चंडीगढ़ा। क्या नोटबंदी की तरह गैस की किल्लत भी कोई साजिश है, घोटाला है ? नोटबंदी में आनलाइन पेमेंट को प्रोमोट किया गया था। तब खुद पेटीएम के विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोटो छपा था। तब मोदी सरकार द्वारा आनलाइन भुगतान की खूब वकालत की गई थी। आनलाइन भुगतान तो बढ़ गया लेकिन रोजगार, काम-धंधे और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। अब घरेलू गैस संकट में एलपीजी की जगह पाइपलाइन गैस पीएनजी की वकालत केंद्र सरकार के जरिये की जा रही है। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में मंगलवार को फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑफ पंजाब ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस संकट के लिए सीधे तौर पर सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि राज्य में गैस की भारी कमी है, लेकिन इस शॉर्टेज का सारा ठीकरा उनके सिर फोड़ा जा रहा है और उन्हें बिना वजह बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑफ पंजाब के प्रधान गुरपाल सिंह मान और परविंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब में कुल 980 गैस एजेंसियां हैं, जो करीब 96 लाख ग्राहकों को सेवाएं देती हैं। आमतौर पर राज्य में हर महीने 27 से 29 लाख सिलेंडर डिलीवर किए जाते हैं। जनवरी में 27 लाख सिलेंडरों की आपूर्ति हुई थी, लेकिन अब इसमें 80 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ गई है। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने सवाल उठाया है कि सरकार ने 74 दिन का स्टॉक होने का दावा किया था, लेकिन आखिर वह स्टॉक कहां है ?
फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑफ पंजाब ने बताया कि एक-एक एजेंसी पर 5000 सिलेंडरों की बुकिंग का बैकलॉग चल रहा है, जबकि पीछे से उन्हें केवल 300 सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं। इसके चलते एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं। पंजाब में कुल 8 बॉटलिंग प्लांट हैं, जो हाल ही में दो बार बंद हो चुके हैं। जहां पहले प्लांट से 200 गाड़ियां निकलती थीं, अब इनकी संख्या घटकर मात्र 50 रह गई है। लुधियाना जैसे बड़े औद्योगिक शहर में, जहां 6000 मीट्रिक टन का कमर्शियल मार्केट है, वहां भी बुरा हाल है। इसके अलावा, ऑनलाइन बुकिंग सॉफ्टवेयर के क्रैश होने से समस्या और बढ़ गई है।
फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि पाइपलाइन गैस (पीएनजी) को प्रमोट करने के लिए जानबूझकर एलपीजी की अनदेखी की जा रही है। ग्राहकों को लुभाने के लिए न केवल पीएनजी के दाम 37 रुपये प्रति किलो घटा दिए गए हैं, बल्कि नया पीएनजी कनेक्शन लगवाने पर 500 रुपये की छूट (रिबेट) भी दी जा रही है। एलपीजी गैस न मिलने से ग्रामीण इलाकों में लोग भड़के हुए हैं। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने बताया कि गांवों में गैस डिलीवरी करने गए उनके कर्मचारियों का घेराव किया जा रहा है, जिससे उन्हें अपनी सुरक्षा का डर सताने लगा है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि इस भारी दबाव के चलते एक गैस एजेंसी ने तो सरकार को सरेंडर तक कर दिया है। इस पूरे मामले को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार से बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं मिला है।
सवाल है कि अगर केंद्र सरकार के दावों के मुताबिक गैस की कमी नहीं है तो जगह-जगह कटौती क्यों की जा रही है ? उपभोक्ताओं को सुविधाजनक तरीके से गैस क्यों नहीं मिल रही ? आपूर्ति कम क्यों है ? पीएनजी की वकालत क्यों की जा रही है ? सरकार साफ-साफ गैस किल्लत पर स्थिति क्यों नहीं स्पष्ट कर रही ?