21 सितंबर 1932 को मिडलसेक्स, इंग्लैंड में शर्ली कॉनरन (डेम शर्ली इडा कॉनरन) का जन्म हुआ। शर्ली कॉनरन जानी मानी अंग्रेज लेखिका, डिजाइनर, पत्रकार और सोशल एंटरप्रेन्योर बनीं और टेरेंस कॉनरन से शादी के बाद अपनी कंपनी कॉनरन फैब्रिक्स में डिजाइनर और सेल्स डायरेक्टर के तौर पर काम किया। शर्ली कॉनरन प्रतिष्ठित अखबारों द ऑब्जर्वर और डेली मेल की विमेंस एडिटर बनीं और उन्होंने फीमेल सेक्शन शुरू किया। एक गंभीर बीमारी के कारण काम करना मुश्किल होने के बाद उन्होंने बेस्ट-सेलिंग किताबें लिखीं, जिनमें फेमिनिस्ट सेल्फ-हेल्प किताब सुपरवुमन (1975) और मशहूर नॉवेल लेस (1982) शामिल हैं।
बाद के जीवन में, कॉनरन ने महिलाओं के लिए गणित की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कैंपेन चलाए और चैरिटी संस्थाएं शुरू कीं। सामाजिक योगदान के लिए उन्हें ब्रिटिश राजशाही का डेम कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर का सम्मान दिया गया और उनकी मौत से एक हफ्ते पहले अस्पताल में ही उन्हें यह सम्मान सौंपा गया। शर्ली कॉनरन के पति टेरेंस कॉनरन चेल्सी में एक कैफे चलाते थे और 1955 में उनकी शादी हुई। उन्होंने उनके साथ फैब्रिक डिजाइनर के तौर पर काम किया और उनके दो बच्चे हुए जैस्पर और सेबेस्टियन। बाद में जैस्पर और सेबेस्टियन खुद भी डिजाइनर बने। शर्ली कॉनरन के पति बेवफा थे और उन्होंने सुधरने से इनकार कर दिया, इसलिए उन्होंने उन्हें तलाक दे दिया। शादी टूटने के बाद, कॉनरन ने अपने बच्चों की परवरिश के लिए लिखना शुरू किया। 2018 में मेल में लिखते हुए, कॉनरन ने कहा कि यह पहली बार था जब ब्रिटिश पत्रकारिता में महिलाओं को अपनी पसंद के विषयों पर लिखने की आजादी मिली थी, क्योंकि अखबारों में महिलाओं के लिए सिर्फ बुनाई, कपड़ों के पैटर्न, रेसिपी और कभी-कभार चैरिटी ऑर्गनाइजर के इंटरव्यू जैसे सेक्शन ही होते थे। शर्ली कॉनरन का मानना है कि फीमेल मैगजीन का पहला एडिशन फेमिनिस्ट आर्काइव्स (नारीवादी अभिलेखागार) में होना चाहिए।
शर्ली कॉनरन के कुछ प्रेरक, रोचक उद्धरण
मैं इस बात को छिपाती नहीं हूँ कि सोफे के नीचे झाड़ू लगाने के बजाय मैं सोफे पर लेटना ज्यादा पसंद करती हूँ।
मशरूम में स्टफिंग भरने के लिए जिंदगी बहुत छोटी है।
अठारह साल की उम्र में मुझे लगता था कि मुझे सब कुछ पता है, फिर तीस साल की उम्र में मुझे एहसास हुआ कि मुझे कुछ भी नहीं पता, और शायद कभी पता भी नहीं चलेगा। इस बात ने मुझे उदास कर दिया, जब तक कि मैंने यह नहीं देखा कि किसी और को भी कुछ नहीं पता था।
तुम चुड़ैलों में से मेरी माँ कौन है?
पता है, मासूमियत खोने का वर्जिनिटी (कुंवारेपन) से कोई खास लेना-देना नहीं है। मासूमियत तब खोती है जब आपको अकेले ही असल दुनिया का सामना करना पड़ता है, जब आपको पता चलता है कि जिंदगी का पहला नियम है या तो मारो या मरो। बचपन की कहानियों से कितना अलग है यह सब।
आप तब बड़े होते हैं जब आप दूसरों की परवाह करना छोड़ देते हैं कि वे आपके बारे में क्या सोचते हैं, और इसकी परवाह करने लगते हैं कि आप उनके बारे में क्या सोचते हैं।
समस्या यही थी। किसी तरह आपको यह एहसास हो गया था कि दूसरों पर निर्भर रहने वाली औरत ही औरत होती है और आजाद औरत नहीं कि अपनी जिम्मेदारी खुद उठाना औरत वाले गुण के खिलाफ है।
जूडी ने एक बार उससे कहा था, करियर और नौकरी में फर्क यह है कि नौकरी से आप कहीं नहीं पहुँचते। अगर आप करियर बनाना चाहते हैं, तो नौकरी किसी खास लक्ष्य की ओर एक कदम होनी चाहिए जब आप कोई नौकरी लें, तो आपको ठीक-ठीक पता होना चाहिए कि आप उसे कब छोड़ना चाहते हैं।
काश हमने यह सोच न अपनाई होती कि अगर आपके पास कोई मर्द नहीं है तो आप नाकाम हैं, क्योंकि तब आपकी कोई हैसियत या सुरक्षा नहीं होगी।
कभी-कभी अकेलापन आजादी की कीमत होती है, और आजादी कोई स्टार्स एंड स्ट्राइप्स या बॉय स्काउट वाला आइडिया नहीं है यह तो वह करना है जो आप सच में करना चाहते हैं, हर समय।
सुपरवुमन वह नहीं है जो सब कुछ कर सकती है, बल्कि वह है जो बहुत ज्यादा काम करने से बचती है।
आत्म-विश्वास सबसे जरूरी चीज है, और यह अपने लक्ष्यों को पहचानने, अपनी सीमाओं को जानने और जितनी हो सके उतनी मदद लेने से आता है।
रंगों के जरिए, पेंट के एक डिब्बे की कीमत में, लोग अपना स्टाइल और अपनी अलग पहचान जाहिर कर सकते हैं। लेकिन, स्टाइल की तरह ही, रंगों की समझ भी प्रयोग करके ही विकसित होती है। अगर आप हिम्मत नहीं करते, तो आपकी जिंदगी नीरस ही रह जाएगी।
सबसे जरूरी काम सबसे पहले, बाकी काम कभी नहीं।
घर के काम का कॉनरान का नियम यह उपलब्ध समय और उसके साथ आधे घंटे और में फैल जाता है।
बड़े होने के लिए आपकी उम्र कभी ज्यादा नहीं होती।
अगर आप आलसी बनना चाहते हैं, तो आपको कुशल होना होगा। -शर्ली कॉनरन


If you don’t dare, your life will remain dull. Inspiring and entertaining quote by Shirley Conran British author, designer, journalist, and social entrepreneur
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