
नई दिल्ली। 13 – 14 करोड़ लोगों के चुनाव आयोग ने गलत तरीके से काट दिए। केंद्रीय निर्वाचन आयोग की धांधलियों, गैरकानूनी काम करने और अनावश्यक रूप से जनता को परेशान करने वाली खबरें, शिकायतें आ रही हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली और उनकी मनमानी की जांच करने को एक समिति गठित की गई है। वकीलों के एक संगठन ने निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों का एक आयोग गठित किया है। लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन ने एक बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर Madan Bhimarao Lokur की अध्यक्षता वाला पांच सदस्यीय आयोग मतदाता सूची में बदलाव की इस प्रक्रिया की संवैधानिक और कानूनी वैधता, इसके तरीके और प्रभाव की जांच करेगा। बयान में कहा गया कि पूर्व न्यायाधीशों का स्वतंत्र आयोग पूरी स्वायत्तता के साथ काम करेगा और एसआईआर प्रक्रिया की संवैधानिक एवं कानूनी वैधता, इसके तरीके और पात्र मतदाताओं पर इसके प्रभाव की जांच करेगा।
न्यायमूर्ति लोकुर के अलावा, इस आयोग में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए.के. पटनायक, जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बदर दुर्रेज अहमद और पूर्व न्यायाधीश रेखा शर्मा तथा न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश शामिल होंगे। अपनी जांच के तहत, आयोग की योजना देश भर में जन-सुनवाई करने की है। संगठन ने बताया कि कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, चंद्र उदय सिंह, प्रशांत चंद्र सेन, राजू रामचंद्रन, रेबेका मामेन जॉन, वारिशा फरासत और वृंदा ग्रोवर जैसे वरिष्ठ वकील आयोग को रणनीतिक कानूनी सलाह देंगे।
Lawyers Association for Constitution has constituted a committee headed by former judge Madan B. Lokur to investigate election rigging and irregularities in the SIR
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