10 अक्टूबर 1906 को मद्रास (चेन्नई) में आर. के. नारायण (रासीपुरम कृष्णस्वामी नारायणस्वामी) का जन्म हुआ। आर. के. नारायण लोकप्रिय भारतीय अंग्रेजी लेखक और उपन्यासकार बने और दक्षिण भारत के काल्पनिक शहर मालगुडी पर आधारित अपनी रचनाओं के लिए जाने गए। आर. के. नारायण मुल्क राज आनंद और राजा राव के साथ अंग्रेजी में प्रारंभिक भारतीय साहित्य के एक प्रमुख लेखक बने। #RKNarayan को साहित्य अकादमी और पद्मभूषण सम्मान मिला और नोबल पुरस्कार के लिए मनोनयन मिला। वे राज्य सभा के सदस्य मनोनीत किए गए।
आर. के. नारायण के कुछ चुनिंदा उद्धरण
आप लिखकर लेखक बनते हैं। यह एक योग है।
एक साधारण व्यक्ति और एक बुद्धिमान व्यक्ति के बीच का अंतर, उस व्यक्ति के अनुसार जो यह मानता है कि वह दूसरी श्रेणी का है, यह है कि एक साधारण व्यक्ति जो कुछ भी देखता और सुनता है उसे पूरे दिल से स्वीकार करता है, जबकि एक साधारण व्यक्ति गहन जाँच के बाद ही कुछ स्वीकार करता है। वह अपनी बुद्धि को एक सघन जाल की छलनी मानता है जिसमें से केवल उत्तम से उत्तम ही गुजर सकता है।
दोस्ती भी प्रेम की तरह एक और भ्रम थी, हालाँकि यह उतनी चरम सीमा तक नहीं पहुँची। लोग दिखावा करते थे कि वे दोस्त हैं, जबकि सच्चाई यह थी कि वे परिस्थितियों के बल पर एक-दूसरे से जुड़े थे।
हम हमेशा उस व्यक्ति की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हैं जो हमें अप्रिय तथ्य बताता है।
आलोचना को कोई भी इतनी खुशी से स्वीकार नहीं करता। न तो आलोचना करने वाला और न ही उसे आमंत्रित करने वाला, वास्तव में उसे महत्व देता है।
यह मेरा बच्चा है। मैंने इसे बोया है। मैंने इसे बढ़ते देखा है। मुझे यह बहुत पसंद आया। इसे मत काटो।
कुछ बातें अगर शब्दों में कहें तो बुरी लगती हैं, लेकिन मन में हानिरहित रहती हैं।
मुझे लगता है कि आमतौर पर हमारे पास अपनी बुद्धि का सही माप नहीं होता।
बुद्धि और विवेक से युक्त दो जीव जीवन भर के लिए एक साथ कैसे बंधे रह सकते हैं?
अगर कोई पूछे, विपक्ष कैसे काम करे? सबसे अच्छा जवाब होगा, एक पारंपरिक सास की तरह जो अपनी बहू के घरेलू कामों पर नजर रखती है और उसकी बातों में आकर उसकी बातों का पीछा करती है।
क्या आपको एहसास है कि कितने कम लोग कभी समझ पाते हैं कि वे अपनी परिस्थितियों में कितने भाग्यशाली हैं?
आप नाली में पत्थर फेंकेंगे तो वह आपके चेहरे पर गंदगी ही उगलेगा।
मृत्यु और उसके साथी, शुरुआती सदमे के बाद, उदासीनता पैदा करते हैं।
ऐसे समाज में रहना उत्साहजनक है जो मानकीकृत या मशीनीकृत नहीं है, और एकरसता से मुक्त है।
हम एक साथ आते हैं, बस फिर से अलग होने के लिए। जीवन के नियम को टाला नहीं जा सकता। यह नियम उसी क्षण लागू हो जाता है जब हम अपनी माँ के गर्भ से खुद को अलग करते हैं। जीवन में सभी संघर्ष और दुख इस नियम को रोकने या इससे दूर होने या खुद को इससे आहत होने देने के हमारे प्रयास के कारण हैं। इस तथ्य को स्वीकार करना होगा। एक गहरा, अखंडित अकेलापन ही जीवन का एकमात्र सत्य है। बाकी सब झूठ है। जीवन का नियम। इसके खिलाफ लड़ने का कोई मतलब नहीं है।
सारी झनझनाहट, खड़खड़ाहट और चलती ट्रेन की खनक, फुहार और फुफकार दूर जाकर आधी सिसकी और आधी आह में घुल गई।
प्यार में घूरना आधी जीत है।
मैं कई बार अंदर आया और बोला, लेकिन शायद जब मुझे लगा कि तुम जाग रहे हो, तब तुम सो रहे थे।
तुमने इसे इस तरह समझाकर बहुत विचारशीलता दिखाई है, सुग्रीव ने कहा, लेकिन मैं नशे में था।
लेकिन यह लाश छिपाने जैसा था। मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि इस दुनिया में कुछ भी छिपा या दबाया नहीं जा सकता। ऐसी सारी कोशिशें सूरज को छुपाने के लिए छाता थामे रहने जैसी हैं।
यात्री उत्साही होते हैं। जब तक उनके पास देखने के लिए कुछ है, उन्हें किसी भी असुविधा से कोई फर्क नहीं पड़ता।
ऐसे प्राणी का हम क्या कर सकते हैं जो इतने मुक्त मन से अपने विनाश की ओर लौटता है?
अतीत चला गया, वर्तमान जा रहा है, और आने वाला कल, कल के बाद का कल है। तो किसी भी चीज की चिंता क्यों? ईश्वर इन सब में है।
यहाँ तक कि जब आपको एहसास हो कि आपके सामने वाला आपका दुश्मन है और उसके साथ सख्ती से पेश आना चाहिए, तब भी शब्दों से चोट न पहुँचाएँ।
प्रत्येक प्राणी हिंसा की क्षमता लेकर पैदा होता है। -आर. के. नारायण
Every living being is born with the capacity for violence—a thought-provoking quote by R.K. Narayan, the renowned Indian-English writer and novelist
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