
तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि दुनिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य खुला हुआ है, लेकिन अमेरिका और इस्राइल से जुड़े जहाजों और टैंकरों के लिए इसे बंद किया गया है। अराघची का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की प्रमुख शक्तियों से अपील की है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने नौसैनिक जहाज तैनात करें, ताकि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को हर हाल में खुला रखा जा सके। एक बातचीत में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। यह केवल हमारे दुश्मनों, अमेरिका और उसके सहयोगियों के टैंकरों और जहाजों के लिए बंद है। बाकी सभी देशों के लिए यहां से आवागमन पर कोई रोक नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर नाकेबंदी क्यों की है, तो उन्होंने जवाब दिया कि यह कदम सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
अराघची ने रूस और चीन के साथ ईरान के संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश ईरान के रणनीतिक साझेदार हैं और उनके साथ लंबे समय से घनिष्ठ सहयोग बना हुआ है। उनके अनुसार यह सहयोग केवल कूटनीतिक या आर्थिक ही नहीं, बल्कि सैन्य स्तर पर भी जारी है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना के कमांडर अलीरेजा तंगसीरी ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर कहा कि यह समुद्री मार्ग अभी भी खुला है और उस पर ईरान का नियंत्रण बना हुआ है। तंगसीरी ने अमेरिका के उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की नौसेना को भारी नुकसान पहुंचा है और अमेरिका तेल टैंकरों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित कर सकता है। ईरानी मीडिया के हवाले से जारी बयान में उन्होंने कहा कि अमेरिका के ये दावे तथ्यों से मेल नहीं खाते। ईरानी सैन्य अधिकारी ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को सैन्य रूप से बंद नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह मार्ग खुला है, लेकिन इस पर नियंत्रण ईरान के पास है और देश अपनी सुरक्षा जरूरतों के अनुसार इस पर निगरानी बनाए हुए है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से इसकी अहमियत बेहद ज्यादा है। अनुमान के मुताबिक दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग एक-पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों को प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में इस रूट से जुड़े हर देश में हर चीज की किल्लत हो जाएगी।
मालूम हो कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी अपने पहले संदेश में साफ किया कि ईरान इस रणनीतिक जलडमरूमध्य पर अपना प्रभाव बनाए रखेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और समुद्री सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यहां स्पष्ट कर दें कि दो भारतीय जहाजों के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर जाने देने की बातें कही जा रही हैं लेकिन ईरान और भारत की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
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