12 अप्रैल 2024 को न्यूयॉर्क-प्रेस्बिटेरियन लोअर मैनहैटन हॉस्पिटल, न्यूयॉर्क में प्रसिद्ध कनाडाई-अमेरिकन लेखक, पत्रकार, टिप्पणीकार, न्यूज एंकर रॉबिन मैकनील (रॉबर्ट ब्रेकेन्रिज वेयर मैकनील, जन्म 19 जनवरी 1931 मॉन्ट्रियल, कनाडा) का निधन हुआ। उन्होंने 1975 में जिम लेहरर के साथ मिलकर एक ऐतिहासिक रूप से लोकप्रिय पब्लिक टेलीविजन न्यूज प्रोग्राम द रॉबर्ट मैकनील रिपोर्ट शुरू किया। मैकनील ने 1995 तक इस प्रोग्राम को को-एंकर किया। रॉबिन मैकनील के कुछ विचारणीय कथन
शब्द एक और जगह बनाते हैं, एक ऐसी जगह जहाँ आप सिर्फ अपनी आत्मा के साथ भागकर जा सकते हैं।
माता-पिता कुछ खास शब्दों के जरिए, जो आवाज के किसी रोमांचक अंदाज में, और दिल व आत्मा को ऊपर उठाने वाले भाव के साथ कहे गए हों, बच्चे के मन में जादू भर सकते हैं।
बदलाव जायज और जरूरी है, क्योंकि हमारी भाषा एक विशाल नदी की तरह है, जो यहाँ से गाद और बहती हुई चीजें उठाती है और वहाँ छोड़ देती है, लेकिन खुद लगातार और ज्यादा चौड़ी और समृद्ध होती जाती है।
टेलीविजन ने ऐसे लोगों का एक राष्ट्र बना दिया है जो खबरों के दीवाने हैं, जो हर रात दुनिया भर की खघ्बरों का अपना डोज पाने के लिए टीवी खोलते हैं।
मैं असल में पूरी तरह रिटायर नहीं हुआ हूँ, और शायद कभी पूरी तरह हो भी न पाऊँ, लेकिन रिटायरमेंट के बारे में सोचने के लिए मुझे न्यूयॉर्क शहर से बेहतर कोई जगह नहीं लगती।
वर्डस्ट्रक (शब्दों का दीवाना), मैं ठीक वैसा ही था, और अब भी हूँ, शब्दों की आवाज, शब्दों के रूप, शब्दों के स्वाद, और शब्दों को जबान और मन में महसूस करने का दीवाना।
मुझे अपनी राय रखने और जब मुझे लगे कि यह जरूरी है, तो उसे खुलकर जाहिर करने में खुशी होती है।
खैर, मेरे मन में थोड़ी-बहुत, बहुत हल्की सी, अमेरिका को लेकर एक तरह की शंका थी, एक ऐसा संक्रमण जो अमेरिका के सबसे करीबी दोस्तों के मन में भी कहीं न कहीं रहता है। यह शंका कि अमेरिका शायद उतना भी अच्छा न हो, जितना वह खुद को बताता है। और उसे इतनी जिद के साथ बार-बार यह कहने की क्या जरूरत है कि वह कितना अच्छा है?
मैं कनाडाई लोगों की उस आखिरी पीढ़ी में पला-बढ़ा, जो यह मानती थी कि ब्रिटेन में जो कुछ हो रहा है, वह कनाडा में हो रही चीजों के मुकाबले ज्यादा अहम है, लगभग उनसे भी ज्यादा। और मेरी माँ तो इस बात को पूरी शिद्दत से मानती थीं।
आप सीखते हैं, ठीक वैसे ही जैसे आप अच्छे तौर-तरीके सीखते हैं, कि चीजों को एक खास तरह की कूटनीति के साथ कैसे देखना चाहिए।
मैं कभी भी कोई पंडित (विशेषज्ञ/टीकाकार) नहीं बनना चाहता था।
जब मैं यहाँ का नागरिक बन गया, तो मुझे इस देश के बारे में अपने विचार, चाहे वे सकारात्मक हों या नकारात्मक, जाहिर करने में और भी ज्यादा आजादी महसूस होने लगी। मुझे लगता है कि मैं पहले जान-बूझकर और अनजाने में, अपनी जबान पर लगाम कसकर रखता था।
सबसे बड़ी विलासिता यह है कि आप कभी-कभार दोपहर में फिल्में और नाटक देखने जा सकें।
और मैं इसके पक्ष में हूँ क्योंकि मेरा एक गे (समलैंगिक) बेटा है, जो एक बहुत ही सफल थिएटर डिजाइनर है।
हमने पिछले साल जापान में एक महीना, संयुक्त राष्ट्र के काम से इस्तांबुल में एक हफ्ता, और अपने जन्मस्थान नोवा स्कोटिया में लगभग तीन महीने बिताए, जहाँ मेरे दो भाइयों के घर हैं, और हम इस गर्मियों में फिर वहाँ जाएँगे।
हाँ, पिछले साल दूसरी जिम्मेदारियों, जिनमें से ज्यादातर बोलने से जुड़े कार्यक्रम थे, में कुछ समय बिताने के बाद, अब मैं एक उपन्यास लिखने में लगभग आधा काम पूरा कर चुका हूँ, मुझे उम्मीद है कि यह 1998 में प्रकाशित होगा।
मुझे लगता है कि जिंदगी में हम जो सबक सीखते हैं, और यह एक पुराना सबक है, लेकिन हममें से हर किसी को इसे खुद ही सीखना पड़ता है, वह यह है कि इंसानी रिश्तों में, खासकर यौन संबंधों वगैरह में, जिस इंसान पर आप सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं और जिसके साथ सबसे ज्यादा सहज और आराम महसूस करते हैं, जरूरी नहीं कि आपका दिल उसी पर आए। -रॉबिन मैकनील
कृपया हमारी Hindi News Website : https://www.peoplesfriend.in देखिए, अपने सुझाव दीजिए ! धन्यवाद !
प्रेस / मीडिया विशेष – आप अपने समाचार, विज्ञापन, रचनाएं छपवाने, समाचार पत्र, पत्रिका पंजीयन, सोशल मीडिया, समाचार वेबसाइट, यूट्यूब चैनल, कंटेंट राइटिंग इत्यादि प्रेस/मीडिया विषयक कार्यों हेतु व्हाट्सऐप 9411175848 पर संपर्क करें।