रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) उत्तराखंड 30 मई 2026 (दिनेश तिवारी)। श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधम सिंह नगर ने हरिद्वार जिला प्रशासन द्वारा मजदूर आंदोलनों में भागीदारी करने पर इंकलाबी मजदूर केंद्र के उपाध्यक्ष पंकज बवाड़ी, कार्यकर्ता जयप्रकाश को असत्य आरोप लगाकर गुंडा एक्ट के तहत नोटिस जारी करने व पीपीआईडी के ललित कुमार को जिलाबदर करने के खिलाफ कलेक्ट्रेट रुद्रपुर में प्रदर्शन किया तत्पश्चात जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर के माध्यम से कमिश्नर गढ़वाल मंडल को ज्ञापन प्रेषित किया।
ज्ञापन में कहा गया कि –
सिडकुल हरिद्वार में कम्पनी मालिकों और ठेकेदारों द्वारा अस्थाई और ठेका मजदूरों को शासन द्वारा घोषित न्यूनतम वेतनमान, नियमानुसार अतिकाल (ओवर टाइम) का दो गुना वेतन और बोनस भुगतान नहीं किया जा रहा था। आसमान छूती महंगाई के बावजूद भी शासन द्वारा उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद करीब 25 वर्ष बीतने के पश्चात भी इंजिनियरिंग उद्योगों के लिए ना तो वेज बोर्ड का गठन किया गया और ना ही वेतन पुनरीक्षण किया गया। विगत लम्बे समय से परिवर्तनीय महंगाई भत्ता भी घोषित नहीं किया गया था। शासन द्वारा नॉन इंजिनियरिंग उद्योगों के लिए वर्ष 2024 में घोषित न्यूनतम वेतनमान के 50ः हिस्से पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गईं रोक को हटाने हेतु भी उचित पैरवी नहीं की गईं। जबकि इस दौरान महंगाई तेज गति से बढ़ती रही। जिससे गरीब मजदूरों के लिए खुद और अपने परिवार का भरण पोषण करना असम्भव हो गया। इस असहनीय स्थिति के कारण अस्थाई व ठेका मजदूरों का आक्रोश फूटना स्वाभिविक ही था। किंतु उत्तराखंड शासन, प्रशासन और श्रम विभाग द्वारा अस्थाई व ठेका मजदूरों के प्रति बरती गईं घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता को स्वीकार करके अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के स्थान पर, उस पर पर्दा डालने के उद्देश्य के तहत दमन का सहारा लेकर पीड़ित मजदूरों की ही आवाज को दबाने की कार्यवाही की जा रही है। जो घोर निंदनीय और अन्याय पूर्ण है। अपनी असहनीय स्थिति और शासन प्रशासन द्वारा मजदूरों के प्रति बरती गईं घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता के कारण मजदूरों के पास सामूहिक रूप से आवाज उठाने के अलावा अन्य विकल्प शेष नहीं था। ऐसे में मजदूरों की स्वतःस्फूर्त हड़तालें फूटने लगी। किन्तु उत्तराखंड सरकार, जिला प्रशासन और श्रम विभाग द्वारा अपनी लापरवाही और गलती को स्वीकार करने के स्थान पर अन्यायपूर्ण रूप में मजदूर नेता पंकज बवाड़ी और अन्य मजदूरों पर दबाव बनाकर उक्त हड़तालें कराने का असत्य आरोप लगाकर अपनी जवाबदेही से पलायन किया किया जा रहा है।
मजदूरों की उक्त स्वतःस्फूर्त हड़ताल फूटने के बाद ही मजदूर नेता पंकज आदि अपनी मानवीय और संवैधानिक दायित्वों और अधिकारों के तहत मजदूरों के बीच पहुंचे। उन्हें श्रम विभाग हरिद्वार ले जाकर सक्षम अधिकारियो के समक्ष अपनी समस्याओं को रखने की सलाह दी। मजदूरों की कमेटिया चुनकर उनके सामुहिक मांगपत्र लगाये गये। जिसका आंदोलित मजदूरों ने अनुसरण भी किया। जिसकी आंदोलनों के शांतिपूर्ण और अनुशासित चलने में महती भूमिका रही। उक्त मामले हल भी हुए। प्रशासन और श्रम विभाग की मध्यस्थता में हुई वार्ताओं के दौरान प्रशासन की सहमति से पंकज आदि साथी वार्ताओं में उपस्थित हुए और उक्त मामलों को हल कराने में महती भूमिका निभाई। 8 मई को कैम्पस फुटवियर के मजदूरों के समझौते में अपर जिलाधिकारी महोदय उपस्थित रहे। 8 और 9 मई को हुए समझौतों में पंकज कुमार के हस्ताक्षर है। समझौते में स्पष्ट लिखा है कि पूर्वाग्रह व बदले की भावना से कोई कार्यवाही नहीं की जायेगी। मजदूरों के उपरोक्त मामलों के समाधान हेतु मजदूर नेता पंकज बवाड़ी आदि साथियों की सराहना की की जगह थाना सिडकुल पुलिस हरिद्वार द्वारा उक्त कम्पनी मालिकों, ठेकेदारों और कम्पनी मालिकों की सिडकुल ऐसोशियेशन के इशारे और मिलीभगत करके मजदूर नेता पंकज बवाड़ी आदि उक्त साथियों के विरुद्ध अन्यायपूर्ण तरीके से उपरोक्त असत्य एफआईआर दर्ज की गईं हैं।
पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन द्वारा मजदूर नेता पंकज बवाड़ी, ललित कुमार आदि के ऊपर सिडकुल हरिद्वार स्थित कम्पनी मालिकों और ठेकेदारों के दबाव में और उनसे हमसाज होकर द्वेषपूर्ण भावना के तहत गुंडा एक्ट की उपरोक्त अविधिक और अन्यायपूर्ण कार्यवाही अमल में लाई जा रही है, और पूर्व में उनके विरुद्ध उपरोक्त फर्जी एफआईआर दर्ज किये गये, जोकि अत्यंत निंदनीय व सर्वथा अन्यायपूर्ण कृत्य है।
हमारी मांगें
1) मजदूर नेता पंकज बवाड़ी उर्फ पंकज कुमार तथा जय प्रकाश को गुंडा एक्ट के आरोप में भेजे गये उपरोक्त नोटिस को और गुंडा एक्ट की कार्यवाही को तत्काल निरस्त किया जाये।
2) इंजीनियर ललित कुमार पर लगाए गए झूठे मुकदमो को वापिस करते हुए जिला बदर के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और उनको अपने गृह जनपद हरिद्वार में ससम्मान प्रवेश की अनुमति के साथ साथ सुरक्षा प्रदान भी की जाए।
3) पंकज बवाड़ी आदि के विरुद्ध थाना सिडकुल पुलिस द्वारा दर्ज की गईं झूठी एफआईआर संख्या 207/2025 व 210/2025 तथा 178/2026 व 179/2026 को तत्काल निरस्त की जाये।
4) मजदूरों को आंदोलन व धरना-प्रदर्शन करने आदि लोकतान्त्रिक अधिकारों का दमन बंद किया जाये।
5) सभी मजदूरों को न्यूनतम वेतनमान का, अतिकाल के दो गुना वेतन का और नियमानुसार बोनस भुगतान करना सुनिश्चित किया जाये।
6) विभिन्न हड़तालों में शामिल मजदूरों द्वारा चुनी गयी कमेटी प्रतिनिधियों को पुलिस के सामने पीटा जा रहा है और उनको नौकरी से निकला जा रहा है यह त्रिपक्षीय समझौते का उल्लंघन है इस पर तत्काल रोक लगायी जायें। मजदूर आंदोलन के दमन पर अविलंब रोक लगायी जाये।
7) मजदूर विरोधी चार लेबर कोड्स रद्द किये जाये तथा ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किया जाये।
प्रदर्शन व ज्ञापन की कार्यवाही में श्रमिक सयुंक्त मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी, महासचिव चंद्र मोहन लखेड़ा,सीएसटीयू के महासचिव मुकुल, धीरज जोशी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के कोष सचिव सुरेंद्र सिंह रावत, मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के दिनेश चंद्र, एक्टू के उत्तम दास, पीपीआईडी के जनरल सैक्ट्ररी हरीश मौर्या, उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, बजाज आटो लिमिटेड के महामंत्री संदीप कुमार, आटो लाइन इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष जीवन लाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद, महामंत्री प्रकाश मेहरा, करोलिया लाइटिंग इम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष हरेन्द्र सिंह, सीएनजी टेंपो यूनियन के अध्यक्ष सुब्रत विश्वास, यजाकि वर्कर यूनियन के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, महामंत्री रविंद्र कुमार, फूलचंद आदि लोगों ने भागीदारी की।
जारीकर्ता – दिनेश तिवारी, अध्यक्ष श्रमिक संयुक्त मोर्चा, ऊधम सिंह नगर मो नंबर 7248304024
Sanyukta Shramik Morcha Udham Singh Nagar Uttarakhand submitted a memorandum against harassment of labor leaders Pankaj Bawadi, Jaiprakash, Lalit Kumar, etc. condemning the repression and making 7 demands
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