
8 अक्टूबर 1992 को जर्मनी के अंकेल में जर्मन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी नेता, स्टेट्समैन, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी से पश्चिमी जर्मनी के चांसलर बनने वाले पहले व्यक्ति, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता विली ब्रांट (हर्बर्ट अर्न्स्ट कार्ल फ्राहम, जन्म 18 दिसंबर 1913 ल्यूबेक का मुक्त शहर, जर्मन साम्राज्य) का निधन हुआ। विली ब्रांट को पश्चिमी यूरोप में सहयोग बढ़ाने और पश्चिमी जर्मनी व पूर्वी यूरोप के देशों के बीच सुलह कराने के प्रयासों के लिए 1971 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला। विली ब्रांट को नाजी शासन के दौरान नॉर्वे और फिर स्वीडन पलायन करना पड़ा था। वामपंथी पत्रकार के तौर पर काम करने के दौरान नाजी एजेंटों की नजर से बचने के लिए उन्होंने विली ब्रांट नाम अपनाया और बाद में 1948 में आधिकारिक तौर पर यही नाम रख लिया। ब्रांट को शुरुआती पहचान पश्चिमी बर्लिन के मेयर के तौर पर मिली। उन्होंने कर्ट जॉर्ज कीसिंगर की कैबिनेट में विदेश मंत्री और वाइस चांसलर के तौर पर काम किया और 1969 में चांसलर बने। चांसलर के तौर पर, उन्होंने अमेरिका के साथ पश्चिमी जर्मनी के करीबी संबंध बनाए रखे और पश्चिमी यूरोप में यूरोपीय एकीकरण को मजबूत करने पर जोर दिया। विली ब्रांट ने ओस्टपोलिटिक नाम की नई नीति शुरू की, जिसका मकसद पूर्वी यूरोप के साथ संबंध सुधारना था। #WillyBrandt अपनी ओस्टपोलिटिक नीति के कारण दक्षिणपंथियों के बीच और अमेरिकी नीतियों (जैसे वियतनाम युद्ध पर उनकी चुप्पी, जिसे उन्होंने 1973 में तोड़ा) और दक्षिणपंथी तानाशाही सरकारों के समर्थन के कारण वामपंथियों के बीच विवाद का विषय बने रहे। ब्रांट रिपोर्ट दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति में अमीर उत्तर और गरीब दक्षिण के बीच के अंतर को बताने का एक मान्यता प्राप्त पैमाना बन गई। विली ब्रांट घरेलू स्तर पर अपनी सख्त कम्युनिस्ट-विरोधी नीतियों के लिए भी जाने जाते हैं। कम्युनिस्ट विरोधी विली ब्रांट की नीति 1972 में राडिकलेनरलास (कट्टरपंथ-विरोधी आदेश) के रूप में सामने आईं। 1970 में जब वे जर्मनों द्वारा कुचले गए वारसॉ घेटो विद्रोह के स्मारक पर गए, तो ब्रांट अचानक घुटनों के बल बैठ गए और चुपचाप ध्यान करने लगे। इस पल को नीफॉल वॉन वार्सॉ (वारसॉ में घुटने टेकना) के तौर पर याद किया जाता है। 1974 में जब उनके सबसे करीबी सहयोगियों में से एक गुंटर गुइलाम के पूर्वी जर्मनी की खुफिया एजेंसी स्टासी का एजेंट होने का पता चला, तो ब्रांट ने चांसलर पद से इस्तीफा दे दिया। 1992 में 78 साल की उम्र में कोलन कैंसर से ब्रांट की मौत हुई।
यहां पेश हैं विली ब्रांट के कुछ कथन
लोगों के दिमाग में बनी दीवारें कभी-कभी कंक्रीट ब्लॉक से बनी दीवारों से ज्यादा मजबूत होती हैं।
अगर मैं आपको कुछ बेच रहा हूँ, तो मैं आपकी भाषा बोलता हूँ। अगर मैं कुछ खरीद रहा हूँ, तो आपको जर्मन बोलनी होगी।
शांति ही सब कुछ नहीं है, लेकिन शांति के बिना सब कुछ बेकार है।
नैतिक रूप से इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई व्यक्ति युद्ध में मारा गया है या दूसरों की बेरुखी के कारण भूख से मरने के लिए छोड़ दिया गया है।
जब तक भूख है, शांति कायम नहीं हो सकती।
शांति का मतलब सिर्फ युद्ध का न होना नहीं है, हालाँकि आज कुछ देश इतने से ही खुश हो जाएँगे। एक टिकाऊ और न्यायपूर्ण शांति व्यवस्था के लिए सभी देशों को विकास के समान अवसर मिलने चाहिए।
अब हम ऐसी स्थिति में हैं जहाँ जो चीजें एक साथ जुड़ी हुई थीं, वे फिर से एक साथ जुड़ जाएँगी।
आजादी की तरह शांति भी कोई ऐसी चीज नहीं है जो शुरू से ही मौजूद रही हो, हमें इसे बनाना होगा, शब्द के सही अर्थों में।
जो लोग अतीत से चिपके रहते हैं, वे भविष्य का सामना नहीं कर पाएँगे।
हमें भगवान ने नहीं, बल्कि वोटरों ने चुना है।
हिटलर जर्मनी नहीं है!
जर्मनों द्वारा और जर्मनी के नाम पर दूसरे लोगों के विरुद्ध किए गए अपराधों को बिना शर्त स्वीकार करना ही जर्मन लोगों के उबरने की पहली शर्त है। -विली ब्रांट
As long as hunger exists, peace cannot prevail – Statement by Willy Brandt, an anti-communist German Social Democratic Party politician and Nobel Peace Prize laureate

