नई दिल्ली, 14 मार्च 2026। लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को करीब 170 दिनों तक जोधपुर सेंट्रल जेल में रहने के बाद 14 मार्च 2026 को रिहा कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने उन पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को हटाकर उनकी हिरासत रद्द कर दी। वांगचुक को सितंबर 2025 में लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांग के दौरान हुई हिंसा के बाद गिरफ्तार किया गया था। रिहाई से पहले उनकी पत्नी गीतांजलि ने उनकी हिरासत को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर 17 मार्च को सुनवाई होनी थी। कोर्ट इस पर सरकार से जवाब मांगे इससे पहले ही केंद्र सरकार ने जोधपुर जेल में 170 दिन बिताने के बाद 14 मार्च 2026 को दोपहर में वांगचुक को रिहा कर दिया। गृह मंत्रालय ने लद्दाख में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए उन पर से एनएसए हटाने का निर्णय लिया। वांगचुक की रिहाई लद्दाख की प्रमुख संस्थाओं (लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस) के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है।
आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि केंद्र द्वारा सोनम वांगचुक की हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द किए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार एक बार फिर बेनकाब हो गई है। एक्स पर एक पोस्ट में केजरीवाल ने वांगचुक की हिरासत की आलोचना की और कहा कि इस तानाशाही का पर्दाफाश होना चाहिए। केजरीवाल ने कहा कि एक वैज्ञानिक और जलवायु कार्यकर्ता, जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया था, को बिना किसी सबूत के गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में बिताए उनके महीने न केवल उनके लिए व्यक्तिगत क्षति थे, बल्कि देश के लिए भी क्षति थे। इस घोर तानाशाही का तुरंत पर्दाफाश होना चाहिए और इसे रोकना चाहिए। केजरीवाल को दिल्ली की एक विशेष अदालत ने दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में 22 अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वांगचुक की रिहाई के फैसले का स्वागत किया। थरूर ने सर्वोच्च न्यायालय से बिना मुकदमे के अधिकतम हिरासत अवधि के लिए सख्त मानदंड बनाने का आग्रह किया। एक पोस्ट में थरूर ने बिना मुकदमे के अनिश्चितकालीन हिरासत की आलोचना करते हुए इसे औपनिवेशिक काल की अलोकतांत्रिक प्रथा बताया, जिसका एक परिपक्व लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि केंद्र ने सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द कर दी है, लेकिन 169 दिन का समय बहुत लंबा लगता है। सर्वोच्च न्यायालय को बिना मुकदमे के अधिकतम हिरासत अवधि के लिए सख्त मानदंड विकसित करने की जरूरत है। अनिश्चितकालीन हिरासत औपनिवेशिक काल से चली आ रही एक अलोकतांत्रिक प्रथा है। एक परिपक्व लोकतंत्र में इसका कोई स्थान नहीं है।