मुंबई। मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) भारत सरकार की एक पहल के तहत लोगों को पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मिशन लाइफ जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, जल संकट और प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए यह कार्यक्रम नागरिकों की रोजमर्रा की आदतों में बदलाव पर जोर देता है। यह कार्यक्रम पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान पुणे द्वारा भी जागरूकता के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे न केवल लोगों के खर्चों में बचत होगी बल्कि लोगों के स्वास्थ्य सहित पर्यावरण की हानि भी कम होगी।
जलवायु परिवर्तन मानव और संपूर्ण प्रकृति के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। बदलते मौसम, जल संकट और बढ़ती ऊर्जा खपत के बीच भारत सरकार ने मिशन लाइफ के रूप में ऐसी पहल शुरू की है, जो पर्यावरण संरक्षण को सरकारी नीति के साथ-साथ नागरिकों की रोजमर्रा की आदतों से जोड़ती है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान पुणे द्वारा चलाए जा रहे इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य लोगों को स्थायी जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक करना है। मिशन लाइफ के तहत सरकार ने 75 जलवायु-अनुकूल जीवनशैली व्यवहारों की पहचान की है, जिन्हें अपनाकर हर नागरिक जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में अपनी भूमिका निभा सकता है। मिशन लाइफ का पहला और महत्वपूर्ण स्तंभ ऊर्जा की बचत है।
मिशन लाइफ के अंतर्गत लोगों को एलईडी बल्ब और ट्यूब लाइट के उपयोग, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता, लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का प्रयोग, ट्रैफिक सिग्नल और रेलवे क्रॉसिंग पर वाहन का इंजन बंद रखने जैसे छोटे उपाय अपनाने को जागरूक किया जा रहा है जिससे ऊर्जा की खपत काफी हद तक कम हो जाती है। कार-पूलिंग, साइकिल का उपयोग, सौर ऊर्जा आधारित उपकरणों का इस्तेमाल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को उपयोग के बाद बंद रखना भी ऊर्जा संरक्षण की दिशा में प्रभावी उपाय बताए गए हैं। पानी की बचत मिशन लाइफ का दूसरा अहम आधार है। ऊर्जा संरक्षण के लिए छोटे-छोटे कदम उठाने पर मिशश लाइफ में जोर दिया गया है, जैसे, कम पानी वाली फसलों जैसे बाजरा की खेती को बढ़ावा देने, फसल विविधीकरण अपनाने और कुशल जल-बचत तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया गया है। घर, स्कूल और कार्यालयों में वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण, रिसते नलों की मरम्मत, बचे हुए पानी का पुनः उपयोग और जल-कुशल फिटिंग्स का प्रयोग, ये सभी कदम जल संकट से निपटने में सहायक हैं। पानी की खपत पर नजर रखने के लिए जल मीटर लगाने की भी वकालत की गई है।
बताया गया है कि मिशन लाइफ केवल संसाधनों की बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छता और जिम्मेदार उपभोग को भी बढ़ावा देता है। एकल-उपयोग प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, टिकाऊ खाद्य प्रणाली अपनाना, अपशिष्ट में कमी लाना और ई-कचरा प्रबंधन जैसे उपायों को जलवायु-अनुकूल जीवनशैली का हिस्सा माना गया है। यह पहल सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में भारत के प्रयासों को भी मजबूत करती है। आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए आईटीआईएम-एनविस एंड्रोइड मोबाइल एप और जलवायु परिवर्तन कार्यवाई प्रतिज्ञा जैसे माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे लोग जानकारी से जुड़ें और व्यवहारिक बदलावों को अपने दैनिक व्यवहार में अपनाएं। मिशन लाइफ का संदेश स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई किसी एक संस्था या सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव ईमानदारी से अपनाए जाएं, तो वही बदलाव आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण की नींव बन सकते हैं।