रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) उत्तराखंड, 19 जून 2026 (दिनेश तिवारी, दलजीत सिंह)। ऊधम सिंह नगर जिला और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली हमेशा मजदूर विरोधी परिलक्षित होती रही है। वह श्रमिकों को न्याय दिलाने के बजाय श्रमिकों को प्रताड़ित करने में तत्पर रहा है। श्रमिक नेता दलजीत सिंह को झूठे मुकदमे लगाकर जिला बदर की कार्रवाई में लगे जिला प्रशासन के प्रयासों को मजदूरों की आवाज दबाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर के कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह के विरुद्ध ऊधमसिंह नगर जिला प्रशासन द्वारा गुंडा एक्ट की कार्यवाही शुरू करने ,उन्हें जिला बदर करने को दी गईं चेतावनी और अपरजिलाधिकारी प्रशासन रुद्रपुर के न्यायालय में शुरू किये जा रहे वाद संख्या -51ध्04 वर्ष 2026 के विरोध में श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर के तत्वावधान में विभिन्न ट्रेड यूनियनों, मजदूर व सामाजिक संगठनों का प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी और अपरजिलाधिकारी प्रशासन रुद्रपुर ऊधमसिंह नगर’ से मिला। प्रशासन की उक्त कार्यवाही की कड़ी निंदा करते हुए ज्ञापन सौंपा। श्रमिक नेता दलजीत सिंह के विरुद्ध की जा रहीं गुंडा एक्ट की कार्यवाही को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
जिला प्रशासन के अधिकारियों को ज्ञापन में कहा गया कि श्रमिक संयुक्त मोर्चे के कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह के विरुद्ध शुरू की गईं गुंडा एक्ट की कार्यवाही प्राकृतिक न्याय के सिद्धातों, माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड और जिला एवं सत्र न्यायालय रुद्रपुर के आदेशों की घोर अवमानना और अनदेखी है। उन्होंने तथ्यों के साथ यह बात रेखांकित की कि दलजीत सिंह को जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर द्वारा ’जिन चार मुकदमों को आधार बनाकर गुंडा एक्ट के आरोप में नोटिस भेजा है’ उनमें से एक मुकदमे में काफी समय पूर्व ही दोषमुक्त करके आदेश दिए जा चुके हैं। दूसरे मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा काफी समय पहले ही स्थगन आदेश देकर रोक लगा दी गईं है।’ किन्तु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंह नगर द्वारा इसके बावजूद भी सारी कानूनी मर्यादाओं और न्यायालयों के उपरोक्त दोनों आदेशों की घोर अवमानना और अनदेखी करके उक्त दोनों मुकदमों को भी अवैध व फर्जी रूप से अपनी रिपोर्ट में शामिल कर दिया गया है। जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर द्वारा एसएसपी की इस रिपोर्ट पर तत्काल संज्ञान लेकर नोटिस जारी करके अविधिक रूप से गुंडा एक्ट की कार्यवाही शुरू कर दी गईं। हकीकत यह भी है कि शेष दो मुकदमों पर भी जिला एवं सत्र न्यायालय, रुद्रपुर द्वारा दलजीत सिंह को जमानत’ दे गईं है। जिससे स्पष्ट है कि जिला प्रशासन की सारी कार्यवाही दूषित मंशा के तहत एक साजिश के तहत ही गईं है।
ज्ञापन में आगे कहा गया कि जिला प्रशासन द्वारा अपने उक्त नोटिस में कहा है कि दलजीत सिंह गुंडा है। उससे क्षेत्र की शांति को खतरा है। दूसरी ओर जिला प्रशासन द्वारा 11 मई 2026 को जारी किये गये अपने नोटिस को करीब एक माह बाद जून माह में दिया गया। जिससे स्पष्ट है कि जिला प्रशासन अपने उपरोक्त आरोप के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। उक्त नोटिस में यह चेतावनी दी गईं है की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा अपनी उक्त रिपोर्ट में दलजीत सिंह को ऊधमसिंह नगर जिले से बाहर निष्कासित करने की संस्तुति दी है। क्योंकि दलजीत सिंह ऊधमसिंह नगर जिले के पंतनगर सिडकुल स्थित इंटरार्क कम्पनी में 15-20 साल से नौकरी कर रहे हैं इसलिए उन्हें जिला बदर करने की कार्यवाही दलजीत सिंह और उनके बच्चों के सम्मानजनक रूप से जीवन जीने और रोजगार करने के संवैधानिक अधिकारों का घोर हनन है। संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 की घोर अवमानना है। पूर्णतः संविधान विरोधी कृत्य है।
दलजीत सिंह पर 4 और 8 वर्ष पूर्व इंटरार्क कंपनी के पीड़ित श्रमिकों के आंदोलन के समय साजिश के तहत दर्ज कराये गये हैं’। जिनमें दलजीत सिंह ने कोई भी आर्थिक व निजी लाभ प्राप्त नहीं किया। उनके विरुद्ध चोरी, डकैती, सम्पत्ति पर कब्जा करने, बाल-मानव -महिला व शराब आदि की तस्करी करने, हत्या -बलात्कार आदि किसी भी आरोप में कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं है। इसलिए आंदोलन के दौरान दर्ज उक्त फर्जी मुकदमों का हवाला देकर गुंडा एक्ट के तहत शुरू की गईं यह कार्यवाही सर्वथा अनुचित और असंवैधानिक है।
ज्ञापन में कहा गया कि क्योंकि हर साल जुलाई माह में इंटरार्क कम्पनी में वेतन समझौता सम्पन्न होता है’। इससे ठीक पहले जिला प्रशासन द्वारा जून माह में दलजीत सिंह को गुंडा एक्ट के आरोप में नोटिस दिया गया। जो इस ओर भी इशारा करता है कि जिला प्रशासन द्वारा कंपनी मालिक के साथ सांठगांठ करके ही वेतन समझौते से ध्यान भटकाने की साजिश’ के तहत ही यूनियन अध्यक्ष दलजीत सिंह के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्यवाही शुरू की गईं है।जो कि घोर निंदनीय है।
ज्ञापन के अनुसार, दलजीत सिंह क्षेत्र की आम जनता और मजदूर आबादी के बीच बहुत अधिक लोकप्रिय और सम्मानित व्यक्ति हैं। देश हित, समाज हित और जनहित में संचालित गतिविधियों में हमेशा सक्रिय रहते हैं। हमेशा लोगों की तत्परता से मदद करते हैं। अत्यंत सरल और मिलनसार हैं। उनके इन्हीं गुणों के कारण ऊधमसिंह नगर जिले की ट्रेड यूनियनों के साझा मंच श्रमिक संयुक्त मोर्चा -श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर में विगत कई वर्षो से लगातार कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर निर्वाचित किया गया है। ऐसे सम्मानित व्यक्ति को जिला प्रशासन द्वारा गुंडा एक्ट के तहत जारी किये गये उपरोक्त नोटिस में गुंडा में घोषित करते हुए, उनके खिलाफ जिस तरह की अभद्र और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया है वह अत्यंत आपत्तिजनक और निंदनीय है। समाज, देश और मानवता से प्रेम करने वाले सभी देशभक्त लोगों का अपमान है।
श्रमिक प्रतिनिधियों ने इसके पश्चात जिलाधिकारी व अपरजिलाधिकारी प्रशासन, रुद्रपुर से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए गुंडा एक्ट की उक्त कार्यवाही को तत्काल निरस्त करने की मांग की गईं। श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर के अध्यक्ष दिनेश तिवारी और कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह जी आदि ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन द्वारा दलजीत सिंह के विरुद्ध प्रारम्भ की गईं गुंडा एक्ट की उक्त कार्यवाही पर तत्काल रोक नहीं लगाई गईं तो चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को उत्तराखंड स्तर तक विस्तारित किया जायेगा। हरिद्वार सिडकुल के श्रमिक संयुक्त मोर्चे और सभी सामाजिक संगठनों को इससे जोड़कर इस असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण कार्यवाही के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जायेगा। जिसकी समस्त जिम्मेदारी उत्तराखंड सरकार,जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन की होगी।
प्रतिनिधिमंडल में श्रमिक संयुक्त मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी, कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह, प्रचार मंत्री हरेंद्र सिंह, सीएसटीयू के धीरज जोशी, इंकालबी मजदूर केंद्र के कैलाश भट्ट, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के शिवदेव सिंह, डॉल्फिन मजदूर संगठन के विश्वजीत सरकार, एल जी बी वर्कस यूनियन से बालम सिंह रावत, इंटरार्क मजदूर संगठन से उमेश प्रजापति, राणे मद्रास यूनियन से जगदीश चंद्र आदि साथी शामिल थे।
विज्ञप्ति जारीकर्ता, दिनेश तिवारी, दलजीत सिंह, अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष, श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर मो. 7248304024
19-06-2026 Rudrapur SIDCUL Labor organizations submitted a memorandum protesting the administration’s unlawful action of banishing labor leader Daljit Singh from the district under the Goonda Act, and warned of launching an agitation if their demands are not met
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