तेहरान 23 मार्च 2026। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने एक्स पर डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि ईरान के बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाता है, तो पूरे क्षेत्र के अहम बुनियादी ढांचे को वैध लक्ष्य माना जाएगा और उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा, जिसमें खाड़ी देशों में पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा और जल शोधन प्रतिष्ठान शामिल हैं।
इस्राइल और अमेरिका की घोर अमानवीय और गैरकानूनी युद्ध थोपने और ईरान के कड़े प्रतिकार से पैदा हुआ संकट थमता नजर नहीं आ रहा। इससे पूरी दुनिया भारी मुश्किल में है। भारत आर्थिक मोर्चे पर पहले ही बहुत दबाव में था, तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने, कारोबार ठप्प होने से आम आदमी से लेकर बड़े उद्योगपतियों, कारोबारियों तक की दिक्कतें बेहद बढ़ गई हैं। इस बीच अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की रविवार को धमकी दी। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका अपने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिजली संयंत्रों पर हमले की धमकी पर अमल करता है, तो तेल और अन्य निर्यात के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार देर रात ईरान को जलडमरूमध्य को खोलने के लिए 48 घंटे की समयसीमा दी थी। इसके बाद ईरान ने इस्राइल के एक गुप्त परमाणु अनुसंधान स्थल पर मिसाइल हमला किया और इस हमले में आस पास के स्थानों पर रहने वाले लोग बड़ी संख्या में घायल हुए, जिसके बाद इस्राइल के नेताओं ने वहां जा कर लोगों से मुलाकात की और उनका हाल चाल जाना।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमले में किसी की जान नहीं गई और यह एक ष्चमत्कारष् है। नेतन्याहू ने दावा किया कि इस्राइल और अमेरिका अपने युद्ध लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इन लक्ष्यों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल कार्यक्रम और सशस्त्र समर्थन को कमजोर करना तथा ईरान की जनता को धार्मिक शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकने में सक्षम बनाना शामिल है।
यद्यपि इस्राइल की मंशा के विपरीत ईरान में न तो किसी विद्रोह का कोई संकेत मिला है और न ही उस लड़ाई के अंत का जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है, तेल की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है और दुनिया के कुछ सबसे व्यस्त हवाई मार्गों को खतरे में डाल दिया है। अमेरिका और इस्राइल द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए इस युद्ध में 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इस बीच कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने सोमवार तड़के कहा कि उनकी हवाई रक्षा प्रणाली मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपट रही है, बहरीन में हवाई हमले के संकेत देने वाले सायरन बज रहे हैं।
ईरान ने फारस की खाड़ी को शेष विश्व से जोड़ने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है और कहा है कि शत्रु देशों को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति है, लेकिन जहाजों पर हमलों ने लगभग सभी टैंकर यातायात को रोक दिया है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान जलडमरूमध्य नहीं खोलता है तो अमेरिका उसके ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर देगा, शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी। अमेरिका का तर्क है कि ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड देश के अधिकांश बुनियादी ढांचे को नियंत्रित करता है और इसका उपयोग युद्ध अभियानों को शक्ति प्रदान करने के लिए करता है।
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