
2 अप्रैल 1840 को पेरिस, फ्रांस में एमिल एडौर्ड चार्ल्स एंटोनी जोला का जन्म हुआ। एमिल जोला विख्यात फ्रांसीसी उपन्यासकार, पत्रकार, नाटककार बने नेचुरलिज्म (प्रकृतिवाद) नामक साहित्यिक धारा के सबसे जाने-माने प्रतिनिधि और नाट्य-नेचुरलिज्म के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता माने गए। पेशे खिदमत हैं, एमिल जोला के कुछ तीखे, चुटीले, विचारणीय उद्धरण
अगर आप सच को दबाकर जमीन के नीचे दफना भी दें, तो भी वह और बढ़ेगा, और अपने अंदर इतनी जबरदस्त विस्फोटक शक्ति जमा कर लेगा कि जिस दिन वह बाहर निकलेगा, अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को उड़ा देगा।
अगर आप मुझसे पूछें कि मैं इस जीवन में क्या करने आया हूँ, तो मैं आपको बताऊँगा, मैं खुलकर जीने आया हूँ।
मैं बोरियत से मरने के बजाय जुनून के साथ मरना ज्यादा पसंद करूँगा।
यात्रा करने जैसा बुद्धि का विकास और किसी चीज से नहीं होता।
सभ्यता तब तक अपनी पूर्णता को प्राप्त नहीं करेगी, जब तक कि आखिरी चर्च का आखिरी पत्थर, आखिरी पादरी के ऊपर न गिर जाए।
कलाकार अपनी प्रतिभा के बिना कुछ भी नहीं है, लेकिन प्रतिभा भी बिना मेहनत के कुछ भी नहीं है।
जीवन जीने का एकमात्र आधार है, जीवन में विश्वास रखना, उससे प्रेम करना, और उसे बेहतर ढंग से जानने के लिए अपनी बुद्धि की पूरी शक्ति लगा देना।
क्या विज्ञान ने खुशी का वादा किया था? मुझे ऐसा नहीं लगता। उसने तो सच का वादा किया था, और अब सवाल यह है कि क्या हम कभी सच के सहारे खुशी हासिल कर पाएँगे?
मनुष्य का सबसे बड़ा कर्तव्य है, जानवरों को क्रूरता से बचाना।
सच अपने रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, और उसे कोई नहीं रोक सकता।
अगर लोग बस एक-दूसरे से थोड़ा-सा भी प्यार कर लें, तो वे कितने खुश रह सकते हैं।
ये युवा लोग स्वाभाविक रूप से हमसे अलग विचारों के साथ बड़े होते हैं, क्योंकि इनका जन्म उस समय के लिए हुआ है, जब हम इस दुनिया में नहीं रहेंगे।
मेरा बस एक ही जुनून है, उन लोगों को ज्ञान का प्रकाश दिखाना, जिन्हें अब तक अंधेरे में रखा गया है, उस मानवता के नाम पर, जिसने बहुत कष्ट सहे हैं और जो खुशी की हकदार है। मेरा यह जोशीला विरोध, मेरी अंतरात्मा की ही एक पुकार है।
सरकारें साहित्य को शक की नजर से देखती हैं, क्योंकि यह एक ऐसी शक्ति है जो उनकी पकड़ से बाहर होती है।
हिंसा कभी सफल नहीं हुई हैय आप एक ही दिन में पूरी दुनिया को नहीं बदल सकते। जो कोई भी आपसे यह वादा करता है कि वह एक ही झटके में आपके लिए सब कुछ बदल देगाकृवह या तो कोई मूर्ख है, या फिर कोई धूर्त!
ये तथाकथित इज्जतदार लोग कितने कमीने होते हैं!
ताकतवर मैं नहीं हूँ, बल्कि मेरी बुद्धि (तर्क) और सच ताकतवर हैं।
जानवरों का भविष्य मेरे लिए, खुद के हास्यास्पद लगने के डर से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका भविष्य, इंसानों के भविष्य के साथ अटूट रूप से जुड़ा हुआ है। सब कुछ बस एक सपना है।
मैं अपने बगीचे में दोपहर का सुहाना समय बिता रहा हूँ, और अपने आस-पास की हर जीवित चीज को देख रहा हूँ। जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ रही है, मुझे महसूस हो रहा है कि सब कुछ मुझसे दूर जा रहा है, और मैं हर चीज से और भी ज्यादा शिद्दत से प्यार करने लगा हूँ।
अगर तुम सच को दबाकर जमीन के नीचे दफना भी दोगे, तो भी वह और ज्यादा ही पनपेगा।
मेरी नजर में, तुम तब तक यह दावा नहीं कर सकते कि तुमने कोई चीज देखी है, जब तक तुमने उसकी तस्वीर न खींच ली हो।
क्या इंसान अपनी जिंदगी का पहला आधा हिस्सा खुशियों के सपनों में और दूसरा आधा हिस्सा पछतावों और डर में नहीं बिताता?
अतीत तो बस हमारे भ्रमों का कब्रिस्तान था, जहाँ इंसान बस कब्रों के पत्थरों से ठोकर खाता रहता था।
मोमबत्ती बुझा दो, मुझे यह देखने की जरूरत नहीं है कि मेरे विचार कैसे दिखते हैं। -एमिल जोला
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