ही करूँगा। इससे हमारे उद्देश्य को बहुत फायदा होगा। आइए, हम डर को अपने मन से निकाल फेंकें। हम तीन सदियों से इसी मानसिक स्थिति में जी रहे हैं। मैं एक आमूल-परिवर्तनवादी हूँ। अगर मुझे अपनी मदद के लिए कुछ बहादुर लोग मिल जाएँ, तो मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ। -कार्टर जी. वुडसन
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