14 अगस्त 1867 को किंग्स्टन अपॉन टेम्स, यूनाइटेड किंगडम में जॉन गैल्सवर्दी का जन्म हुआ। जॉन गैल्सवर्दी प्रसिद्ध अंग्रेजी उपन्यासकार और नाटककार बने। मुख्य रूप से उपन्यासों की अपनी उस तिकड़ी के लिए जॉन गैल्सवर्दी जाने गए जिसे सामूहिक रूप से द फोर्साइट सागा (1906, 1920, 1921) कहा जाता है, बाद की दो तिकड़ियों, अ मॉडर्न कॉमेडी और एंड ऑफ द चैप्टर के लिए भी उन्हें बहुत सराहना मिली। उन्हें 1932 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। गैल्सवर्दी ने 20 उपन्यासय 28 पूरे नाटक, लघु कथाओं के पाँच संग्रह कविता के तीन खंड निबंधों और रेखाचित्रों के ग्यारह खंड लिखे। इसके अलावा अनेक कहानियाँ, पैम्फलेट, अखबार के लेख और अप्रकाशित निबंध व रेखाचित्र काफी संख्या में लिखे। वे हाथ से लिखते और उसमें काफी सुधार करते थे, उन्होंने टाइपराइटर का इस्तेमाल नहीं किया। #JohnGalsworthy की पत्नी अदा गैल्सवर्दी (उनकी एकमात्र सचिव) जॉन गैल्सवर्दी की पांडुलिपियों को टाइप करती थीं। जॉन गैल्सवर्दी को ऑर्डर ऑफ मेरिट, नोबेल पुरस्कार के अलावा, गैल्सवर्दी को कैम्ब्रिज, डबलिन, मैनचेस्टर, ऑक्सफोर्ड, प्रिंसटन, शेफील्ड और सेंट एंड्र्यूज विश्वविद्यालयों से मानद डिग्रियाँ मिलीं, वे ऑक्सफोर्ड के न्यू कॉलेज के मानद फेलो भी चुने गए। उनके जीवनी लेखक डेविड होलोवे का कहना है कि 1930 की एक लघु कथा में एक पात्र का वर्णन करते हुए गैल्सवर्दी असल में अपने स्कूली जीवन के स्वरूप का ही वर्णन कर रहे थे, मुझे यकीन है कि स्कूल में किसी ने भी उनमें भविष्य की महानता के संकेत नहीं देखे थे, मुझे लगता है कि अगर आप उनके समकालीनों में से किसी से उनके बारे में राय पूछते, तो वे कहते, बहुत अच्छा लड़का, बिना ज्यादा महत्वाकांक्षा वाला, स्कूल में सबसे अच्छे कपड़े पहनने वाला लड़का, जिसमें सामान्य से अधिक एथलेटिक और कलात्मक प्रतिभा थी, लेकिन कभी भी दुनिया में कोई बड़ी हलचल मचाने की संभावना नहीं थी।
जिंदगी धुन बजाती है, हम नाचते हैं।
प्यार कोई ग्रीनहाउस का फूल नहीं है, बल्कि एक जंगली पौधा है, जो एक भीगी रात में पैदा होता है, धूप के एक घंटे में पनपता हैय जंगली बीज से उगता है, जंगली हवा के साथ सड़क पर उड़ता हुआ आता है। एक ऐसा जंगली पौधा जो, जब हमारे बगीचों की बाड़ के भीतर संयोग से खिलता है, तो हम उसे फूल कहते हैं, और जब वह बाहर खिलता है तो हम उसे खरपतवार कहते हैं। चाहे फूल हो या खरपतवार, उसकी खुशबू और रंग हमेशा जंगली ही होते हैं।
जिंदगी का सबसे बड़ा दुख यह है कि जो काम आपने कर दिया है, उसे बदला नहीं जा सकता।
इंसान की आँखें बताती हैं कि वह असल में क्या है, और उसका मुँह बताता है कि वह क्या बन जाता है।
जब ये शांत दोस्त हमसे दूर जाते हैं, तो सबसे मुश्किल बात यह होती है कि वे हमारे जीवन के कई साल भी अपने साथ ले जाते हैं।
समस्या से दूरी जितनी ज्यादा होती है, आदर्शवाद भी उतना ही बढ़ता जाता है।
प्यार की कोई उम्र नहीं होती, कोई सीमा नहीं होती, और न ही इसकी कोई मौत होती है।
हो सकता है कि वह बस चाहत ही करता रह जाए और उसे कभी न पाए दुनिया की खूबसूरती और प्यार!
इंसानों के सभी कामों की शुरुआत और अंत अव्यवस्थित ही होते हैं।
सपने देखना जिंदगी की कविता है, और अगर हम थोड़ा-बहुत इसमें खो जाते हैं तो हमें माफ कर दिया जाना चाहिए।
प्यार! बेहिसाब, मौत से भी परे यह लगभग जान ही ले लेता है। लेकिन कोई भी इसके बिना नहीं रहना चाहेगा।
कुछ भी करने से पहले यह सोचना हमेशा फायदेमंद होता है कि क्या इससे किसी दूसरे व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा तकलीफ पहुँचेगी। –जॉन गैल्सवर्दी
जब किसी फोरसाइट की सगाई होती, शादी होती या कोई बच्चा पैदा होता, तो सभी फोरसाइट वहाँ मौजूद होते, जब किसी फोरसाइट की मौत होती लेकिन अभी तक किसी फोरसाइट की मौत नहीं हुई थीय वे मरते नहीं थे, मौत उनके सिद्धांतों के खिलाफ थी, इसलिए वे उससे बचने के लिए सावधानियाँ बरतते थे ऐसी स्वाभाविक सावधानियाँ जो बहुत ज्यादा ऊर्जावान लोग अपनी संपत्ति में दखलंदाजी को नापसंद करते हुए बरतते हैं।
जवानी से जवानी का मिलन, जैसे एक-दूसरे का पीछा करते हुए ड्रैगन-फ्लाइज (व्याध-पतंग), और प्यार सूरज की तरह उन्हें अंदर तक गर्माहट देता हुआ।
असल में, इंसान अपने ही बनाए आविष्कारों को नियंत्रित करने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं, ज्यादा से ज्यादा वे उन नए हालात के हिसाब से ढलना सीख जाते हैं जो उन आविष्कारों से पैदा होते हैं।
हम अपनी किसी निजी दुनिया में नहीं रह रहे हैं। हम जो कुछ भी कहते, करते और सोचते हैं, उसका असर हमारे आस-पास की हर चीज पर पड़ता है।
बेफिक्री सोम्स को हमेशा शक में डाल देती थी आमतौर पर इसके पीछे कोई न कोई वजह होती थी। वह एक पल के लिए खड़ी होकर तारों को देखती रही, इतने सारे, इतने दूर, चमकीले और ठंडे। और हल्की सी मुस्कान के साथ उसने सोचा, पता नहीं मेरा लकी स्टार कौन सा है!
एक ऐसा दौर जिसने व्यक्तिगत आजादी को बहुत अहमियत दी थी, अगर किसी के पास पैसा हो तो वह कानून और असलियत, दोनों में आजाद थाय और अगर पैसा न हो तो वह सिर्फ कानून की नजर में आजाद था, असलियत में नहीं। एक ऐसा जमाना जिसने दिखावे और पाखंड को बढ़ावा दिया, जहाँ इज्जतदार दिखना ही इज्जतदार होने के बराबर था।
और फिर भी, किताबों में सुकून और मनोरंजन मिलता थाय और उनकी जरूरत भी थी।
इच्छाएँ तो मन में उठती हैं, लेकिन उनसे कोई सबूत नहीं मिलता।
वह आदत, रात के दो से चार बजे के बीच जागते रहने की, जब मन में उठने वाला हल्का सा शक आसानी से घबराहट का रूप ले लेता है।
न्याय एक ऐसी मशीन है जिसे एक बार शुरू कर दिया जाए, तो वह अपने आप चलती रहती है।
यादें मुर्दा जैसे कामों पर सूखी पत्तियों का ढेर लगा देती हैं, जिनके नीचे दबे होने पर वे बस धुंधली सी बेचैनी पैदा करते हैं।
आम तौर पर माना जाता है कि राजनीति सभ्यता की दिशा तय करती है और राजनेता उसके रक्षक होते हैं। मुझे लगता है कि सभ्यता के विकास पर उनका बहुत कम या कोई असर नहीं होता। वे उसी का हिस्सा होते हैं और उसी के साथ आगे बढ़ते हैं। उनका सरोकार देश के मन या आत्मा से ज््यादा उसके भौतिक स्वरूप से होता है। यह समझने के लिए इंजीनियर होने की जरूरत नहीं है कि किसी आदमी को दीवार पर ऊपर खींचने के लिए आपको उससे ऊँचा होना होगा, या लोगों की पसंद को बेहतर बनाने के लिए आपकी अपनी पसंद उनसे बेहतर होनी चाहिए।
सचमुच, विनिफ्रेड ने अचानक कहा, यह लगभग किस्मत जैसा लगता है। बस, यह बात बहुत पुरानी हो चुकी है। -जॉन गैल्सवर्दी
Thought-provoking quote by the Nobel Prize-winning English novelist, playwright, and poet John Galsworthy