25 अक्टूबर 1881 को मालागा, स्पेन में पाब्लो पिकासो (पाब्लो डिएगो होजे फ्रांसिस्को डी पाउला जुआन नेपोमुसेनो मारिया डी लॉस रेमेडियस सिप्रियानो डी ला सैंटिसिमा त्रिनिदाद रुइज वाई पिकासो) का जन्म हुआ। पाब्लो पिकासो स्पेन के विश्व विख्यात चित्रकार और मूर्तिकार बने। हालांकि उन्होंने अपने वयस्क जीवन का अधिकांश समय फ्रांस में बिताया। 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में से एक, पाब्लो पिकासो को क्यूबिस्ट आंदोलन की शुरुआत करने, कंस्ट्रक्टेड स्कल्पचर का आविष्कार करने, कोलाज के सह-आविष्कारक होने सहित कई तरह की कला शैलियों को विकसित करने, तलाशने तथा तराशने के लिए जाना जाता है। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में प्रोटो-क्यूबिस्ट शैली की पेंटिंग लेस डेमोइसेल्स डीश्एविग्नन और युद्ध-विरोधी पेंटिंग गुएर्निका (1937) शामिल हैं। गुएर्निका स्पेनिश गृहयुद्ध के दौरान जर्मन और इतालवी वायु सेना द्वारा गुएर्निका शहर पर की गई बमबारी का बहुत मार्मिक चित्रण है। पाब्लो पिकासो का करियर 76 वर्षों से भी अधिक समय तक चला, किशोरावस्था के अंतिम वर्षों से लेकर 8 अप्रैल 1973 को #PabloPicasso की मृत्यु तक। पिकासो अपने लंबे जीवनकाल में असाधारण रूप से सक्रिय रहे और उन्होंने बहुत विपुल संख्या में कलाकृतियां बनाईं। उनकी मृत्यु के समय उनकी संपत्ति में 45,000 से अधिक ऐसी कलाकृतियां थीं जो बिकी नहीं थीं। इनमें 1,885 पेंटिंग, 1,228 मूर्तियां, 3,222 सिरेमिक कृतियां, 7,089 चित्र (ड्रॉइंग), 150 स्केचबुक, हजारों प्रिंट, और कई टेपेस्ट्री (दीवार पर टांगने वाले कपड़े) व कालीन शामिल थे। क्रिश्चियन जर्वोस द्वारा तैयार की गई उनकी कृतियों की सूची (कैटलॉग रेजोन्ने) में 16,000 से अधिक पेंटिंग और चित्र शामिल हैं, यद्यपि यह सूची पूरी नहीं है। पिकासो का काम उनके दौर के अधिकांश कलाकारों की तुलना में कहीं अधिक था। मोटे अनुमान के अनुसार केवल अमेरिकी कलाकार बॉब रॉस ही काम की मात्रा के मामले में पिकासो की बराबरी कर सकते हैं, लेकिन रॉस की कलाकृतियां विशेष रूप से इस तरह से बनाई गई थीं कि उन्हें जल्दी और बड़ी संख्या में तैयार किया जा सके। पाब्लो पिकासो को हालांकि अपने समय में काफी प्रसिद्ध थे लेकिन वह दौर और था। 1950 के दशक तक दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध से उबर रही थी। निर्माणों का काम चल रहा था। आर्थिक तरक्की ज्यादा नहीं हो पाई थी। पाब्लो पिकासो की मौत के कई साल बाद उनकी कलाकृतियां करोड़ों रुपये में बिकने लगीं। विख्यात कनाडाई कलाकार क्रिस मैकक्लर ने 2004 में पाब्लो पिकासो के जन्म दिन पर अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस मनाने की शुरुआत की। अब 25 अक्टूबर को कलाकारों के समाज को दिए गए योगदान के जश्न को अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के नाम से आयोजित किया जाता है।
यहां प्रस्तुत हैं पाब्लो पिकासो के प्रेरक, गंभीर, विचारोत्तेजक, अनुकरणीय कथन
कला रोजमर्रा की जिंदगी की धूल को आत्मा से धो देती है।
कला वह झूठ है जो हमें सच का एहसास कराती है।
हर बच्चा एक कलाकार होता है। समस्या यह है कि बड़े होने पर वह कलाकार कैसे बना रहे।
आप जो कुछ भी सोच सकते हैं, वह सच है।
दूसरों ने देखा है कि क्या है और पूछा है कि क्यों ? मैंने देखा है कि क्या हो सकता है और पूछा है कि क्यों नहीं ?
नियमों को एक प्रो (विशेषज्ञ) की तरह सीखें ताकि आप उन्हें एक कलाकार की तरह तोड़ सकें।
सिर्फ उसी काम को कल पर टालें, जिसे अधूरा छोड़कर मरने में आपको कोई ऐतराज न हो।
आह, अच्छी पसंद ! कितनी भयानक चीज है! पसंद, रचनात्मकता की दुश्मन है।
जब मैं बच्चा था, तो मेरी माँ ने मुझसे कहा था, अगर तुम सैनिक बनोगे, तो जनरल बनोगे। अगर तुम साधु बनोगे, तो पोप बनोगे। लेकिन मैं एक चित्रकार बन गया और अंत में पिकासो कहलाया।
कुछ चित्रकार ऐसे होते हैं जो सूरज को एक पीले धब्बे में बदल देते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपनी कला और बुद्धि से एक पीले धब्बे को सूरज में बदल देते हैं।
जवान होने में बहुत लंबा समय लगता है।
रचनात्मकता की सबसे बड़ी दुश्मन समझदारी है।
प्रेरणा होती तो है, लेकिन यह आपको काम करते हुए मिलनी चाहिए।
मैं हमेशा वह काम करता हूँ जो मैं नहीं कर सकता ताकि मैं सीख सकूँ कि उसे कैसे करना है।
जीवन का अर्थ है अपनी प्रतिभा को खोजना। जीवन का उद्देश्य है उसे दूसरों को सौंप देना।
बुरे कलाकार नकल करते हैं। अच्छे कलाकार चुराते हैं।
हम सभी जानते हैं कि कला सच नहीं है। कला एक ऐसा झूठ है जो हमें सच का एहसास कराता है, कम से कम उस सच का जिसे समझने के लिए हमें दिया गया है। कलाकार को यह पता होना चाहिए कि अपने झूठ को सच के रूप में दूसरों को कैसे यकीन दिलाया जाए।
अगर मैं किसी जंगली घोड़े की तस्वीर बनाऊँ, तो शायद आपको घोड़ा न दिखे लेकिन आपको उसका जंगलीपन जरूर दिखेगा!
इस दुनिया का कोई मतलब नहीं है, तो फिर मैं ऐसी तस्वीरें क्यों बनाऊँ जिनका कोई मतलब हो? पेंटिंग करना, डायरी रखने का ही एक और तरीका है।
कंप्यूटर बेकार हैं। वे आपको सिर्फ जवाब दे सकते हैं।
महिलाएं केवल दो तरह की होती हैं, देवियां या फिर ऐसी जिन्हें लोग पैरों की धूल समझते हैं।
मैं एक ऐसे गरीब आदमी की तरह जीना चाहूंगा जिसके पास बहुत सारा पैसा हो।
राफेल की तरह पेंट करना सीखने में मुझे चार साल लगे, लेकिन एक बच्चे की तरह पेंट करना सीखने में पूरी जिंदगी लग गई।
एब्सट्रैक्ट आर्ट (अमूर्त कला) जैसी कोई चीज नहीं होती। आपको हमेशा किसी न किसी चीज से शुरुआत करनी पड़ती है। बाद में आप वास्तविकता के सभी निशानों को हटा सकते हैं।
ईश्वर असल में बस एक और कलाकार है। उसने जिराफ, हाथी और बिल्ली को बनाया। उसकी कोई एक खास शैली नहीं है, वह बस नई-नई चीजें आजमाता रहता है।
मैं खोजता नहीं हूँ। मैं पा लेता हूँ।
काश हम अपने दिमाग को बाहर निकाल सकें और सिर्फ अपनी आँखों का इस्तेमाल करें।
चित्र बनाने के लिए, आपको अपनी आँखें बंद करनी चाहिए और गाना चाहिए।
जब कला समीक्षक (आर्ट क्रिटिक्स) मिलते हैं तो वे रूप, संरचना और अर्थ के बारे में बात करते हैं। जब कलाकार मिलते हैं, तो वे इस बारे में बात करते हैं कि सस्ता तारपीन का तेल कहाँ से खरीदा जा सकता है।
जवानी की कोई उम्र नहीं होती।
हम कलाकार कभी खत्म नहीं होते जेल में या किसीतना शिविर (कॉन्संट्रेशन कैंप) में भी, मैं अपनी कला की दुनिया में सर्वशक्तिमान रहूँगा, भले ही मुझे अपनी कोठरी के धूल भरे फर्श पर अपनी गीली जीभ से ही चित्र क्यों न बनाने पड़ें।
अगर मेरे पास लाल रंग नहीं है, तो मैं नीले रंग का इस्तेमाल करता हूँ।
लोग हर चीज और हर इंसान में कोई न कोई अर्थ खोजना चाहते हैं। यह हमारे दौर की एक बीमारी है।
इंसान जो करता है, वही मायने रखता है। यह नहीं कि वह क्या करना चाहता था।
काम करना ही हर सफलता की बुनियादी कुंजी है।
मैं चीजों को वैसे ही पेंट करता हूँ जैसा मैं उनके बारे में सोचता हूँ, न कि वैसा जैसा मैं उन्हें देखता हूँ।
मैं एक विचार से शुरुआत करता हूँ, और फिर वह कुछ और ही बन जाता है।
सृजन (कुछ नया बनाने) का हर काम सबसे पहले विनाश (कुछ पुराना मिटाने) का काम होता है।
जो सोचता है कि वह कर सकता है, वह कर सकता है और जो सोचता है कि वह नहीं कर सकता, वह नहीं कर सकता। यह एक अटल और निर्विवाद नियम है।
कभी-कभी इंसान कोई ऐसी पेंटिंग बनाता है जो मानो कोई दरवाजा खोल देती है और आगे की चीजों के लिए एक सीढ़ी का काम करती है।
मुझे एक संग्रहालय (म्यूजियम) दो और मैं उसे भर दूँगा।
सारी कला कामुक (इरोटिक) होती है।
गहरे एकांत के बिना, कोई भी गंभीर काम संभव नहीं है। कला अनावश्यक चीजों को हटा देने का नाम है।
प्यार जीवन में सबसे बड़ी ताजगी है।
जब दो रंगों को एक-दूसरे के पास रखा जाता है, तो वे मानो गाने लगते हैं क्या कोई सच में इसे समझा सकता है? नहीं। ठीक वैसे ही, जैसे कोई कभी यह नहीं सीख सकता कि पेंटिंग कैसे की जाए।
कलाकार उन भावनाओं का पात्र होता है जो हर जगह से आती हैं आसमान से, धरती से, कागज के एक टुकड़े से, गुजरती हुई किसी आकृति से, या मकड़ी के जाले से।
हर सकारात्मक चीज की एक नकारात्मक कीमत चुकानी पड़ती है आइंस्टीन की प्रतिभा ही हिरोशिमा तक ले जाती है।
आप कला बनाते नहीं हैं, बल्कि उसे खोजते हैं।
हम उम्र में बड़े नहीं होते, बल्कि और ज्यादा परिपक्व होते जाते हैं।
रंग, चेहरे के हाव-भाव की तरह, भावनाओं के बदलावों के साथ बदलते रहते हैं।
हर चीज एक चमत्कार है। यह भी एक चमत्कार ही है कि नहाते समय इंसान पिघल नहीं जाता।
कला कभी भी पवित्र या निर्दोष नहीं होती। नासमझ और मासूम लोगों को इससे दूर रखना चाहिएय जो लोग इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं, उन्हें इसके संपर्क में नहीं आने देना चाहिए। हाँ, कला खतरनाक होती है। जहाँ यह पवित्र या निर्दोष है, वहाँ वह कला नहीं है।
कोई भी नई चीज या कुछ भी ऐसा जो करने लायक हो, उसे आसानी से पहचाना नहीं जा सकता।
पेंटिंग सिर्फ घरों को सजाने के लिए नहीं होती। यह दुश्मन के खिलाफ एक आक्रामक और रक्षात्मक हथियार है। -पाब्लो रुइज पिकासो
Art is a lie that makes us realize the truth — Thought-provoking quote by the world-renowned painter and sculptor Pablo Picasso
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