
आजकल की फिल्मों में समाज, व्यवस्था, राजनीति और अर्थव्यवस्था आदि सामयिक मुद्दों पर बात नहीं होती। मोदी राज में अधिकांश लोग डरे हुए हैं, या तो चुप रहते हैं या अधिकतर सरकारी एजेंडे को बढ़ावा देने वाली फिल्में बना रहे हैं। अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म गवर्नर का ट्रेलर मुंबई में मंगलवार को लॉन्च आयोजित किया गया। बताया जाता है कि सच्ची घटनाओं से प्रेरित गवर्नर फिल्म 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म में मनोज बाजपेयी एक ऐसे गवर्नर की भूमिका निभा रहे हैं, जो देश को गंभीर आर्थिक संकट से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। ट्रेलर लॉन्च के दौरान बातचीत में मौजूदा आर्थिक हालात, खासकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट को लेकर भी सवाल पूछे गए। इस पर मनोज बाजपेयी ने बेहद संतुलित अंदाज में जवाब देते हुए आर्थिक नीतियों और विशेषज्ञ अधिकारियों की भूमिका पर अपनी राय रखी।
मनोज बाजपेयी ने रुपये की कमजोरी और आर्थिक फैसलों को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि किसी भी देश की आर्थिक दिशा तय करने में केवल राजनीतिक नेतृत्व ही नहीं, बल्कि विशेषज्ञ अधिकारी भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक नीतियों पर सबसे ज्यादा काम वे अधिकारी करते हैं, जिन्होंने पूरी जिंदगी अर्थशास्त्र को समझने और उसका अध्ययन करने में लगाई होती है। उनके अनुसार, सरकार अंतिम फैसला जरूर लेती है, लेकिन उसके पीछे विशेषज्ञों की सलाह और विश्लेषण अहम होता है। मनोज ने कहा, राजनेताओं से ज्यादा महत्वपूर्ण अधिकारी होते हैं। वही आर्थिक नीतियों पर गहराई से काम करते हैं। वे पूरी जिंदगी अर्थशास्त्र पढ़ते, समझते और उसका विश्लेषण करते हैं। सरकार उनके सुझावों को सुनती है और फिर तय करती है कि कौन-सा विकल्प देश के लिए सही रहेगा।
#ManojBajpayee की गवर्नर का विषय भारत के उस दौर से जुड़ा है, जब देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। मनोज बाजपेयी का किरदार भारत के पूर्व आरबीआई गवर्नर एस. वेंकटरमणन से प्रेरित बताया जा रहा है, जिन्होंने पिछली सदी के नौवें दशक में आर्थिक चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मनोज ने कहा कि फिल्म में उस समय लिए गए कई कठिन और साहसिक फैसलों को दिखाया गया है। उन्होंने बताया कि कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस दौर की आर्थिक चुनौतियों और उनसे निपटने की रणनीतियों की भी है। उनके मुताबिक, फिल्म में रुपये की कमजोरी, विदेशी मुद्रा संकट और सोने से जुड़े आर्थिक फैसलों जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से दिखाया गया है।
मनोज बाजपेयी ने बताया कि उस दौर में देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए कई जोखिम भरे फैसले लेने पड़े थे। उन्होंने पूर्व गवर्नर एस. वेंकटरमणन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय लिए गए निर्णय आसान नहीं थे, लेकिन वही आगे चलकर देश की आर्थिक स्थिरता के लिए अहम साबित हुए। उन्होंने कहा कि फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि कठिन परिस्थितियों में आर्थिक संस्थाओं और विशेषज्ञों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह ठीक है कि पुराना संदर्भ लेकर अर्थव्यवस्था पर बात की गई है, लेकिन सवाल इस दौर का है कि जबकि लाखों करोड़पति देश छोड़ चुके हैं, विदेशी निवेशक लाखों करोड़ डालर निकाल चुके हैं, करोड़ों छोटे, मझोले उद्योग धंधे तबाह हो चुके हैं, करीब आधी आबादी जीने लायक रोजगार से वंचित है, भारी आर्थिक असमानता है, रोजगार, नौकरियों का बहुत अभाव है। लोगों की जेब में पैसा न होने से कारोबार बेहद मंदा है, महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में जबकि मोदी सरकार के बड़े सहयोगी रहे लोग भी आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं तब वर्तमान की स्थितियों पर कौन बात करेगा ? सरकार आलोचकों को तरह-तरह से प्रताड़ित करती है, ऐसे में लोगों ने डर के मारे सेल्फ सेंसरशिप लागू की हुई है, लोग निजी बातचीत में भारत की दुर्दशा पर चर्चा तो करते हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से कहने और लिखने से बचते हैं। आखिर नौकरशाह सरकारों, अपने आकाओं की इच्छाओं के अनुरूप ही तो नीतियां बनाते और उसे लागू कराते हैं। इसलिए नौकरशाहों पर पूरी तरह देश की बदहाली की जिम्मेदारी डालना चालबाजी ही है। Weakness of the rupee and the poor state of the economy are due to the failure of experts. Manoj Bajpayee will be seen in the role of RBI Governor in the film Governor
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