18 सितंबर 1905 को एशटेड, यूनाइटेड किंगडम में स्कॉटिश लेखक, कवि और कांग्रेगेशनल पादरी जॉर्ज मैकडोनाल्ड (जन्म 10 दिसंबर 1824) का निधन हुआ। जॉर्ज मैकडोनाल्ड आधुनिक फैंटेसी साहित्य के क्षेत्र में अग्रणी व्यक्ति और साथी लेखक लुईस कैरोल के गुरु बने। अपनी परियों की कहानियों के अलावा, #GeorgeMacDonald ने ईसाई धर्मशास्त्र पर कई रचनाएँ लिखीं, जिनमें उपदेशों के कई संग्रह शामिल हैं।
यहां प्रस्तुत हैं जॉर्ज मैकडोनाल्ड के कुछ प्रेरक और विचारणीय उद्धरण
प्यार किए जाने से कहीं बड़ी तारीफ है किसी का आप पर भरोसा करना।
जरूरी नहीं कि इंसान हमेशा काम ही करता रहे। एक पवित्र खालीपन भी होता है, जिसे आजकल बहुत नजरअंदाज किया जाता है।
जिस पर हम पूरी तरह भरोसा करते हैं, उसकी मौजूदगी से ज्यादा खुशी शायद ही किसी चीज में हो।
उसका दिल, हर दिल की तरह, अगर उसकी कमियों को हटा दिया जाए, प्यार का एक कभी न खत्म होने वाला स्रोत था, वह हर उस चीज से प्यार करती थी जिसे वह देखती थी।
देखना ही विश्वास करना नहीं है यह सिर्फ देखना है।
बहादुर बनने की कोशिश करना ही बहादुर होना है।
ईश्वर की इच्छा पूरी करने में मुझे उनकी योजनाओं पर बहस करने का समय ही नहीं मिलता।
तो आओ, मुसीबत, अगर मेरे पिता की यही मर्जी है, तो मेरी नाराज दोस्त बनो। मुस्कुराते हुए दुश्मन से बेहतर है नाराज दिखने वाला दोस्त।
कोई भी कहानी असल में कभी खत्म नहीं होती, और मुझे लगता है कि मैं जानता हूँ क्यों।
लोग उतना ही विश्वास कर सकते हैं जितना वे कर पाते हैं, और जो ज्यादा विश्वास करते हैं, उन्हें उन लोगों के प्रति कठोर नहीं होना चाहिए जो कम विश्वास करते हैं। मुझे शक है कि अगर आपने इसमें से कुछ देखा न होता, तो क्या आप खुद इस पर विश्वास करते।
दर्शनशास्त्र असल में घर की याद है।
मैं बच्चों के लिए नहीं, बल्कि बच्चों जैसे मन वाले लोगों के लिए लिखता हूँ, चाहे वे पाँच साल के हों, पचास के या पचहत्तर के।
कुछ इंसानों के विकास और दूसरों के विकास में यह फर्क होता है, एक मामले में यह लगातार मरना है, तो दूसरे में लगातार पुनर्जन्म।
आपको दिन के साथ-साथ अंधेरे में भी मजबूत रहना सीखना होगा, वरना आप हमेशा आधे ही बहादुर रहेंगे।
बीते हुए आँसू ही आज की ताकत हैं।
प्यार करने से ही, न कि प्यार पाए जाने से, कोई दूसरे की आत्मा के सबसे करीब पहुँच सकता है।
अपने साथी के लिए आप जो सबसे अच्छा काम कर सकते हैं, उसकी अंतरात्मा को जगाने के बाद, वह यह है कि उसे सोचने के लिए चीजें न दें, बल्कि उसके अंदर जो चीजें हैं उन्हें जगाएँ। या यूँ कहें कि उसे खुद सोचने के लिए प्रेरित करना।
जैसे-जैसे आप इसके लिए तैयार होते हैं, आपको किसी न किसी किताब में वह चीज मिल जाएगी जिसकी आपको जरूरत है।
अगर हम अपने ईश्वर और पिता को अपने साथ अपनी मर्जी से काम करने दें, तो हमारे अस्तित्व के विस्तार की कोई सीमा नहीं रहेगी।
इंसान उतना ही आजाद होता है जितना वह खुद को बनाना चाहता है, उससे जरा भी यादा नहीं।
जब लोग जान-बूझकर गलत काम करते हैं, तो उनके दोबारा ऐसा करने की संभावना यादा होती है।
सबसे मधुर संगीत की तरह, हर सुर में उदासी की एक हल्की झलक होती है। और हमें यह भी नहीं पता कि जीवन की खुशियों में से कितनी खुशियाँ उन दुखों की वजह से हैं जो उनके साथ मिले-जुले होते हैं। खुशी सबसे गहरे सच को उजागर नहीं कर सकती, हालाँकि सबसे गहरा सच ही सबसे गहरी खुशी होती है।
लोगों का यह सोचना कितनी बेवकूफी है कि बुढ़ापे का मतलब टेढ़ापन, मुरझायापन, कमजोरी, लाठी, चश्मा, गठिया और भूलने की बीमारी है! यह कितनी बेवकूफी है! बुढ़ापे का इन सब चीजों से कोई लेना-देना नहीं है। सही बुढ़ापे का मतलब है ताकत, सुंदरता, खुशी, हिम्मत, साफ नजर और मजबूत, दर्द-रहित अंग।
प्यार करने से ही, न कि प्यार पाने से, कोई व्यक्ति दूसरे की आत्मा के सबसे करीब पहुँच सकता है, हाँ, जहाँ दो लोग प्यार करते हैं, वहाँ एक-दूसरे के प्रति प्यार ही उनकी खुशी की शुरुआत करता है, उसे पूरा करता है और उसे पक्का करता है। मैं जानता था कि प्यार करने वाले को उस आत्मा पर अधिकार मिल जाता है जिसे वह प्यार करता हैकृभले ही वह आत्मा उसे न जानती हो, और वह उसे अंदर से उस आत्मा के करीब ले आता है, एक ऐसी शक्ति जो केवल भलाई के लिए ही हो सकती हैय क्योंकि जैसे-जैसे स्वार्थ बीच में आता है, प्यार खत्म हो जाता है, और उससे पैदा होने वाली शक्ति भी खत्म हो जाती है। फिर भी, हर प्यार को एक दिन उसका प्रतिफल जरूर मिलता है। -जॉर्ज मैकडोनाल्ड
Trying to be brave is what it means to be brave—an inspiring and thought-provoking quote by the Scottish author, poet, and Congregational minister George MacDonald
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