
20 मार्च 1828 स्कीन नगर पालिका, नॉर्वे में हेनरिक जोहान इबसेन का जन्म हुआ। हेनरिक इबसेन विख्यात नॉर्वेजियन नाटककार बने। हेनरिक इबसेन को 19वीं सदी के दुनिया के सबसे जाने-माने लेखकों में से एक माना जाता है और अक्सर उन्हें आधुनिक नाटक का जनक कहा जाता है। उन्होंने नाट्य यथार्थवाद की शुरुआत की, लेकिन साथ ही उन्होंने गीतात्मक महाकाव्य रचनाएँ भी लिखीं। हेनरिक इबसेन के कुछ विचारणीय उद्धरण यहां प्रस्तुत हैं
पैसा कई चीजों का बाहरी आवरण हो सकता है, लेकिन उसका असली सार नहीं। यह आपको भोजन तो दिला सकता है, लेकिन भूख नहीं, दवा तो दिला सकता है, लेकिन स्वास्थ्य नहीं, जान-पहचान तो दिला सकता है, लेकिन दोस्त नहीं नौकर तो दिला सकता है, लेकिन वफादारी नहीं, खुशी के दिन तो दिला सकता है, लेकिन शांति या सच्चा सुख नहीं।
कोई इंसान अपने साथ सबसे बुरा तब करता है, जब वह दूसरों के साथ अन्याय करता है।
दुनिया का सबसे मजबूत इंसान वह है, जो सबसे ज्यादा अकेला खड़ा होता है।
वैज्ञानिकों के लिए जानवरों को तकलीफ देना बिल्कुल भी माफ करने लायक नहीं है, उन्हें अपने प्रयोग पत्रकारों और राजनेताओं पर करने चाहिए।
जिंदा रहने में हमेशा एक जोखिम होता है, और अगर आप ज्यादा जीवंत हैं, तो जोखिम भी ज्यादा होता है।
हमारा पूरा अस्तित्व हमारे अपने भीतर की अंधेरी ताकतों के खिलाफ एक लड़ाई के सिवा कुछ भी नहीं है।
अगर आपको खुद पर ही शक है, तो सचमुच आप एक कमजोर जमीन पर खड़े हैं।
बहुमत कभी भी सही पक्ष में नहीं होता। कभी नहीं, मैं कहता हूँ! यह उन सामाजिक झूठों में से एक है, जिनके खिलाफ एक आजाद और समझदार इंसान को जंग छेड़नी चाहिए। किसी देश की आबादी में बहुमत किसका होता है? क्या यह होशियार लोगों का होता है, या बेवकूफों का? मुझे नहीं लगता कि आप इस बात से इनकार करेंगे कि इस समय पूरी दुनिया में बेवकूफ लोगों का बहुमत पूरी तरह से हावी है।
अगर किसी की इच्छाशक्ति अटूट हो, तो उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है।
आज के समाज में एक औरत खुद जैसी नहीं रह सकती, यह समाज पूरी तरह से पुरुषों का बनाया हुआ है, जिसके कानून पुरुषों ने बनाए हैं और जिसकी न्याय-व्यवस्था औरतों के व्यवहार को पुरुषों के नजरिए से देखती है।
एक इंसान का सबसे पहला फर्ज क्या है? इसका जवाब बहुत छोटा है, खुद जैसा होना।
क्या बहुमत तब सही था, जब वे चुपचाप खड़े देखते रहे और ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा दिया गया? क्या बहुमत तब सही था, जब उन्होंने यह मानने से इनकार कर दिया कि पृथ्वी सूरज के चारों ओर घूमती है, और गैलीलियो को एक कुत्ते की तरह घुटनों के बल झुकने पर मजबूर कर दिया? बहुमत को सही साबित होने में पचास साल लग जाते हैं। बहुमत तब तक सही नहीं होता, जब तक वह सही काम नहीं करता। हमारे बीच सच्चाई और आजादी का सबसे खतरनाक दुश्मन वह बड़ा बहुमत है जो एक साथ जुड़ा हुआ है।
ताकतवर लोगों को अकेला रहना सीखना चाहिए।
दोस्तों से डरना चाहिए, इसलिए नहीं कि वे हमसे क्या करवाते हैं, बल्कि इसलिए कि वे हमें क्या करने से रोकते हैं।
जिंदा रहने का मतलब है, उन लोगों से लड़ना जो दूसरों को परेशान करते हैं।
जो लोग खुद को सेहतमंद रखना नहीं जानते, उनमें इतनी तो समझ होनी चाहिए कि वे खुद को दफना लें, और इस पर अपना समय बर्बाद न करें।
उस विदेशी शब्द का इस्तेमाल मत करो, आदर्श। हमारे पास इसके लिए एक बेहतरीन देसी शब्द है, झूठ।
सच्चाई की भावना और आजादी की भावना, ये ही समाज के दो खंभे हैं।
…अब मैं लोगों की कही बातों और किताबों में लिखी बातों को मानने के लिए तैयार नहीं हूँ। मुझे चीजों के बारे में खुद सोचना होगा, और अपने जवाब खुद ढूँढ़ने होंगे।
कोई भी पार्टी एक सॉसेज बनाने वाली मशीन की तरह होती है, यह हर तरह के दिमागों को एक साथ पीसकर एक ही तरह का बेमतलब का मसाला बना देती है।
अनुभव का चश्मा, इसे पहनकर आप दूसरी बार चीजों को ज्यादा साफ-साफ देख पाएँगे।
लेकिन मुझे तो लगभग ऐसा लगता है कि हम सब के सब भूत हैं। हमारे अंदर सिर्फ वही चीजें नहीं घूमतीं जो हमें अपने माता-पिता से विरासत में मिली हैं। बल्कि, हमारे अंदर हर तरह के पुराने विचार, बेजान पुरानी मान्यताएँ और ऐसी ही दूसरी चीजें भी घूमती रहती हैं। उनमें कोई जान नहीं होती, फिर भी वे हमसे चिपकी रहती हैं, और हम उन्हें खुद से अलग नहीं कर पाते। जब भी मैं कोई अखबार उठाता हूँ, तो मुझे उसकी लाइनों के बीच भूत घूमते हुए दिखाई देते हैं।
हजार शब्द भी उतना गहरा प्रभाव नहीं छोड़ पाते, जितना कि एक काम।

