
21 अगस्त 1995 को शिकागो, इलिनोइस में भारतीय-अमेरिकी सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर (जन्म 19 अक्टूबर 1910 लाहौर, पाकिस्तान) का निधन हुआ। सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर को 1983 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला, तारों की संरचना और विकास के लिए महत्वपूर्ण भौतिक प्रक्रियाओं के सैद्धांतिक अध्ययन। तारों के विकास के बारे में उनके गणितीय विश्लेषण से विशाल तारों के विकास के बाद के चरणों के कई उपलब्ध सैद्धांतिक मॉडल सामने आए। चंद्रशेखर सीमा एक व्हाइट ड्वार्फ (श्वेत वामन) के अधिकतम द्रव्यमान (1.44 सौर द्रव्यमान) को बताती है। इससे अधिक द्रव्यमान होने पर तारे का बचा हुआ हिस्सा ढहकर न्यूट्रॉन स्टार या ब्लैक होल बन जाता है। उनके नाम पर कई अवधारणाओं, संस्थानों और आविष्कारों का नाम रखा गया है, जिनमें चंद्र एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी भी शामिल है। #SubrahmanyanChandrasekhar ने यह सम्मान तो स्वीकार किया, लेकिन वे इस बात से नाराज थे कि प्रशस्ति-पत्र में केवल उनके शुरुआती काम का ही जिक्र था, उन्होंने इसे जीवन भर की उपलब्धियों का अपमान माना। सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर यह पुरस्कार विलियम ए. फाउलर के साथ साझेदारी में दिया गया।
इस सीमा की गणना सबसे पहले चंद्रशेखर ने 1930 में भारत से कैम्ब्रिज, इंग्लैंड अपनी उच्च शिक्षा (ग्रेजुएट स्टडीज) के लिए पहली यात्रा के दौरान की थी। 1979 में नासा ने अपनी चार ग्रेट ऑब्जर्वेटरीज (बड़ी वेधशालाओं) में से तीसरी का नाम चंद्रशेखर के नाम पर रखा। यह नामकरण एक प्रतियोगिता के बाद किया गया था, जिसमें पचास राज्यों और इकसठ देशों से 6,000 प्रविष्टियाँ आई थीं। चंद्र एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी को 23 जुलाई 1999 को स्पेस शटल कोलंबिया द्वारा लॉन्च और तैनात किया गया था। चंद्रशेखर संख्या, मैग्नेटोहाइड्रोडायनामिक्स की एक महत्वपूर्ण आयामहीन संख्या है, का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया है। क्षुद्रग्रह 1958 चंद्र का नाम भी चंद्रशेखर के नाम पर रखा गया है। हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप का नाम भी उन्हीं के नाम पर है। बायोग्राफिकल मेमोयर्स ऑफ फेलो ऑफ द रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन में आर. जे. टेलर ने लिखा था, चंद्रशेखर एक क्लासिकल एप्लाइड मैथमेटिशियन (अनुप्रयुक्त गणितज्ञ) थे, जिनका शोध मुख्य रूप से खगोल विज्ञान में लागू होता था और उनके जैसा व्यक्ति शायद ही दोबारा कभी देखने को मिले।
2010 में सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर के 100वें जन्मदिन के मौके पर, शिकागो यूनिवर्सिटी ने चंद्रशेखर सेंटेनियल सिम्पोजियम 2010 नाम का एक कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें रोजर पेनरोस, किप थॉर्न, फ्रीमैन डायसन, जयंत वी. नार्लीकर, राशिद सुन्याएव, जी. श्रीनिवासन और क्लिफर्ड विल जैसे जाने-माने एस्ट्रोफिजिसिस्ट शामिल हुए। इस कार्यक्रम में हुई रिसर्च से जुड़ी बातचीत को 2011 में फ्लुइड फ्लोज टू ब्लैक होल्स – ए ट्रिब्यूट टू एस चंद्रशेखर ऑन हिज बर्थ सेंटेनरी किताब के रूप में छापा गया। 19 अक्टूबर 2017 को गूगल ने चंद्रशेखर के 107वें जन्मदिन पर गूगल ने डूडल के जरिए सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर को सम्मान दिया। सैद्धांतिक भौतिकी में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर को अमेरिका, ब्रिटेन सहित अनेक देशों ने सम्मान और पुरस्कार दिए। भारत ने उन्हें 1968 में पद्मविभूषण से सम्मानित किए।
यहां पेश हैं सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर के कुछ वैज्ञानिक उद्धरण
विज्ञान हमारे आस-पास की दुनिया को देखने का एक नजरिया है। विज्ञान एक ऐसी जगह है जहाँ प्रकृति में जो कुछ भी आप पाते हैं, वह आपको खुशी देता है।
ईश्वर इंसान का सबसे बड़ा आविष्कार है।
किसी अजीब तरह से मुझे जो भी नई बात या समझ मिली, वह मुझे अपनी खोज नहीं लगी, बल्कि ऐसी चीज लगी जो हमेशा से मौजूद थी और जिसे मैंने बस संयोग से खोज लिया था।
मेरे 45 साल के वैज्ञानिक जीवन में सबसे चैंकाने वाला अनुभव यह एहसास रहा है कि आइंस्टीन के जनरल रिलेटिविटी के समीकरणों का एक सटीक समाधान, जिसे न्यूजीलैंड के गणितज्ञ रॉय केर ने खोजा था, ब्रह्मांड में मौजूद अनगिनत विशाल ब्लैक होल का बिल्कुल सटीक रूप दिखाता है।
खूबसूरती के सामने सिहर उठना, यह अविश्वसनीय तथ्य कि गणित में सुंदरता की खोज से प्रेरित कोई खोज प्रकृति में अपना सटीक रूप पा लेती है, मुझे यह कहने के लिए प्रेरित करता है कि सुंदरता वह चीज है जिस पर इंसानी दिमाग सबसे गहरे और गंभीर स्तर पर प्रतिक्रिया करता है।
विज्ञान की खोज की तुलना अक्सर ऊंचे और कम ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ने से की जाती है। लेकिन हममें से कौन कल्पना में भी एवरेस्ट पर चढ़ने और उसकी चोटी तक पहुँचने की उम्मीद कर सकता है, जब आसमान नीला हो और हवा शांत हो, और हवा की उस शांति में बर्फ की चमकदार सफेदी में दूर-दूर तक फैली पूरी हिमालय पर्वतमाला को देखा जा सके? हममें से कोई भी प्रकृति और अपने आस-पास के ब्रह्मांड के ऐसे नजारे की उम्मीद नहीं कर सकता। लेकिन नीचे घाटी में खड़े होकर कंचनजंगा पर सूरज उगने का इंतजार करने में कुछ भी छोटा या मामूली नहीं है।
मैं अपनी बात शुरू करने से पहले एक निजी बात कहना चाहूँगा ताकि बाद में मेरी बातों का गलत मतलब न निकाला जाए। मैं खुद को नास्तिक मानता हूँ।
आने वाली पीढ़ियाँ ही समय के साथ हम सभी का सही आकलन करेंगी और हममें से हर एक को हमारी सही और विनम्र जगह देंगी और आखिर में, आने वाली पीढ़ियों का फैसला ही असल में मायने रखता है। असल में वही सफल होता है जो अच्छे या बुरे भाग्य से प्रभावित हुए बिना अपनी पसंद के काम में डटा रहता है। यह याद रखना अच्छा है कि आम तौर पर आने वाली पीढ़ियों के फैसले और समकालीनों के फैसले के बीच कोई संबंध नहीं होता।
असल में तारों की स्थितियों में पदार्थ आम तौर पर इतना ज्यादा आयनित (आयोनाइज्ड) होता है कि, जैसा कि हम अध्याय 7 में विस्तार से देखेंगे, रासायनिक संरचना में अनिश्चितता मुख्य रूप से दो सबसे हल्के तत्वों, यानी हाइड्रोजन और हीलियम की मात्रा में अनिश्चितता के कारण होती है। इसलिए, चर्चा में सबसे हल्के तत्वों की मात्रा को एक नए पैरामीटर के तौर पर माना जाना चाहिए। इस तरह हम संक्षेप में कह सकते हैं कि हमारी बुनियादी समस्या इस तरह का सैद्धांतिक संबंध खोजना है। -सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर
Some scientific quotes from the Nobel Prize-winning Indian-American theoretical physicist Subrahmanyan Chandrasekhar

