16 अप्रैल 1889 को लंदन, इंग्लैंड में चार्ली चैपलिन (चार्ल्स स्पेंसर चैपलिन जूनियर) का जन्म हुआ। चार्ली चैपलिन विश्व विख्यात अंग्रेज कॉमिक एक्टर, फिल्ममेकर, फिल्म एडिटर और कंपोजर बने जिन्हें मूक फिल्मों के दौर में बहुत शोहरत मिली। चार्ली चैपलिन अपने ऑन-स्क्रीन किरदार द ट्रैम्प के जरिए दुनिया भर में एक आइकॉन बन गए और उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की सबसे अहम हस्तियों में से एक माना जाता है। उनका करियर 75 साल से भी ज्यादा लंबा रहा, विक्टोरियन दौर में उनके बचपन से लेकर 1977 में उनकी मौत से ठीक एक साल पहले तक। उन्हें तारीफें भी मिलीं और विवादों का सामना भी करना पड़ा। उनका कम्युनिस्ट कहकर विरोध किया गया और बदनाम किया गया। चार्ली चैपलिन ने सत्ता, व्यवस्था, पूंजीवाद के जनविरोधी चरित्र को बखूबी उजागर किया।
1919 में चार्ली चैपलिन ने डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी यूनाइटेड आर्टिस्ट्स की सह-स्थापना की, जिससे उन्हें अपनी फिल्मों पर पूरा कंट्रोल मिल गया। उनकी पहली फीचर-लेंथ फिल्म द किड (1921) थी, जिसके बाद अ वुमन ऑफ पेरिस (1923), द गोल्ड रश (1925), और द सर्कस (1928) आईं। 1930 के दशक में उन्होंने शुरू में साउंड फिल्मों की तरफ जाने से मना कर दिया था, इसके बजाय उन्होंने बिना डायलॉग वाली फिल्में सिटी लाइट्स (1931) और मॉडर्न टाइम्स (1936) बनाईं। उनकी पहली साउंड फिल्म द ग्रेट डिक्टेटर (1940) थी, जिसमें उन्होंने एडॉल्फ हिटलर पर व्यंग्य किया था। 1940 का दशक चार्ली चैपलिन के लिए विवादों भरा रहा, और उनकी लोकप्रियता तेजी से घटने लगी। उन पर कम्युनिस्ट विचारधारा से हमदर्दी रखने का आरोप लगा, और प्रेस व आम लोगों के कुछ तबकों ने उनके पितृत्व विवाद और अपने से काफी कम उम्र की महिलाओं से शादी करने को लेकर काफी हंगामा मचाया। फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने उनके विरुद्ध जाँच शुरू कर दी, जिसके चलते 1952 में चैपलिन को अमेरिका छोड़कर स्विट्जरलैंड में बसना पड़ा। अपनी बाद की फिल्मों में उन्होंने द ट्रैम्प का किरदार छोड़ दिया, इन फिल्मों में मोंसियर वर्दौक्स (1947), लाइमलाइट (1952), अ किंग इन न्यूयॉर्क (1957), और अ काउंटेस फ्रॉम हॉन्ग कॉन्ग (1967) शामिल हैं। चार्ली को आज भी करोड़ों लोग अपने हृदय की गहराइयों से याद और सम्मान करते हैं। भारत में दिग्गज अभिनेता, फिल्मकार राज कपूर और गायक किशोर कुमार से लेकर दुनिया भर के तमाम कलाकारों ने चार्ली चैपलिन के अभिनय की नकल की है।
अमेरिका छोड़ने के बाद चार्ली चैपलिन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की जिसमें उन्होंने अमेरिका में पुनः प्रवेश न करने के अपने निर्णय के बारे में बताया, मैं कुछ शक्तिशाली प्रतिक्रियावादी समूहों के झूठ और दुष्प्रचार का निशाना बना हूँ, इन समूहों ने अपने प्रभाव और अमेरिका के येलो प्रेस (सनसनीखेज पत्रकारिता) की मदद से एक ऐसा अस्वस्थ माहौल बना दिया है, जिसमें उदार विचारों वाले लोगों को चुन-चुनकर सताया जा सकता है। इन परिस्थितियों में, मुझे अपना फिल्म-निर्माण का काम जारी रखना लगभग असंभव लग रहा है, इसलिए मैंने संयुक्त राज्य अमेरिका में अपना निवास त्याग दिया है। यहां पेश हैं चार्ली चैपलिन के कुछ तीखे, चुटीले, गंभीर और विचारणीय उद्धरण
जिस दिन आप हँसे नहीं, वह दिन बेकार गया।
जिंदगी एक बहुत ही खूबसूरत और शानदार चीज है, यहाँ तक कि एक जेलीफिश के लिए भी।
अगर आप हमेशा नीचे ही देखते रहेंगे, तो आपको कभी इंद्रधनुष दिखाई नहीं देगा।
मुझे हमेशा बारिश में चलना अच्छा लगता है, ताकि कोई मुझे रोते हुए न देख सके।
इस जालिम दुनिया में कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता, यहाँ तक कि हमारी परेशानियाँ भी नहीं।
इंसान का असली चरित्र तब सामने आता है जब वह नशे में होता है।
हम बहुत ज्यादा सोचते हैं और बहुत कम महसूस करते हैं।
आपको लगेगा कि जिंदगी अब भी जीने लायक है, अगर आप बस मुस्कुरा दें।
आपका नंगा शरीर सिर्फ उन्हीं का होना चाहिए, जो आपकी नंगी रूह से प्यार करते हैं।
हो सकता है कि मेरा दर्द किसी की हंसी की वजह हो। लेकिन मेरी हंसी कभी किसी के दर्द की वजह नहीं बननी चाहिए।
जिंदगी जब करीब से देखी जाती है तो एक दुखद कहानी लगती है, लेकिन जब दूर से देखी जाती है तो एक मजेदार कहानी लगती है।
असफलता कोई बड़ी बात नहीं है। खुद को बेवकूफ बनाने के लिए हिम्मत चाहिए।
सच में हंसने के लिए, आपको अपने दर्द को सहना आना चाहिए, और उसके साथ खेलना आना चाहिए।
बिना कुछ किए, कल्पना का कोई मतलब नहीं होता।
सच्चा प्यार सभी निराशाओं में सबसे खूबसूरत होता है, क्योंकि यह उन सभी चीजों से कहीं ज्यादा होता है जिन्हें कोई जाहिर कर सकता है।
आप जिंदगी का कोई मतलब क्यों ढूंढ रहे हैं? जिंदगी तो बस एक चाहत है, कोई मतलब नहीं।
बाकी सभी लोगों की तरह, मैं भी वही हूं जो मैं हूं, एक अकेला इंसान, सबसे अलग और अनोखा, जिसके अंदर उसके पुरखों की सोच और चाहतों का इतिहास बसा हुआ है, सपनों, चाहतों और खास अनुभवों का इतिहास, और मैं इन सभी चीजों का ही जोड़ हूं।
हम बहुत ज्यादा सोचते हैं और बहुत कम महसूस करते हैं। हमें मशीनों से कहीं ज्यादा इंसानियत की जरूरत है, होशियारी से कहीं ज्यादा, हमें दया और नरमी की जरूरत है। इन खूबियों के बिना जिंदगी में सिर्फ हिंसा होगी और सब कुछ खत्म हो जाएगा।
अगर आप जिंदगी से डरते नहीं हैं, तो यह बहुत खूबसूरत हो सकती है। इसके लिए बस हिम्मत, कल्पना और थोड़े से पैसों की जरूरत होती है।
दुनिया की सबसे बड़ी दिक्कत यही है, हम सभी खुद से ही नफरत करते हैं।
मैं बस एक ही चीज हूं, और सिर्फ एक ही चीज, और वह है एक जोकर। यह मुझे किसी भी राजनेता से कहीं ज्यादा ऊंचे दर्जे पर बिठाता है।
आखिर में, सब कुछ बस एक मजाक ही तो है।
अगर लोग आपको अकेला छोड़ दें, तो जिंदगी बहुत खूबसूरत हो सकती है।
जिंदगी एक ऐसा नाटक है, जिसकी पहले से कोई रिहर्सल नहीं होती। इसलिए, गाओ, रोओ, नाचो, हंसो और जिंदगी को पूरी शिद्दत से जियो, इससे पहले कि नाटक का पर्दा गिर जाए और यह नाटक बिना किसी तालियों की गड़गड़ाहट के खत्म हो जाए।
अपने अहंकार की रोशनी में देखें, तो हम सभी ऐसे राजा हैं जिन्हें उनके सिंहासन से उतार दिया गया है।
शब्द तो बहुत सस्ते होते हैं। आप जो सबसे बड़ी चीज बोल सकते हैं, वह है हाथी।
निराशा एक नशे की तरह होती है। यह हमारे दिमाग को सुस्त करके, उसे हर चीज के प्रति बेपरवाह बना देती है।
जीवन में सबसे अच्छी बात यह है कि आप अपनी सभी योजनाओं और सपनों के साथ आगे बढ़ें, जीवन को पूरी तरह अपनाएँ और हर दिन पूरे जोश के साथ जिएँ। हारने पर भी अपना विश्वास बनाए रखें और जीतने पर भी कृतज्ञ रहें। यह सब इसलिए, क्योंकि यह दुनिया उन्हीं की है जो अपनी चाहतों को पाने का साहस रखते हैं। और इसलिए भी क्योंकि जीवन सचमुच इतना छोटा है कि इसे व्यर्थ गँवाया नहीं जा सकता।
जीवन का मार्ग स्वतंत्र और सुंदर हो सकता है, लेकिन हम अपना रास्ता भटक गए हैं। लालच ने इंसानों की आत्माओं में जहर घोल दिया है, दुनिया को नफरत की दीवारों से घेर दिया है, और हमें दुख तथा रक्तपात की ओर धकेल दिया है। हमने गति तो हासिल कर ली है, लेकिन खुद को ही एक दायरे में कैद कर लिया है। जिन मशीनों ने हमें समृद्धि दी है, उन्हीं ने हमें अभावों में छोड़ दिया है। हमारे ज्ञान ने हमें संशयवादी बना दिया है और हमारी चालाकी ने हमें कठोर और निर्मम बना दिया है। हम सोचते बहुत ज्यादा हैं, लेकिन महसूस बहुत कम करते हैं।
अपने जीवन में कम से कम एक बार अपने बारे में जरूर सोचें वरना हो सकता है कि आप इस दुनिया की सबसे बेहतरीन हास्य-कथा (कॉमेडी) को देखने से चूक जाएँ। -चार्ली चैपलिन