
12 अप्रैल 1986 को मॉस्को, रूस में सोवियत लेखक, कवि और संपादक वैलेंतिन पेत्रोविच कातायेव (जन्म 28 जनवरी 1897 ओडेसा, यूक्रेन) का देहांत हुआ। वैलेंतिन कातायेव सोवियत शासन की आधिकारिक शैली की मांगों का उल्लंघन किए बिना, क्रांति के बाद की सामाजिक स्थितियों पर गहन चर्चा करने वाली रचनाएँ तैयार कीं। कातायेव को ही अपने भाई येवगेनी पेत्रोव और इल्या इल्फ को द ट्वेल्व चेयर्स लिखने का विचार देने का श्रेय दिया जाता है। डोडोना किजिरिया, ने कातायेव को आधुनिक रूस के सबसे प्रतिभाशाली लेखकों में से एक बताया हैं। रूसी भाषा में लिखने वाले लेखकों में से केवल नाबोकोव को ही वैलेंतिन कातायेव का एक योग्य प्रतिद्वंद्वी माना जा सकता है, खासकर दृश्य रूप से अनुभव की गई वास्तविकता के बिंबों को लगभग सिनेमाई सटीकता के साथ व्यक्त करने की उनकी क्षमता के मामले में।
एक शुद्ध बूँद होना और अपने भीतर कई दुनियाओं को समेटे रखना कितना अच्छा है!
एक कलाकार का सबसे कीमती गुण उसके निर्णयों की पूर्ण और निरपेक्ष स्वतंत्रता है।
ग्रीष्म ऋतु मर रही है। पतझड़ मर रहा है। शीत ऋतु तो स्वयं मृत्यु ही है। और वसंत शाश्वत है। वह निरंतर बदलते रहने वाले पदार्थ की गहराइयों में अनंत काल तक जीवित रहता है, वह केवल अपना रूप बदलता है।
मैंने सच्ची कविता का चमत्कार देखा, मेरे लिए एक नई दुनिया के द्वार खुल गए।
वह पुराना, युवा मैं अब नहीं रहा। मैं जीवित नहीं बच पाया। पेंसिल घिसकर खत्म हो गई। और कागज पर जल्दबाजी में लिखी गई वे बुरी कविताएँ, जो राख की तरह हल्की हैं, वे यहाँ रह गईं। क्या यह कोई चमत्कार नहीं है?
एक भूखा नौजवान, जिसके हाथ में कुल्हाड़ी है और बदन पर जैकेट। और कौन जाने, दोस्तोयेव्स्की ने अपने पात्र रास्कोलनिकोव की रचना करते समय किन-किन अनुभवों से गुजारा होगा। आखिर एक उपनाम (सरनेम) की कीमत ही क्या है?
कुछ रचने की इच्छा ही अपने आप में एक रचना है।
ऐसा कोई दुख नहीं है जो जीवन के सामने बौना न पड़ जाए। और यही तो सबसे बड़ा सुख है। वरना, हम सब जीवित कैसे रह पाते?
प्रेम के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी फायदेमंद विवाह, ऐसा संयोग अक्सर नहीं बनता।
अपनी नई कविता की शुरुआत पढ़ने के बाद, अचानक ही उसमें से मेरी सारी दिलचस्पी खत्म हो गई।
काले बादल जैसे विचार छँट गए। क्या आपने कभी गौर किया है कि मन के काले विचार कितनी आसानी से छँट जाते हैं?
शून्यता भी एक पदार्थ है। लेकिन वह अविनाशी है। उसे कोई भी चीज टुकड़े-टुकड़े नहीं कर सकती।
क्या आपने कभी गौर किया है कि आश्चर्य ही प्रेम की ओर बढ़ाया गया पहला कदम होता है?
हमारे चारों ओर जरूरत से कहीं ज्यादा वस्तुएँ मौजूद हैं, जितनी कि हमारे अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं।
फिर उसने यात्रा करते हुए, कुछ समय तक विस्मृति (सब कुछ भूल जाने की अवस्था) की तलाश में बिताया। -वैलेंतिन कातायेव
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