
23 सितंबर 1941 को शिकागो, इलिनोइस में जॉर्ज जैक्सन (जॉर्ज लेस्टर जैक्सन, एक्टिविस्ट) का जन्म हुआ। जॉर्ज जैक्सन चर्चित अमेरिकी लेखक, कैदी, राजनैतिक कार्यकर्ता और क्रांतिकारी बने। 1960 में एक गैस स्टेशन से बंदूक की नोक पर 71 डालर चुराने के आरोप में अनिश्चितकालीन सजा काटते हुए, जैक्सन ब्लैक पावर मूवमेंट से जुड़ गए और जेल में एक अति-वामपंथी गैंग ब्लैक गुरिल्ला फैमिली बनाई। 1970 में जॉर्ज जैक्सन उन तीन कैदियों में से एक थे जिन्हें सोलेडाड ब्रदर्स कहा गया। उन पर सोलेडाड जेल में करेक्शन ऑफिसर जॉन वी. मिल्स की हत्या का आरोप लगाया गया था। कहा जाता है कि यह हत्या कुछ दिन पहले एक गोरे जेल गार्ड द्वारा तीन अश्वेत कैदियों की गोली मारकर हत्या किए जाने के बदले में की गई थी। 1970 में ही जैक्सन ने सोलेडाड ब्रदर नाम से अपनी चिट्ठियों का संग्रह प्रकाशित किया। यह किताब आत्मकथा और घोषणापत्र का मिश्रण थी और मुख्य रूप से अश्वेत अमेरिकी पाठकों के लिए लिखी गई थी, लेकिन दुनिया भर के रेडिकल्स ने इसे अपनाया। यह किताब बेस्टसेलर रही और जैक्सन को अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली। अगस्त 1971 में सैन क्वेंटिन स्टेट जेल से भागने की कोशिश के दौरान जेल गार्डों ने #GeorgeJackson की हत्या कर दी। जॉर्ज जैक्सन की हत्या का आरोप सरकार ने अन्य कैदियों पर मढ़ा, कैदियों के बीच का मामला बताया। जॉर्ज जैक्सन अश्वेत समुदाय के अधिकारों के लिए अथक संघर्ष किया। फ्रांसिस कार्नी बताते हैं कि कैसे सोलेडाड ब्रदर्स का मामला 1930 के दशक के स्कॉट्सबोरो बॉयज के मामले की तरह ही वामपंथियों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया। उनके सोलेडाड ब्रदर्स, खिलाफ सरकार का केस कमजोर और मनगढ़ंत लग रहा था। जैक्सन और एक अन्य साथी, फ्लीटा ड्रमगो जेल में क्रांतिकारी विचार फैला रहे थे और वहाँ हीरो बनते जा रहे थे। क्या सरकार ने जेलों में विद्रोह के डर से इन भाइयों को फँसाने, उन पर हत्या का कमजोर आरोप मढ़ने और उन्हें रास्ते से हटाने व दूसरे कैदियों को डराने के लिए उन्हें फाँसी देने की कोशिश की थी? हजारों लोगों का मानना था कि ऐसा ही हुआ था।
जॉर्ज जैक्सन की हत्या के अगले दिन छपे एक अखबार के ओपिनियन कॉलम में टॉम विकर ने जॉर्ज जैक्सन को एक प्रतिभाशाली लेखक, संवेदनशील व्यक्ति, भावी नेता और अपनी बात मनवाने में माहिर राजनीतिक विचारक माना। लेकिन विकर ने यह भी कहा कि मिसेज जैक्सन (जॉर्ज जैक्सन की मां जॉर्जिया) का यह आरोप कि उनके बेटे की हत्या एक साजिश के तहत की गई थी, अश्वेत बस्तियों में मौजूद उस सोच को दिखाता है, जहाँ सत्ता, जो ज्यादातर श्वेत लोगों के हाथ में है, पर लोगों को बिल्कुल भी भरोसा नहीं है, जैसा कि अफ्रीकी-अमेरिकी लेखक जेम्स बाल्डविन ने कहा था, कोई भी अश्वेत व्यक्ति कभी इस बात पर यकीन नहीं करेगा कि जॉर्ज जैक्सन की मौत वैसे ही हुई थी जैसा हमें बताया जाता है।
अपने झगड़े सुलझाओ, एक साथ आओ, हमारी हालत की सच्चाई समझो, समझो कि फासीवाद पहले ही आ चुका है, कि ऐसे लोग मर रहे हैं जिन्हें बचाया जा सकता था, कि अगर तुमने कुछ नहीं किया तो आने वाली पीढ़ियाँ गरीबी और बर्बरता में अधूरी जिंदगी जिएँगी। जो जरूरी है वो करो, क्रांति में अपनी इंसानियत और प्यार को पहचानो।
मैंने सब्र रखा है, लेकिन सब्र की भी एक हद होती है। हद से ज्यादा सब्र करना बुजदिली है।
यह बहुत अजीब बात है कि कोई आदमी कॉर्पोरेट कैपिटलिज्म में होने वाली हत्याओं के बारे में सिखाए, उनके पीछे के हत्यारों को अलग करके बेनकाब करे, बताए कि ये पागल लोग बेलगाम, मनमौजी और पूरी तरह से बिगड़े हुए हैं और फिर भी उन पागलों के हमले से खुद को बचाने की ठीक से तैयारी न करे। या तो उन्हें अपनी ही बातों पर यकीन नहीं है या फिर उनके मन में कहीं न कहीं मरने की इच्छा दबी हुई है।
मैं फिर कहता हूँ लोगों को संगठित करने और उन्हें क्रांति के प्रति जागरूक करने का आधार रोजमर्रा की असल जरूरतें होनी चाहिए कि दुनिया, ब्रह्मांड को चलते रहना चाहिए कि यह किसी आदमी के विशेषाधिकार के लिए रुकेगा, ठहरेगा या खत्म नहीं होगा।
सत्ता को चुनौती देने का एकमात्र असरदार तरीका वही है जो इतना व्यापक हो कि किसी को अलग-थलग न किया जा सके, और इतना जबरदस्त हो कि दमन का असर समाज के अधिकाधिक लोगों की आम जिंदगी पर पड़े। समझौता करके और वर्ग-संघर्ष का दिखावा करके हम हार जाते हैं।
जब कोई देश उस प्रक्रिया को ही नहीं मान सकता जिससे वह अपना दबदबा बनाता है, तो भ्रम के अलावा और क्या सच हो सकता है?
फासीवादियों के इस वियतनाम अभियान ने आम जनता और शासक वर्ग के बीच के पूरे रिश्ते को बहुत बदल दिया है। क्या आप उन बारीक बदलावों को देख पा रहे हैं? साम्राज्यवाद का असली बदसूरत चेहरा न सिर्फ उन लोगों के सामने आ रहा है जो विदेशों में इसके असर को झेल रहे हैं, बल्कि यहाँ अमेरिका में सोए हुए आम आदमी के सामने भी आ रहा है। वे अब विदेशी युद्धों और विदेशी कारोबारों के बीच संबंध समझने लगे हैं।
आप आम तौर पर यह बता सकते हैं कि किसी आदमी का दिमाग किन प्रक्रियाओं से गुजरा है, यह देखकर कि उसने क्या पढ़ा है और क्या देखा है।
हम वैसे भी लोगों का फायदा नहीं उठाना चाहते। कैपिटलिज्म दुश्मन है। इसे खत्म करना ही होगा। इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है।
जीतने के लिए हमें लड़ना होगा। टालमटोल करने की सोच खत्म हो चुकी है। लोगों को कभी भी इतना दबाया नहीं जा सकता कि वे किसी तरह पलटवार न कर सकें। हम डरपोकों को हटा देंगे और लड़ेंगे। या बस उन्हें नजरअंदाज कर देंगे।
ताकत का मतलब है खुद पर और अपने पूरे माहौल पर काबू रखना लेकिन सबसे पहले खुद पर।
मेरी जिंदगी का कोई मतलब नहीं है अगर उन चीजों पर मेरा सकारात्मक नियंत्रण न हो जो इसकी गुणवत्ता तय करती हैं।
नियो-स्लेवरी (नई तरह की गुलामी) एक आर्थिक स्थिति है, जिसमें कुछ लोग अपनी स्थापित आर्थिक व्यवस्था के तहत संपत्ति के अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं, और गुलाम की जीवनशैली को ऐसे व्यवस्थित और नियंत्रित करते हैं जैसे कि वह सचमुच कोई संपत्ति हो। संक्षेप में, एक ऐसी आर्थिक स्थिति जो आत्म-निर्णय की पूरी तरह से कमी या अभाव के रूप में सामने आती है।
इस समय एक समुदाय के तौर पर हमारे पास कुछ नहीं है, बिल्कुल कुछ नहीं, सिवाय एक-दूसरे के, थोड़ी ताजी हवा, दिन के नीले और सुनहरे रंग और रात की चांदी जैसी रोशनी, एक साफ जमीर, और आने वाले साफ-सुथरे दिनों के वादे के। लेकिन…
कभी-कभी मुस्कुरा भी सकता हूँ, लेकिन जब तक यह सब खत्म होगा, शायद मैं एक अच्छा इंसान न रहूँ। और मैंने अभी-अभी इस 21 घंटे के दिन में अपनी 77वीं सिगरेट जलाई है। मैं दो-तीन घंटे लेटने जा रहा हूँ, शायद सो जाऊँ, समय का सही इस्तेमाल करो।
समर्थक मानते हैं कि इन जगहों पर पूरी तरह से दहशत का राज है, लेकिन वे अधिकारियों की ज्यादतियों को इस तर्क से सही ठहराते हैं कि हम किसी भी सभ्य आचरण के नियमों से बाहर हैं। चूँकि हम इंसान नहीं बल्कि कैदी हैं, इसलिए दिल में गोली मारना, मुक्का-मुक्की या लाइन पार करने पर तुरंत सजा-ए-मौत देना बिल्कुल भी अतिवादी या गलत नहीं माना जाता। एक अधिकारी को हिंसक तरीकों का पूरा इस्तेमाल करने की छूट होती है क्योंकि कैदी को किसी और तरीके से नहीं संभाला जा सकता।
अगर आप अपनी जरूरत से ज्यादा पैसे नहीं कमाते हैं, तो आप एक नियो-स्लेव (नई तरह के गुलाम) हैं। अगर आप कैलिफोर्निया से न्यूयॉर्क जाने का खर्च नहीं उठा सकते, तो आप इस श्रेणी में आते हैं। अगर मन करने पर भी आप जांजीबार, हवाना, बीजिंग या पेरिस नहीं जा सकते, तो आप गुलाम हैं। अगर अपनी आर्थिक स्थिति के कारण आप धरती पर एक ही जगह पर बंधे हुए हैं, तो यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी मालिक की संपत्ति होने के कारण एक ही जगह पर बंधे रहना।
यह गतिरोध मैंने पैदा नहीं किया। जैसा कि आप सोचते हैं, हालात के इस विनाशकारी मोड़ तक पहुँचने में मेरी कोई भूमिका नहीं थी। क्या मैंने खुद को गुलाम बनाया, खुद का अपहरण किया, खुद के खिलाफ जंग छेड़ी, अपनी ही संस्थाओं को बर्बाद किया, खुद को गुलाम बनाया, अपना इस्तेमाल किया और खुद को नजरअंदाज किया, अपनी पहचान चुराई और फिर, जब कुछ नहीं बचा, तो एक ऐसी प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाई, जबकि मुझे पता था कि मैं मुकाबला नहीं कर सकता?
मुझे सिर्फ एक बार ही मौत की सजा दी जा सकती है।
प्लांटेशन की जगह स्वेट-शॉप (खराब हालात वाली फैक्ट्री) ने ले ली।
मैं उनसे सिर्फ अश्वेत विचारधारा के एक नेता के तौर पर असहमत था। अहिंसा का विचार एक झूठा आदर्श है। यह मानकर चलता है कि विरोधी में दया और न्याय की भावना होगी। जब विरोधी के पास न्याय और दया दिखाने से खोने के लिए सब कुछ हो और पाने के लिए कुछ भी नहीं, तो उसकी प्रतिक्रिया नकारात्मक ही हो सकती है।
शायद अगर मैं भूल पाता, तो मुझे कुछ मानसिक शांति मिलती। लेकिन मैं कुछ भी नहीं भूलता घाव मेरे शरीर पर जितने गहरे निशान छोड़ते हैं, उससे कहीं ज्यादा गहरे निशान मेरे मन पर छोड़ते हैं।
अभी हम एक चरम दौर में हैं। बाहर जबरदस्त ऊर्जा है, जो सरकार के विरुद्ध है। यह पूरी तरह केंद्रित नहीं है, लेकिन यह मौजूद है और बढ़ रही है। हो सकता है कि यह उस काम को पूरा करने के लिए काफी हो जो हमें कम समय में करना है। हम देखेंगे, और निश्चित रूप से उम्मीद कर सकते हैं कि ऐसा ही हो। लेकिन शायद ऐसा न हो। हमें एक लंबी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहना होगा। अगर ऐसा होता है, तो शायद हम एक अलग दौर देखेंगे, जिसमें लोगों की क्रांतिकारी ऊर्जा बिखरती हुई या कमजोर पड़ती हुई दिखेगी। लेकिन और यह महत्वपूर्ण है ऐसे दौर धोखेबाज होते हैं। चीजें निचले स्तर पर लगती हैं, लेकिन असल में यह फिर से संगठित होने का समय होता है, एक ऐसा समय जब हम पीछे हटते हैं और पिछले दौर में की गई गलतियों से सीखते हैं।
पश्चिमी संस्कृति बहुत ही कठोर माहौल में विकसित हुई। चट्टानें, बर्फ, लंबी अवधि जब जमीन इतनी सख्त होती थी कि उस पर काम नहीं किया जा सकता था, जब मिट्टी से कुछ भी पैदा नहीं किया जा सकता था, शिकार करना बहुत महत्वपूर्ण हो गया, सर्दियों में गुजारा करने के लिए चीजें जमा करना, इकट्ठा करना, छिपाना, सुरक्षा करनाय सर्दियों में चीजों का खराब होना, पड़ोसी के सामान पर लालची नजरें डालना। क्या उस तरह के जीवन-संघर्ष के तीन-चार हजार साल किसी संस्कृति पर असर डालेंगे? क्या लालच बड़े पैमाने पर इसके अंतिम परिणाम में शामिल हो जाएगा? शिकार करना, भोजन खोजना, जमा करना, इकट्ठा करना, छिपाना, रक्षा करना यही सब दांव पर होता था!! यह संवेदनशीलता और कोमलता के लिए बहुत अनुकूल नहीं है।
हर मामले में उन्हें जेल से शारीरिक और मानसिक रूप से ज्यादा नुकसान पहुँचाकर बाहर भेजा जाता है, जितना वे अंदर आते समय थे। क्योंकि यही सच्चाई है। क्या आप कैदी की जाँच-पड़ताल जारी रखते हैं? प्रशासनिक जिम्मेदारी कहाँ से शुरू होती है? शायद जेल प्रशासन को कैदियों की हर हरकत के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन जब हालात नस्ल के आधार पर बिगड़ने लगें, जब इस बिखराव की वजह साफ तौर पर ऐसे हालात हों जो गार्ड और प्रशासन के भी बस में न हों, तो फासीवादी व्यवस्था के उसूलों से हटकर किसी और चीज की जाँच करना बेकार है।
चेतना, उदासीनता, आँखें मूँद लेने या खालीपन के ठीक उलट है। चेतना को बढ़ावा देने का मतलब है इस सोच को फैलाना कि हम सब एक व्यापक क्रिया और प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं, कि ध्रुव कहीं न कहीं जुड़े हुए हैं कि सदमे, चक्कर आने और शरीर को धीरे-धीरे कमजोर करने वाली बीमारियों के भौतिक कारण होते हैं। जुड़ाव, कारण और प्रभाव, उनके आपसी रिश्तों की स्पष्टता, अतीत से जुड़ाव, निरंतरता, बहाव, गति और यह एहसास कि कोई भी चीज लंबे समय तक वैसी ही नहीं रहती। और नतीजा यह है कि अगर कोई चीज बन नहीं रही है, तो वह निश्चित रूप से खत्म हो रही है कि जीवन ही क्रांति है और अगर हम दुनिया की जरूरतों को समझकर उसके अनुसार काम नहीं करेंगे, तो दुनिया खत्म हो जाएगी। यह अपने आप खत्म नहीं होगी, बल्कि प्रतिक्रियावादी ताकतों ने ऐसे असंतुलन पैदा कर दिए हैं जो इसे खत्म कर देंगे, इसके अपने ही विनाश के बीज। हमारा विनाश भी बम का दौर, नर्व गैस, औद्योगिक कचरे का भारी जमावड़ा।
चेतना का मतलब है ज्ञान, पहचान, दूरदर्शिता साझा अनुभव और समझय संवेदनशीलता, सतर्कता, जागरूकता। यह इंद्रियों और खून में हलचल पैदा करती है, यह चीजों को उजागर करती है और संकेत देती है यह चीजों को ठोस रूप देती है, गुस्सा दिलाती है और दिशा देती है। इतनी जटिल चीज के लिए कोई तयशुदा सकारात्मक फॉर्मूला नहीं है। हमारे पास इसके विकास में मदद करने के लिए बस कुछ दिशा-निर्देश हैं। इसका मतलब है कि किताबें पढ़ने के बाद उन्हें एक तरफ रख देना चाहिए और सही तरीका खोजने के लिए अवलोकन, सही विश्लेषण, रचनात्मकता और सही समय को पहचानने की जरूरत होगी। -जॉर्ज जैक्सन
Capitalism is the enemy; it must be destroyed. Thought-provoking quote by George Jackson, the noted American author, prisoner, political activist, and revolutionary
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