14 अक्टूबर 1993 को अर्लिंग्टन हाइट्स, इलिनोइस, अमेरिका में चार्ली कर्क (चार्ल्स जेम्स कर्क) का जन्म हुआ। चार्ली कर्क अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता, उद्यमी, डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक और मीडिया पर्सनैलिटी बने। चार्ली कर्क ने 2012 में कंजर्वेटिव छात्र संगठन टर्निंग पॉइंट यूएसए की सह-स्थापना की और 2025 में अपनी हत्या तक इसके कार्यकारी निदेशक रहे। डोनाल्ड ट्रंप के एक अहम सहयोगी के तौर पर, #CharlieKirk रिपब्लिकन पार्टी के में मागा मूवमेंट की सबसे प्रमुख आवाजों में से एक बने। चार्ली कर्क ने कई किताबें लिखीं और द चार्ली कर्क शो को होस्ट किया। 10 सितंबर, 2025 को ओरेम, यूटा में यूटा वैली यूनिवर्सिटी में एक इवेंट द अमेरिकन कमबैक टूर के बीच 3,000 लोगों की भीड़ के सामने दोपहर 12ः23 कर्क की गर्दन में एक व्यक्ति ने गोली मार दी। कर्क को गंभीर हालत में टिम्पानोगोस रीजनल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ उसी दोपहर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अधिकारियों ने 12 सितंबर को वाशिंगटन, यूटा में एक संदिग्ध शूटर, 22 वर्षीय टायलर जेम्स रॉबिन्सन को गिरफ्तार किया। चार दिन बाद 16 सितंबर को उस पर गंभीर हत्या और अन्य अपराधों का आरोप लगाया गया।
चार्ली कर्क के कुछ विचारणीय कथन यहां प्रस्तुत हैं
कभी हार न मानें। कभी घुटने न टेकें। हमेशा जीत के लिए आगे बढ़ें।
अगर पुराने डेमोक्रेट का मतलब नागरिक स्वतंत्रता, कल्याण, अंतर्राष्ट्रीयता जैसा कुछ था और नए डेमोक्रेट का मतलब सेंसरशिप, समाजवाद, अंतर्राष्ट्रीयता जैसा कुछ है, जबकि पुराने रिपब्लिकन का मतलब धार्मिक शासन, कॉर्पोरेट, युद्ध-प्रेमी जैसा कुछ था, तो नए रिपब्लिकन का फॉर्मूला मोटे तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी, उद्यमिता, शांति-समर्थक जैसा है। हर बदलाव अच्छा नहीं होता, लेकिन यह वाला अच्छा है।
उनके लिए मजे का मतलब अमेरिकी झंडे का जश्न मनाना है। मुझे यह बात अच्छी लगती है। अगर शरारत के बारे में उनकी सोच यही है, तो उन्हें शरारत करने दें। यह निश्चित रूप से झंडा जलाने से बेहतर है।
ओबामा को लगता है कि माफी मांगना राजनेता का गुण है और बुश को लगता है कि लड़ने के लिए अपराधियों को खोजना ऐसा गुण है। ट्रंप ताकत और कड़े शब्दों की तारीफ करते हैं, जिसे ओबामा शायद असभ्य मानते हैं, लेकिन वह बुश परिवार की तरह बिना सोचे-समझे इनका इस्तेमाल करने में विश्वास नहीं रखते। वाशिंगटन के लगभग हर दूसरे राजनीतिक व्यक्ति के विपरीत, ट्रंप लक्ष्य-केंद्रित हैं।
कभी हार न मानें, कभी घुटने न टेकें, और हमेशा जीत के लिए आगे बढ़ें।
दूसरी ओर, महानता के लिए आजादी और खुद को पूरी तरह से निखारने के जज्बे की जरूरत होती है।
सिर्फ अमेरिका में ही कोई राष्ट्रपति अश्वेत और हिस्पैनिक लोगों के लिए अब तक की सबसे कम बेरोजगारी दर हासिल कर सकता है अश्वेत लोगों के नए बिजनेस को 400 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है, अश्वेत कर्मचारियों की मजदूरी में बढ़ोतरी देख सकता है, जेल सुधार की वकालत कर सकता है, गलत तरीके से दोषी ठहराए गए अश्वेत लोगों को माफ कर सकता है, और फिर भी उसे नस्लवादी कहा जा सकता है।
सच कहूँ तो मुझे एंपैथी (सहानुभूति, दूसरे की भावना को महसूस करना) शब्द बिल्कुल पसंद नहीं है। मुझे लगता है कि एंपैथी एक बनावटी, नए जमाने का शब्द है जो बहुत नुकसान पहुँचाता है, लेकिन राजनीति में यह बहुत असरदार है। मुझे एंपैथी से ज्यादा सिंपैथी (हमदर्दी) पसंद है।
मौत की सजा सबके सामने दी जानी चाहिए, जल्दी दी जानी चाहिए, और उसे टीवी पर दिखाया जाना चाहिए। मुझे लगता है कि एक खास उम्र में, यह एक शुरुआत होती है, किस उम्र में लोगों को सबके सामने दी जाने वाली मौत की सजा देखनी शुरू करनी चाहिए?
समाजवाद तब तक नहीं टिक सकता जब तक लोग खुद सोचने के लिए आजाद हों, और अमेरिका कभी भी समाजवादी देश नहीं बनेगा।
मैं यह किताब एक ऐसे युवा के तौर पर लिख रहा हूँ जिसने जान-बूझकर अपनी शुरुआती जिंदगी को उस अमेरिका को बहाल करने, या शायद उसे पूरी तरह बनाने की लड़ाई में लगाने का फैसला किया है, जिसका सपना हमारे संस्थापकों ने देखा था।
मुझे लगता है कि इसकी एक कीमत चुकानी पड़ती है, दुर्भाग्य से, हर साल बंदूक से कुछ मौतें होती हैं। ताकि हम अपने दूसरे सेकंड अमेंडमेंट (बंदूक रखने के अधिकार) को बनाए रख सकें और भगवान के दिए गए अपने दूसरे अधिकारों की रक्षा कर सकें।
जब बिल क्लिंटन ने कहा, मैं तुम्हारा दर्द महसूस कर सकता हूँ, तो यह एक शानदार राजनीतिक चाल थी। यह पूरी तरह बकवास थी, लेकिन इसने काम किया। मुझे सिंपैथी ज्यादा पसंद है। सिंपैथी कहीं बेहतर शब्द है। सिंपैथी का मतलब है यह कहना, तुम जिस दौर से गुजर रहे हो उसके लिए मुझे अफसोस है, मैं तुम्हारी मदद करने की कोशिश करूँगा। एंपैथी का मतलब है, मैं तुम बन जाऊँगा, मैं ठीक वही महसूस करूँगा जो तुम महसूस कर रहे हो। यह नामुमकिन है, यह आत्म-मुग्धता है, और यह विनाशकारी है।
नींद की कमी से हम सिर्फ थकते ही नहीं हैं, बल्कि हम तर्कहीन, चिड़चिड़े और भावनात्मक रूप से अस्थिर भी हो जाते हैं लंबे समय तक नींद की कमी न सिर्फ एंग्जायटी और डिप्रेशन को बढ़ा सकती है, बल्कि रिश्तों को संभालने, समझदारी से फैसले लेने या भावनात्मक संतुलन बनाए रखने की हमारी क्षमता को भी कमजोर कर सकती है।
भाषा पर नियंत्रण और पॉलिटिकल करेक्टनेस (राजनीतिक रूप से सही भाषा का इस्तेमाल) टीम लेफ्ट के लिए आज के जमाने का हथियार बन गए हैं और वे बिना किसी सोच-विचार के इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।
अगर आप उन्हें इसलिए चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि आप उनसे सहमत नहीं हैं, तो आप बौद्धिक रूप से बहुत छोटे इंसान हैं।
मुझे जनरल ला रोशेजाक्वेलिन के वे मशहूर शब्द याद आ रहे हैं जो उन्होंने पहली फ्रांसीसी क्रांति के दौरान लड़ाई लड़ते हुए कहे थे, दोस्तों, अगर मैं आगे बढ़ूँ, तो मेरे पीछे आओ! अगर मैं पीछे हटूँ, तो मुझे मार डालो! अगर मैं मर जाऊँ, तो मेरा बदला लो!
सरकार की दमनकारी ताकतों से व्यक्तिगत आजादी की रक्षा करना ही वह विचार है जिस पर हमारे देश की नींव रखी गई थी। यही एकमात्र तरीका है जिससे व्यक्ति के अधिकारों, परिवार, स्थानीय चर्चों और स्कूलों, और ऐसे अन्य समूहों की रक्षा की जा सकती है जो खुद नहीं लड़ सकते।
हर चीज पर शक करें, खासकर अपनी सरकार पर। सवाल पूछें, अपने अधिकारों के लिए लड़ें और कभी हार न मानें।
ट्रंप ने में अपने भाषण में कहा, किसी ने कहा कि जर्मनी में राष्ट्रपति ओबामा, राष्ट्रपति ट्रंप से कहीं ज्यादा लोकप्रिय हैं, उन्हें ऐसा होना ही चाहिए। अगर मुझे यूरोप में ज्यादा वोट मिलने लगें, तो समझो मैं कुछ गलत कर रहा हूँ।
वह क्रूरता, क्रांति को एक तरह की शुद्ध करने वाली आग मानने का भाव ऐसा जुनून है जो अमेरिका या ब्रिटेन के इतिहास में शायद ही कभी देखा गया हो। हाँ, अगर हम आज के दौर में सोशल जस्टिस वॉरियर्स (सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वाले) कहे जाने वाले वामपंथियों के जोश को इसमें शामिल करें तो बात अलग है, ये लोग कभी-कभी अपने राजनीतिक दुश्मनों को पीटते हैं, उन पर अंडे फेंकते हैं या मोलोटोव कॉकटेल (पेट्रोल बम) से हमला करते हैं, हालाँकि अभी वे ज्यादातर अपने दुश्मनों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और कैंपस में बोलने के मौकों से हटाने की कोशिश करते हैं।
हर चीज पर शक करो।
आप ऐसे समाज में कभी नहीं रह सकते जहाँ लोग हथियार रखते हों और फिर भी बंदूक से किसी की मौत न हो। यह बकवास है, बेतुकी बात है। लेकिन मुझे लगता है कि यह सौदा फायदे का है। मुझे लगता है कि हर साल बंदूक से होने वाली कुछ मौतों की कीमत चुकाना ठीक है, ताकि हम अपने दूसरे ईश्वर-प्रदत्त अधिकारों की रक्षा के लिए सेकंड अमेंडमेंट (हथियार रखने का अधिकार) को बनाए रख सकें। यह एक समझदारी भरा सौदा है। यह तर्कसंगत है। -चार्ली कर्क
Freedom requires the drive to fully realize one’s potential.— Charlie Kirk American right-wing political activist, entrepreneur, and Donald Trump supporter
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