2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में महात्मा गांधी (मोहनदास करमचंद गांधी) का जन्म हुआ। महात्मा गांधी वकील, उपनिवेशवाद-विरोधी राष्ट्रवादी और राजनीतिक नैतिकतावादी थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी के सफल अभियान का नेतृत्व करने के लिए अहिंसक प्रतिरोध का इस्तेमाल किया, जिसने बाद में दुनिया भर में नागरिक अधिकारों और आजादी के आंदोलनों को प्रेरित किया। महात्मा (महान आत्मा, आदरणीय) सम्मानजनक उपाधि उन्हें पहली बार 1914 में दक्षिण अफ्रीका में उन्हें दी गई थी। महात्मा गांधी ने भारत से पहले दक्षिण अफ्रीका में अश्वतों और अन्य प्रवासियों के खिलाफ होने वाले भेदभाव, अत्याचार इत्यादि के खिलाफ आंदोलन किया था। महात्मा गांधी के बारे में दुनिया जानती है, मानवाधिकारवादी उनके मार्ग का अनुकरण करते हैं। हिंदूवादी होने के साथ गांधी मानवतावाद और अहिंसा को सर्वोपरि रखते थे। गैरबराबरी और भेदभाव का उन्होंने विरोध किया। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के वे प्रमुख व्यक्ति थे, उनके साथ लाखों लोग खड़े हो जाते थे। महात्मा गांधी को ब्रिटिश भारत सरकार ने कई बार जेल में डाला।
अंग्रेज समर्थक हिंदू महासभा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ महात्मा गांधी को नापसंद करते थे, उनकी हत्या का कई बार प्रयास किया गया। आखिरकार 30 जनवरी 1948 को आरएसएस के प्रमुख चिंतक विनायक दामोदर सावरकर के चेले नाथूराम गोडसे गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी। प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने ऑल-इंडिया रेडियो पर देशवासियों को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी की हत्या की खबर कुछ इस तरह दी, दोस्तों और साथियों, हमारी जिंदगी से रोशनी चली गई है और चारों ओर अंधेरा छा गया है और मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं आपसे क्या कहूँ या कैसे कहूँ। हमारे प्यारे नेता, जिन्हें हम बापू कहते थे, राष्ट्रपिता, अब हमारे बीच नहीं रहे। शायद ऐसा कहना गलत होगा, फिर भी, हम उन्हें फिर कभी वैसे नहीं देख पाएँगे जैसे इतने सालों से देखते आए हैं, हम सलाह के लिए उनके पास नहीं भाग पाएँगे या उनसे सांत्वना नहीं माँग पाएँगे, और यह न केवल मेरे लिए, बल्कि इस देश के करोड़ों लोगों के लिए एक बहुत बड़ा सदमा है।
महात्मा गांधी को 15वीं सदी के गुजराती भक्त कवि नरसी मेहता का भजन बहुत प्रिय था, वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीड़ पराई जाणे रे, पर दुक्खे उपकार करे तो ये मन अभिमान न आणे रे। (सच्चा भक्त वही है जो दूसरों के दर्द को महसूस करे, किसी का उपकार करे तो खुद पर अभिमान न करे।)
यहां पेश हैं महात्मा गांधी के कुछ प्रेरक, विचारणीय, अनुकरणीय कथन
दुनिया में आप जो बदलाव देखना चाहते हैं, वह खुद बनें।
ऐसे जिएँ जैसे आप कल मरने वाले हों। ऐसे सीखें जैसे आप हमेशा जीने वाले हों।
आँख के बदले आँख पूरी दुनिया को अंधा बना देगी।
खुशी तब मिलती है जब आपके विचार, आपके शब्द और आपके काम एक-दूसरे के अनुरूप हों।
जब मैं निराश होता हूँ, तो मुझे याद आता है कि इतिहास में हमेशा सच्चाई और प्यार की ही जीत हुई है। इतिहास में तानाशाह और हत्यारे हुए हैं, और कुछ समय के लिए वे अजेय लग सकते हैं, लेकिन अंत में, उनका पतन निश्चित है। हमेशा याद रखें, हमेशा।
कमजोर लोग कभी माफ नहीं कर सकते। माफ करना मजबूत लोगों का गुण है।
जहाँ प्यार है, वहाँ जीवन है।
प्रार्थना का मतलब कुछ माँगना नहीं है। यह आत्मा की एक तड़प है। यह अपनी कमजोरी को रोजाना स्वीकार करना है। प्रार्थना में बिना शब्दों के दिल का होना, बिना दिल के शब्दों के होने से बेहतर है।
मुझे आपके ईसा मसीह पसंद हैं, लेकिन आपके ईसाई पसंद नहीं। आपके ईसाई आपके ईसा मसीह जैसे बिल्कुल नहीं हैं।
अगर आजादी में गलतियाँ करने की आजादी शामिल नहीं है, तो ऐसी आजादी का कोई फायदा नहीं।
मेरी इजाजत के बिना कोई मुझे चोट नहीं पहुँचा सकता।
ईश्वर का कोई धर्म नहीं होता।
पाप से नफरत करो, पापी से प्यार करो।
मैं किसी को भी अपने मन में गंदे पैरों के साथ घूमने नहीं दूँगा।
हमारे विश्वास हमारे विचार बन जाते हैं,
हमारे विचार हमारे शब्द बन जाते हैं,
हमारे शब्द हमारे काम बन जाते हैं,
हमारे काम हमारी आदतें बन जाते हैं,
हमारी आदतें हमारे मूल्य बन जाते हैं,
हमारे मूल्य हमारी नियति बन जाते हैं।
आपको इंसानियत से भरोसा नहीं खोना चाहिए। इंसानियत एक सागर की तरह है, अगर सागर की कुछ बूँदें गंदी हों, तो पूरा सागर गंदा नहीं हो जाता।
खुद को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है दूसरों की सेवा में खुद को खो देना।
हर सुबह का पहला काम यह संकल्प लेना होना चाहिए, मैं धरती पर किसी से नहीं डरूँगा। मैं सिर्फ ईश्वर से डरूँगा। मैं किसी के प्रति बुरी भावना नहीं रखूँगा। मैं किसी के अन्याय के आगे नहीं झुकूँगा। मैं सच्चाई से झूठ को जीतूँगा। और झूठ का विरोध करते हुए, मैं हर तरह का दुख सहूँगा।
भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि आप आज क्या करते हैं।
इंसान अपने विचारों का ही परिणाम होता है। वह जैसा सोचता है, वैसा ही बन जाता है।
किसी देश की महानता और उसकी नैतिक प्रगति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहाँ जानवरों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।
इंसान अक्सर वही बन जाता है जो वह खुद को मानता है। अगर मैं खुद से बार-बार कहता रहूँ कि मैं कोई काम नहीं कर सकता, तो हो सकता है कि आखिर में मैं सचमुच उसे करने के काबिल न रहूँ। इसके उलट, अगर मुझे यकीन हो कि मैं यह कर सकता हूँ, तो मैं निश्चित रूप से उसे करने की काबिलियत हासिल कर लूँगा, भले ही शुरुआत में मुझमें वह काबिलियत न हो।
प्रार्थना में झुके हजारों सिरों से बेहतर है किसी एक दिल को एक काम से खुशी देना।
हर रात जब मैं सोता हूँ, तो मैं मर जाता हूँ। और अगली सुबह, जब मैं जागता हूँ, तो मेरा पुनर्जन्म होता है।
धरती हर इंसान की जरूरतें पूरी करने के लिए काफी है, लेकिन हर इंसान का लालच पूरा करने के लिए नहीं।
मरे हुए लोगों, अनाथों और बेघरों को इससे क्या फर्क पड़ता है कि यह पागलपन भरी तबाही तानाशाही के नाम पर हुई है या आजादी या लोकतंत्र के पवित्र नाम पर?
किसी चीज पर यकीन करना और उसके अनुसार न जीना बेईमानी है।
दुनिया में ऐसे भूखे लोग भी हैं, जिनके सामने भगवान रोटी के रूप में ही आ सकते हैं।
अपनी समझदारी पर बहुत ज्यादा भरोसा करना नादानी है। यह याद रखना अच्छी बात है कि सबसे ताकतवर भी कमजोर पड़ सकता है और सबसे समझदार से भी गलती हो सकती है।
जिस दिन प्यार की ताकत, ताकत के प्यार पर हावी हो जाएगी, उस दिन दुनिया में शांति आएगी। -महात्मा गांधी
Live as if you were to die tomorrow; learn as if you were to live forever — Mahatma Gandhi’s inspiring, profound and thought-provoking words
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