
नई दिल्ली। 2024 से ही भारत पर इस्राइल को मदद करने के आरोप लगते रहे हैं। अब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत से इस्राइल को 7 अक्टूबर 2023 के बाद से हथियारों, गोला-बारूद और उनके कलपुर्जों की 2,596 से अधिक खेप भेजी गई हैं। संगठन ने आशंका जताई है कि इन हथियारों का इस्तेमाल गाजा में जारी सैन्य कार्रवाई में हो सकता है और इससे नरसंहार में अप्रत्यक्ष भागीदारी का जोखिम पैदा हो सकता है। एमनेस्टी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार के स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनियों के माध्यम से इस्राइल को हथियारों की आपूर्ति जारी रही। संगठन ने कहा कि उसने भारत और इस्राइल के बीच शिपमेंट स्तर के व्यापार आंकड़ों का अध्ययन कर यह जानकारी जुटाई है। इस्राइल ने फिलिस्तीन में गाजा, रफाह, पश्चिमी तट इत्यादि में भारी तबाही मचाई है और बड़े पैमाने पर नरसंहार किया है, इसके अलावा वह ईरान और लेबनान में भी तबाही करता रहा है। ईरान पर अनैतिक, गैरकानूनी युद्ध थोपने से भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय कंपनियों ने इस्राइली रक्षा कंपनियों को सैन्य उपयोग से जुड़े सामान उपलब्ध कराए, जिनमें हथियारों के छोटे हिस्से, विस्फोटक सामग्री के कलपुर्जे और सैन्य वाहनों के घटक शामिल हैं। एमनेस्टी के अनुसार, 2,596 खेपों में कम से कम 3,90,516 छोटे हथियारों के पुर्जे, विस्फोटक आयुध से जुड़े 5,64,970 हिस्से और सैन्य वाहनों के 298 घटक शामिल हैं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि उसने उन खेपों को शामिल नहीं किया है, जिनके नागरिक उपयोग की संभावना हो सकती है। साथ ही मिसाइल रोधी रक्षा तकनीक से जुड़े कुछ सामानों को भी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत की कुछ कंपनियों ने इस्राइली रक्षा कंपनियों को सैन्य उपकरणों की आपूर्ति की। इनमें पीएलआर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, इंडो एमआईएम प्राइवेट लिमिटेड, कल्याणी सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, सरकारी कंपनी म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड और अल्फा एलसेक डिफेंस एंड एयरोस्पेस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम शामिल किए गए हैं।
एमनेस्टी ने कहा कि इस्राइल की जिन कंपनियों को ये सामान भेजे गए, उनमें एल्बिट सिस्टम्स, राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड और इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड शामिल हैं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा कि गाजा में जारी संघर्ष के बीच भारत का इस्राइली रक्षा क्षेत्र के साथ सहयोग चिंता का विषय है। संगठन ने भारत सरकार से इस्राइल को हथियार, गोला-बारूद और सैन्य कलपुर्जों के निर्यात की अनुमति तत्काल रोकने की अपील की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने अब तक आर्म्स ट्रेड ट्रीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और न ही इसमें शामिल हुआ है।
नरेंद्र मोदी की इस्राइल के साथ निकटता और उसे समर्थन देने की आलोचना होती रही है। दुनिया भर में सवाल उठे हैं कि अमेरिका और इस्राइल की ईरान, फिलिस्तीन और लेबनान में कार्रवाइयों का लगातार विरोध हो रहा है लेकिन मोदी ने एक बार भी अमेरिका और इस्राइल के गैरकानूनी, अनैतिक हमलों की निंदा तक नहीं की।
मालूम हो कि 31 जुलाई 1921 को लंदन, इंग्लैंड में ब्रिटिश सेना के कर्नल हेरोल्ड सोलोमन के पुत्र पीटर बेन्सन (जन्म नाम पीटर जेम्स हेनरी सोलोमन) का जन्म हुआ और बड़े होकर सुप्रसिद्ध ब्रिटिश बैरिस्टर, मानवाधिकार कार्यकर्ता बने। विश्व के प्रमुख मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल (एआई) की स्थापना की। एमनेस्टी इंटरनेशनल 150 से अधिक देशों और क्षेत्रों में 10 मिलियन से अधिक लोगों का एक वैश्विक आंदोलन है जो मानवाधिकारों के हनन को समाप्त करने और राजनीतिक कैदियों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए अभियान चलाता है। पीटर बेन्सन ने अपने जीवन के अधिकांश समय सभी सम्मानों और पुरस्कारों को अस्वीकार किंतु 80 के दशक में अपने परिवार को खुश करने के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए प्राइड ऑफ ब्रिटेन अवार्ड स्वीकार किया।
Is India also responsible for the devastation in Palestine, Iran, and Lebanon? Amnesty International alleges India supplied weapons, ammunition, and components to Israel
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