नई दिल्ली, 3 मार्च 2026। पिछले साल भारतीय आप्रवासियों को अमेरिका ने हथकड़ियां, बेड़ियां पहनाकर अमृतसर हवाई अड्डे पर छोड़ा, मोदी कुछ नहीं बोले, भारी टैरिफ थोपे तब भी मोदी चुप, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में अमेरिका की शर्तें मान लीं, आपरेशन सिंदूर पर भारत-पाक संघर्ष विराम पर ट्रंप के दावे को नकारा नहीं और अब ईरान पर अवैध हमला, सुप्रीम लीडर अली हुसैन खामनेई की हत्या पर चुप्पी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की कार्यशैली, सोच पर सवाल भारत सहित दुनिया भर में उठ रहे हैं। बड़ी-बड़ी हांकने वाले मोदी अमेरिका और इस्राइल की ईरान पर की गई कार्रवाई पर चुप क्यों हैं ? इससे पहले वे वेनेजुएला मामले पर भी चुप रहे। एपस्टीन फाइल का असर है या कुछ और ? क्या अंदरखाने कोई मिलीभगत है, यह सवाल उठ रहा है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की लक्षित हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी को लेकर चिंता जताई है। सोनिया गांधी ने कहा कि यह मौन तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है। उन्होंने कहा कि इससे भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। एक अखबार में लिखे अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि एक मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता की हत्या एक दिन पहले अमेरिका और इस्राइल द्वारा किए गए लक्षित हमलों में हुई। उन्होंने इसे चल रही वार्ताओं के बीच किसी सत्तारूढ़ राष्ट्राध्यक्ष की हत्या बताते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर विघटन करार दिया। उन्होंने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की भी मांग की।
सोनिया गांधी ने कहा कि भारत सरकार ने न तो इस हत्या की निंदा की और न ही ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआत में अमेरिका-इस्राइल के हमलों का जिक्र किए बिना केवल ईरान की यूएई पर जवाबी कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने आगे कहा कि पीएम ने बाद में गहरी चिंता और संवाद-कूटनीति की सामान्य बात कही, जबकि हमलों से पहले यही प्रक्रिया जारी थी। सोनिया गांधी ने कहा कि बिना औपचारिक युद्ध घोषणा के और कूटनीतिक प्रक्रिया के दौरान किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) की भावना के विपरीत है, जो किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाता है। सोनिया गांधी ने तर्क दिया कि अगर ऐसे कृत्यों पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ओर से सिद्धांत आधारित आपत्ति दर्ज नहीं होती, तो अंतरराष्ट्रीय मानकों का क्षरण सामान्य होता जाएगा। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि हत्या से 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इस्राइल दौरे से लौटे थे, जहां उन्होंने पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के प्रति समर्थन दोहराया था। सोनिया गांधी के अनुसार, वैश्विक दक्षिण के कई देशों और ब्रिक्स साझेदारों द्वारा दूरी बनाए रखने के बीच भारत का यह रुख चिंताजनक है और इससे गलत संकेत जाते हैं।
इस बीच मीडिया में मंगलवार को आई खबर के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, ओमान पर हुआ हमला ईरान सरकार की सीधी मर्जी से नहीं हुआ। इस्राइली अखबार द यरुशलम पोस्ट के मुताबिक, अराघची ने कहा, हमने अपने सशस्त्र बलों को पहले ही सामान्य निर्देश दे दिए हैं कि वे चुने गए लक्ष्यों के प्रति सतर्क रहें। हमारी सैन्य इकाइयां अब वास्तव में स्वतंत्र हैं और पहले से तय सामान्य दिशानिर्देशों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं।


