14 सितंबर 1901 को संयुक्त राज्य अमेरिका के 25वें राष्ट्रपति विलियम मैकिन्ले को उनके दूसरे कार्यकाल के छह महीने बाद 6 सितंबर को बफेलो, न्यूयॉर्क में संगीत के मंदिर में पैन-अमेरिकन प्रदर्शनी स्थल पर गोली मार दी गई। विलियम मैकिन्ले जनता से हाथ मिला रहे थे। जब एक अराजकतावादी लियोन कोजोलगोज ने उन्हें 2 गोलियां मारीं। 14 सितंबर को घावों के कारण हुए गैंग्रीन से मैकिन्ले की मृत्यु हो गई। वह 1865 में अब्राहम लिंकन और 1881 में जेम्स ए गारफील्ड के बाद हत्यारों के द्वारा मारे जाने वाले तीसरे अमेरिकी राष्ट्रपति थे। हत्यारा एक दक्षिणपंथी संगठन के विचारों से प्रभावित था। कहते हैं कि मैकिन्ले लगातार जनता से मिलते रहते थे। वे काले-गोरे, ऊंच-नीच इत्यादि की भावना के विरोधी थे। दक्षिणपंथी संगठन इसके खिलाफ था। अपने सदस्यों को यह सिखाता था कि गोरे लोगों को बहुत सी समस्याओं का सामना #WilliamMcKinley की नीतियों की वजह से करना पड़ता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के 25वें राष्ट्रपति, 1897 से 1901 में अपनी हत्या तक सेवारत रहे। रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य के रूप में, उन्होंने एक ऐसे पुनर्गठन का नेतृत्व किया जिसने दशकों तक औद्योगिक राज्यों और देश भर में रिपब्लिकन को बड़े पैमाने पर प्रभुत्व प्रदान किया।
यहां प्रस्तुत हैं विलियम मैकिन्ले के कुछ विचारणीय, अनुकरणीय, प्रेरक उद्धरण
एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में यही आशा कर सकता है, एक उदाहरण स्थापित करना, और मृत्यु के बाद, इतिहास के लिए प्रेरणा बनना।
सबसे कठिन हार के समय, जीत सबसे निकट हो सकती है।
अमेरिकी ध्वज विदेशी धरती पर अधिक क्षेत्र हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि मानवता के लिए फहराया गया है।
अपने कानून बनाने की स्वतंत्रता हमें अपने कानूनों को तोड़ने की स्वतंत्रता या लाइसेंस नहीं देती है!
युद्ध तब तक नहीं शुरू किया जाना चाहिए जब तक कि शांति का हर साधन विफल न हो जाए।
मजबूत दिल और मददगार हाथों की जरूरत होती है, और सौभाग्य से, हमारे प्यारे देश के हर हिस्से में ये मौजूद हैं।
आधे-अधूरे मन से कभी कोई लड़ाई नहीं जीती जा सकती।
प्रगति का मार्ग कभी आसान नहीं होता। नई चीजें करना अक्सर मुश्किल होता है। हमारे पूर्वजों ने भी ऐसा ही पाया था। हम भी ऐसा ही पाते हैं। लेकिन क्या हम प्रयास और त्याग के कारण बेहतर नहीं बनते?
हमारा विश्वास सिखाता है कि हमारे पूर्वजों के ईश्वर पर भरोसा करने से ज्यादा सुरक्षित कोई और विकल्प नहीं है, जिन्होंने हर राष्ट्रीय परीक्षा में अमेरिकी लोगों का इतना खघस तौर पर साथ दिया है और जो हमें तब तक नहीं छोड़ेंगे जब तक हम उनकी आज्ञाओं का पालन करते हैं और उनके पदचिन्हों पर विनम्रता से चलते हैं।
मैं अमेरिका के पक्ष में हूँ क्योंकि अमेरिका आम लोगों के लिए है।
हम इस अद्भुत ग्रंथ का जितना गहराई से अध्ययन करेंगे, और इसके दिव्य उपदेशों का जितना बारीकी से पालन करेंगे, उतने ही बेहतर नागरिक बनेंगे और एक राष्ट्र के रूप में हमारा भाग्य उतना ही ऊँचा होगा।
स्वतंत्र व्यक्ति ज्यादा देर तक अज्ञानी नहीं रह सकता।
इस देश के लोग एक ऐसी औद्योगिक नीति चाहते हैं जो अमेरिका और अमेरिकियों के लिए हो।
हम युद्ध केवल शांति स्थापित करने के लिए करते हैं। हम किसी और इरादे से युद्ध में नहीं गए। हम जहाँ भी जाते हैं, राष्ट्रीय विवेक को अपने साथ लेकर चलते हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका का मिशन परोपकारी आत्मसातीकरण का है।
सरकार के लिए अपनी साख बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है कि वह जैसे-तैसे भुगतान करे, ऋण लेकर नहीं, बल्कि ऋण से दूर रहकर- बाहरी या आंतरिक, या दोनों प्रकार की कराधान प्रणाली द्वारा सुरक्षित पर्याप्त आय के माध्यम से।
अमेरिकी लोग, जो अपने देश में स्वतंत्रता में दृढ़ हैं, जहाँ भी जाते हैं, अपने साथ स्वतंत्रता के प्रति प्रेम ले जाते हैं। -विलियम मैकिन्ले
Inspiring, thought-provoking quote by the 25th U.S. President, William McKinley
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