19 अप्रैल 2013 को कोको बीच, फ्लोरिडा में जाने माने अमेरिकी बिजनेसमैन, लेखक, पत्रकार और कॉलमिस्ट अल न्यूहार्थ (एलन हेरोल्ड अल न्यूहार्थ, जन्म 22 मार्च 1924, यूरेका, साउथ डकोटा) का निधन हुआ। अल न्यूहार्थ ने प्रसिद्ध अमेरिकी अखबार यूएस टुडे की स्थापना की और दो संस्थाएं द फ्रीडम फोरम और द न्यूजियम भी स्थापित कीं। अल न्यूहार्थ अखबार इंडस्ट्री के पहले ऐसे पुरुष जिन्हें एसोसिएशन फॉर वीमेन इन कम्युनिकेशंस का सबसे बड़ा अवॉर्ड, हेडलाइनर अवॉर्ड मिला। अल न्यूहार्थ को अमेरिकन एकेडमी ऑफ अचीवमेंट का गोल्डन प्लेट अवॉर्ड पत्रकारिता में बेहतरीन काम के लिए वॉल्टर क्रोनकाइट अवॉर्ड सहित अन्य अनेक सम्मान और पुरस्कार मिला।
द फ्रीडम फोरम हर साल मीडिया में बेहतरीन काम के लिए अल न्यूहार्थ अवॉर्ड देता है। यूएस टुडे प्रतिष्ठित अमेरिकी रोजाना छपने वाला मिडिल-मार्केट अखबार और न्यूज ब्रॉडकास्टिंग कंपनी है। इसकी शुरुआत अल न्यूहार्थ ने 1980 में की थी और यह 14 सितंबर 1982 को लॉन्च हुआ था। यह अखबार यूएस टुडे कंपनी के कॉर्पोरेट हेडक्वार्टर, न्यूयॉर्क शहर से ऑपरेट होता है। द न्यूजियम पत्रकारिता म्यूजियम था, जो पहले रॉसलिन, वर्जीनिया में और बाद में 555 पेंसिल्वेनिया एवेन्यू, वॉशिंगटन में संचालित हुआ। यह न्यूज और पत्रकारिता को समर्पित था, जो आजाद अभिव्यक्ति और यूनाइटेड स्टेट्स के संविधान के पहले संशोधन को बढ़ावा देता था और साथ ही संचार के विकास को भी प्रदर्शित करता था। इस म्यूजियम का मकसद गैर-पक्षपाती अमेरिकी फाउंडेशन है जो प्रेस की आजादी, बोलने की आजादी और सोचने की आजादी के लिए समर्पित था और यह कि आम लोग और मीडिया एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकें।
यूएस टुडे के बावत अल न्यूहार्थ ने शुरुआत में कहा था, यूएस टुडे उम्मीद करता है कि वह बेहतर समझ और एकता के लिए एक मंच का काम करेगा, ताकि यूएसए सचमुच एक राष्ट्र बन सके।
हम मीडिया वाले बीमा की स्थिति, में मदद कर सकते हैं, अगर हम तूफान के लंबे समय के पूर्वानुमानों को सही नजरिए से पेश करें, ये पूर्वानुमान अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर बताए जाते हैं और बीमा कंपनियों के फायदे में काम करते हैं।
पहला संशोधन एक आजाद प्रेस की गारंटी देता है। हम मीडिया वालों को यह पक्का करना चाहिए कि यह एक निष्पक्ष प्रेस हो।
जब लोकतंत्र की आवाजों को खामोश कर दिया जाता है, तो आजादी एक खोखला विचार बनकर रह जाती है। किसी भी पुरुष या महिला को, उसके द्वारा कही या लिखी गई किसी बात के लिए, खामोशी के साए में रहने की सजा नहीं मिलनी चाहिए।
किसी अच्छे आइडिया को अपनाने में कभी हिचकिचाएँ नहीं।
हर किसी को चालीस साल का होने से पहले, कम से कम एक बार तो जबरदस्त तरीके से नाकाम होना ही चाहिए।
तभी खाएँ जब भूख लगी हो। तभी पिएँ जब प्यास लगी हो। तभी सोएँ जब थके हुए हों। तभी सेक्स करें जब कामुकता महसूस हो रही हो।
जब किसी भी काम की जगह पर कोई बड़ी गलती होती है, तो अक्सर बॉस या बॉस लोग ही कसूरवार होते हैं, न कि क्लर्क, सेक्रेटरी या सेल्सपर्सन। रिपोर्टर नहीं, सारी जिम्मेदारी आखिर में बॉस की ही होती है।
पहाड़ और टीले के बीच का फर्क, बस आपके नजरिए का फर्क है।
हर अनुभव से सिर्फ कुछ सीखना ही काफी नहीं है, बल्कि कुछ सकारात्मक सीखना चाहिए।
जितना हो सके, उतने अच्छे बनें, और जब जरूरी हो, तो उतने ही सख्त भी बनें।
जब मेरा पहला काम नाकाम हुआ और आसमान नहीं गिरा, तब मैंने डरना छोड़ दिया। -अल न्यूहार्थ
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