
मुंबई। अमेरिका और इस्राइल के ईरान पर हमलों से उत्पन्न परिस्थितियों से बाजार बुरी तरह लड़खड़ा गया है। सेंसेक्स की शीर्ष 10 कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में बीते सप्ताह सामूहिक रूप से 4.48 लाख करोड़ रुपये की भारी गिरावट आई। सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और एचडीएफसी बैंक को हुआ। बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 4,354.98 अंक या 5.51 प्रतिशत नीचे आ गया, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 1,299.35 अंक या 5.31 प्रतिशत के नुकसान में रहा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच महंगाई के दबाव और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे स्थानीय शेयर बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एसबीआई का बाजार मूल्यांकन सबसे ज्यादा 89,306.22 करोड़ रुपये घटकर 9,66,261.05 करोड़ रुपये पर आ गया। एचडीएफसी बैंक की बाजार हैसियत 61,715.32 करोड़ रुपये घटकर 12,57,391.76 करोड़ रुपये रही।
बजाज फाइनेंस का मूल्यांकन 59,082.49 करोड़ के नुकसान के साथ 5,32,053.54 करोड़ रुपये और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का बाजार पूंजीकरण 53,312.52 करोड़ रुपये घटकर 8,72,067.63 करोड़ रुपये रह गया। आईसीआईसीआई बैंक की बाजार हैसियत 42,205.04 करोड़ घटकर 8,97,844.78 करोड़ रुपये और भारती एयरटेल का मूल्यांकन 38,688.78 करोड़ के नुकसान के साथ 10,28,431.72 करोड़ रुपये रह गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मूल्यांकन में 33,289.88 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह 18,68,293.17 करोड़ रुपये रह गया। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का मूल्यांकन 31,245.49 करोड़ रुपये घटकर 4,88,985.57 करोड़ रुपये और इन्फोसिस का पूंजीकरण 24,230.96 करोड़ रुपये घटकर 5,06,315.58 करोड़ रुपये रह गया।
हिंदुस्तान यूनिलीवर की बाजार हैसियत 15,401.57 करोड़ रुपये घटकर 5,07,640.94 करोड़ रुपये रह गई। शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम पर रही। उसके बाद क्रमशरू एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इन्फोसिस और एलआईसी का स्थान रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, रुपये की कीमत में गिरावट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भारत की वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च के पहले पखवाड़े में घरेलू शेयर बाजार से 52,704 करोड़ रुपये (लगभग 5.73 अरब डॉलर) निकाले हैं।
फरवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये डाले थे, जो 17 माह का सबसे ज्यादा प्रवाह था। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले एफपीआई लगातार तीन माह तक शुद्ध बिकवाल रहे थे। जनवरी में उन्होंने 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये निकाले थे। मार्च में अब तक (13 मार्च तक) एफपीआई ने लगभग 52,704 करोड़ की निकासी की है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि एफपीआई की निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। एंजल वन के वरिष्ठ बुनियादी विश्लेषक वकारजावेद खान ने कहा कि इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक संघर्ष की आशंकाओं ने ब्रेंट कच्चे तेल को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है। इसके अलावा रुपया 92 प्रति डॉलर के स्तर के आसपास कमजोर बना हुआ है।
बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने के बीच एफपीआई अब बिकवाली कर रहे हैं। इसी तरह की राय जताते हुए जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत की वृद्धि और कॉरपोरेट की कमाई पर असर पड़ने की चिंताओं ने एफपीआई की धारणा को प्रभावित किया है। वीके विजयकुमार ने कहा कि पिछले 18 माह में विकसित और उभरते बाजारों की तुलना में भारत से कमजोर रिटर्न की वजह से भी एफपीआई की दिलचस्पी कम हुई है। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन को अभी ज्यादा आकर्षक बाजार के रूप में देखा जा रहा है।
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