पीले और नीले रंग की मकोई बहुतों ने खाई होगी। बहुत लोगों ने देखी भी न होगी। बहुत लोग मकोई का नाम भी न जानते होंगे। मकोय, मकोई या मुकैया बड़े काम का फल है। फल ही नहीं मकोई के पत्ते भी दवा का काम करते हैं। आयुर्वेद के जानकार कहते हैं की मकोय का सेवन वात, पित्त व कफ दोष यानी त्रिदोष नाशक होता है। इसका नियमित उपयोग करने से बुखार, उल्टी, हिचकी, बवासीर, सूजन, फैटी लिवर, हृदय रोग, कब्ज, त्वचा के रोग, किडनी इन्फेक्शन, गैस, बदहजमी, पेट के रोग व पांचन तंत्र, जैसी अनेक स्वस्थ संबंधी समस्याओं को दूर करने में मकोय फायदेमंद होती है। इस के बीजों का तेल बालों के लिए लाभदायक होता है। इसका पूरा पौधा हो स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है इसलिए इसका किसी भी रूप में सेवन करना हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है।
मकोय एक औषधीय वनस्पति है। यह खाली भूमि में या जंगलों में बहुतायत में पाई जाती है। मकोय हर जगह खरपतवार के रूप में आसानी से पनपने वाला पौधा है। मकोय का पौधा एक फुट से लेकर दो ढाई फुट ऊंचाई तक हो सकता है। इसका पौधा लगभग मिर्ची के पौधे के समान तथा इसकी पत्तियां भी मिर्ची के पौधे की पत्तियों से कुछ बड़ी और उस जैसी ही होती है। मकोय को काकमाची और भटकोइंया भी कहते हैं। यह एक छोटा-सा पौधा है जो उत्तर भारत में बहुतायत में पाया जाता हैं। मकोय में शाखायुक्त एक-डेड़ फुट तक उँची, तथा शाखाओं पर उभरी हुई रेखाएं होती हैं।
मकोय के फूल सफेद रंग के होते हैं तथा इसके फल कच्ची अवस्था में हरे रंग के तथा पकने पर लाल, बैंगनी, पीले व काले अंगूर के रंग जैसे होते हैं। मकोय अलग अलग जगह के अनुसार विभिन्न नामों से जाना जाता है। मकोय औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके पत्ते, फल तथा मकोय के पंचांग का सेवन भी शरीर के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। इसके बीजों से तेल निकाला जा सकता है। इसकी जड़ का भी स्वास्थ्य की दृष्टि से अलग महत्व होता है। इसके फलों में अनेक प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं।
मकोय के फलों में फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस, पोटेशियम जैसे अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं। जो शरीर को हेल्दी रखने के साथ साथ अनेक बीमारियों से बचाने में भी सहायक होते हैं। मकोय में मौजूद इन्ही औषधीय गुणों के कारण ही इसे सेहत के लिए फायदेमंद (ठमदमपिजे व िउंावल) माना जाता है। मकोय का फल फाइबर से भरपूर होता है। इसलिए इसका सेवन कब्ज दूर करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है।
मकोय के पके हुए फलों में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसलिए इन फलों का सेवन करने से हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में यह सहायक होते है। पके हुए मकोय के फलों का कुछ दिन लगातार सेवन करने से फेफड़े मजबूत होते हैं तथा फेफड़ों में जमे हुए कफ से भी छुटकारा मिलता है। खांसी की समस्या से राहत दिलाने में भी मकोय के फलों का सेवन लाभदायक होता है।
मकोय के पके हुए फलों में विटामिन सी की भी प्रचुर मात्रा पाई जाती है। इसलिए इसके फलों का नियमित सेवन करने से शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। इंडियन मकोय, जिसे बॉटनी में सोलनम नाइग्रम और आमतौर पर ब्लैक नाइटशेड के नाम से जाना जाता है, एक असरदार आयुर्वेदिक दवा वाली जड़ी-बूटी है जो भारत में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। यह लिवर को सेहतमंद रखने, पाचन से जुड़ी दिक्कतों को मैनेज करने, स्किन की बीमारियों का इलाज करने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, एंटी-इंफ्लेमेटरी और हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण होते हैं। पारंपरिक रूप से लिवर की बीमारियों, बुखार, पेट की दिक्कतों (अपच, कब्ज), स्किन की बीमारियों और सूजन को मैनेज करने के लिए मकोय का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
अब मकोय की कई उन्नत किस्में भी प्रचलन में हैं जिनकी व्यावसायिक स्तर पर खेती की जाती है और फल बाजार में उपलब्ध हैं। लेकिन अगर आपको जरूरत पड़े तो यह सड़कों, खेतों, नदी, नालों के किनारे आमतौर पर अन्य घास की तरह मिल जाएगी।

