
23 जुलाई 1912 को लॉन्ग ब्रांच, न्यू जर्सी, अमेरिका में मेयर हॉवर्ड अब्राम्स का जन्म हुआ। एम. एच. अब्राम्स के नाम से सुपरिचित वे प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक और साहित्य समीक्षक बने। एम. एच. अब्राम्स रोमांटिसिज््म (रोमांटिक युग की विचारधारा) पर अपने काम विशेष रूप से अपने उपन्यास द मिरर एंड द लैंप के लिए जाने जाते थे। अब्राम्स की अगुवाई में द नॉर्टन एंथोलॉजी ऑफ इंग्लिश लिटरेचर पूरे अमेरिका में अंडरग्रेजुएट सर्वे कोर्स के लिए स्टैंडर्ड टेक्स्ट बन गया और साहित्य के मुख्य संग्रह को तय करने में एक बड़ा ट्रेंडसेटर साबित हुआ। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने हार्वर्ड की साइको-अकॉस्टिक्स लैबोरेटरी में काम किया। उन्होंने अपने काम को इस तरह बताया, शोर-शराबे वाले मिलिट्री माहौल में आवाज के जरिए बातचीत की समस्या को हल करना। इसके लिए उन्होंने ऐसे मिलिट्री कोड बनाए जो साफ सुनाई देते थे और ऐसे लोगों को चुनने के लिए टेस्ट बनाए जिनमें शोर-शराबे के बीच भी आवाज पहचानने की बेहतर क्षमता थी। #MHAbrams ने प्रमाण दिए कि रोमांटिक युग से पहले साहित्य को आमतौर पर एक ऐसे आईने के तौर पर देखा जाता था जो असल दुनिया की नकल करता था, जबकि रोमांटिक लेखकों के लिए, लिखना एक लैंप की तरह था, लेखक की अंदरूनी आत्मा की रोशनी दुनिया को रोशन करने के लिए बाहर निकलती थी। 1998 में मॉडर्न लाइब्रेरी ने द मिरर एंड द लैंप को 20वीं सदी की 100 सबसे बेहतरीन अंग्रेजी-भाषा की नॉन-फिक्शन किताबों में से एक माना।
एम. एच. अब्राम्स द नॉर्टन एंथोलॉजी ऑफ इंग्लिश लिटरेचर के जनरल एडिटर रहे साथ ही वे उस एंथोलॉजी के एडिटर भी थे जिसका नाम द रोमांटिक पीरियड था, जिसमें उन्होंने लेखकों और उनकी ख्याति का मूल्यांकन किया था। लॉर्ड बायरन के बारे में अपने परिचय में वे इस बात पर जोर देते हैं कि कैसे बायरनिज्म (बायरन की विचारधारा) नीत्शे के सुपरमैन के विचार से जुड़ी है और पर्सी बिश शेली के परिचय में अब्राम्स कहते हैं, शेली के छोटे से जीवन की त्रासदी यह थी कि हमेशा अच्छा करने की चाहत के बावजूद उन्होंने खुद पर और अपने प्रियजनों पर मुसीबत और दुख ही ढाए।
साहित्य के बिना जीवन गरीबी जैसा है। यह (साहित्य) आपको हर तरह से बड़ा बनाता है। यह आपके काम पर रोशनी डालता है। यह आपको ऐसी संभावनाएँ दिखाता है जिनके बारे में आपने सोचा भी नहीं होगा। यह आपको खुद से अलग दूसरे लोगों की जिंदगी जीने का मौका देता है। यह आपका दायरा बढ़ाता है, आपको और ज्यादा इंसान बनाता है। यह जिंदगी को मजेदार बनाता है।
हम इंसान हैं, और हमारे लिए इंसानियत से ज्यादा दिलचस्प कुछ भी नहीं है। साहित्य की खासियत यह है कि यह पूरी तरह से इंसानी चीज है, इंसानों द्वारा, इंसानों के लिए और इंसानों के बारे में। अगर आप उस नजरिए को खो देते हैं, तो आप साहित्य की ताकत और उसकी स्थायी अहमियत के स्रोत को ही खत्म कर देते हैं।
मुख्य रूपक यह तय करने में मदद करते हैं कि हम चीजों को कैसे देखते-समझते हैं और अपनी समझ के बारे में कैसे सोचते हैं।
मुझे लगता है कि किसी छात्र को यह सिखाना सबसे मुश्किल काम है कि कागज पर जो कुछ भी लिखा जाता है, उसे बदला जा सकता है। वह आखिरी चीज नहीं होती, बल्कि पहली चीज होती हैय हो सकता है कि वह किसी चीज की बस एक हल्की-फुल्की या अस्पष्ट पहचान हो, जिस पर आपको बाद में वापस आकर उसे फिर से लिखना पड़े।
अगर आप किसी कविता का मतलब जानने के लिए उसे जल्दी-जल्दी पढ़ते हैं, तो आप कविता के असली स्वरूप को ही चूक जाते हैं।
अगर आपने दशकों तक बदलते विचारों के दौर को देखा है और उससे कुछ सीखा है, तो वह यही है कि सभी भविष्यवाणियाँ असल में गलत ही होती हैं।
जॉन अपडाइक (लोकप्रिय अमेरिकी उपन्यासकार और कवि) को पढ़ना हमेशा मजेदार होता है। और मेरे पुराने छात्रों में से एक टॉम पिंचन और हेरोल्ड ब्लूम, जो मेरे एक और पुराने छात्र रहे हैं।
18वीं सदी के धर्मनिरपेक्ष ज्ञानोदय के प्रमुख दार्शनिकों की थ्योरीज अनजाने में ही सही बाइबिल और धर्मशास्त्र पर आधारित थीं।
यह अद्भुत है कि कैसे युगों-युगों से, अलग-अलग देशों में और सभी भाषाओं में शेक्सपियर बेजोड़ बनकर उभरे हैं।
जब मैं ग्रेजुएट छात्र था तो हार्वर्ड के प्रमुख विद्वानों की दिलचस्पी विचारों के इतिहास में थी।
कला के वे तरीके जिनमें हम खुद को पहचानते हैं और खुद को स्थापित करते हैं वे तब तक बने रहेंगे जब तक इंसानियत बनी रहेगी।
शुरुआत में, छात्र अक्सर पहली कोशिश में ही ठिठक जाते हैं या घबरा जाते हैं। असली बदलाव तब आता है जब उन्हें एहसास होता है कि वे इसे और बेहतर बना सकते हैं, उनके मकसद क्या थे, यह पहचानना और उन मकसदों को पाने के बेहतर तरीके खोजना।
मुझे लगता है कि मैंने जो भी चीजें पब्लिश की हैं, वे मजबूरी में पब्लिश की गई हैं, न कि इसलिए कि वे एकदम सही थीं।
जब कोई एकदम नई चीज सामने आती है, तो खासकर युवा उसे तुरंत अपना लेते हैं। आप इसकी शिकायत नहीं कर सकते। मुझे लगता है कि उसका जमाना बीत चुका है, लेकिन उसका असर हुआ है और आगे भी होता रहेगा।
सख्त मेहनत से लिखी गई चीजें पढ़ने में आसान या कम से कम पहले के मुकाबले आसान होती हैं।
अगर आप अपनी राइटिंग या टीचिंग का लेवल ऐसा नहीं रखते जिससे उन्हें (पाठकों को) थोड़ी मेहनत करनी पड़े तो वे कभी भी अपनी दिमागी काबिलियत को नहीं बढ़ा पाएंगे। -एम. एच. अब्राम्स
Literature makes you more human and life more enjoyable—a thought-provoking sentiment from the American author and literary critic M. H. Abrams
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