नई दिल्ली 12 मार्च 2026। केंद्र से लेकर स्थानीय प्रशासन तक झूठ पर झूठ बोले जा रहा है। एक सप्ताह पूर्व बुक किए गैस सिलेंडर लोगों को नहीं मिले। हर गली मोहल्ले में हर दूसरे-तीसरे दिन दौड़ने वाली गाड़ियां दिख नहीं रहीं। गैस वितरण केंद्रों पर कई दिनों से लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं, होटल, रेस्तरां, ढावे, सड़क किनारे और अन्यत्र चलने वाली खान-पान और चाय की दुकानें बंद हो गई हैं और बंद हो रही हैं, खुले में मिलने वाली गैस भी नहीं मिल रही और सरकार कह रही है कि गैस की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है। सरकार और प्रशासन किसकी आंखों में धूल झोंक रहा है ? कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने देश में एलपीजी के कथित संकट को लेकर बृहस्पतिवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया। संसद के मकर द्वार के निकट कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के सांसद एकत्र हुए और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
विपक्षी नेताओं ने मोदी जी एलपीजी के नारे लगाए। विपक्षी सांसदों ने गैस सिलेंडर की आकृति वाली तख्तियां भी ले रखी थीं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि ईंधन संकट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन वह खुद अलग कारणों से घबराए हुए नजर आ रहे हैं।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि घरेलू रसोई गैस की जरूरतें पूरी करने के लिए देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है और लोगों को घबराहट में आकर सिलेंडर बुक करने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि घरेलू रिफाइनरी कंपनियों ने भी एलपीजी उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आपूर्ति बाधित होने के बाद नए स्रोतों से कच्चा तेल लेने में भी सफल रहा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बातचीत में कहा कि सरकार के प्रयास घरों तक निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है और इसका 90 प्रतिशत आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही आता है। ऐसे में गैस आपूर्ति बाधित होने से वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के ऊपर घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने का सरकार ने फैसला किया है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद मंत्रालय स्तर की पहली मीडिया ब्रीफिंग में शर्मा ने कहा कि ऐसी स्थिति में कुछ स्थानों से घबराहट में सिलेंडर की बुकिंग और गलत सूचना के कारण जमाखोरी किए जाने की खबरें मिली हैं।
सुजाता शर्मा ने कहा कि लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हमारे पास इसका पर्याप्त भंडार मौजूद है। घरेलू एलपीजी की सामान्य आपूर्ति अवधि अब भी पहले की तरह लगभग 2.5 दिन ही है, लिहाजा उपभोक्ताओं को जल्दबाजी में सिलेंडर बुक करने की जरूरत नहीं है। स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के कदम उठाए हैं। रिफाइनरियों को अन्य ईंधन की कुछ आपूर्ति घटाकर एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए औद्योगिक एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों को मिलने वाली एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति में कुछ कटौती की है, ताकि देश के 33 करोड़ से अधिक घरों तक रसोई गैस की नियमित आपूर्ति बनी रहे।
गैर-घरेलू एलपीजी आपूर्ति में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि रेस्तरां, होटल और अन्य वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को एलपीजी आवंटन की समीक्षा के लिए तीन-सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह समिति राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों से परामर्श कर उपलब्ध एलपीजी का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से वितरण सुनिश्चित करने की योजना तैयार कर रही है। प्राकृतिक गैस की कुल खपत लगभग 18.9 करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन है, जिसमें से लगभग 9.75 करोड़ मानक घन मीटर गैस का ही देश में उत्पादन होता है और बाकी का आयात किया जाता है।
सुजाता शर्मा के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली करीब 4.74 करोड़ मानक घन मीटर गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसकी भरपाई के लिए वैकल्पिक स्रोतों से एलएनजी से भरे दो जहाज मंगाए गए हैं। ये जहाज भारत के लिए रवाना हो चुके हैं। सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए संबंधित मंत्रालयों एवं एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।