न्यूक्वे, कॉर्नवाल, इंग्लैंड में 19 सितंबर 1911 को विलियम जेराल्ड गोल्डिंग का जन्म हुआ। विलियम गोल्डिंग जाने माने ब्रिटिश उपन्यासकार, नाटककार और कवि बने। अपने पहले उपन्यास लॉर्ड ऑफ द फ्लाइज के लिए मशहूर गोल्डिंग ने अपने जीवनकाल में 1 दर्जन अन्य फिक्शन किताबें लिखीं। #WilliamGolding को राइट्स ऑफ पैसेज के लिए बुकर पुरस्कार मिला, यह उनकी समुद्री ट्रिलॉजी टू द एंड्स ऑफ द अर्थ का पहला उपन्यास था। गोल्डिंग को 1983 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया। साहित्य में उनके योगदान के कारण, गोल्डिंग को 1988 में नाइट की उपाधि दी गई। वे रॉयल सोसाइटी ऑफ लिटरेचर के फेलो भी नियुक्त किए गए। 2008 में द टाइम्स ने 1945 के बाद के 50 सबसे महान ब्रिटिश लेखकों की सूची में गोल्डिंग को तीसरा स्थान दिया।
यहां पेश हैं विलियम गोल्डिंग के कुछ विचारणीय उद्धरण
उसे इस जिंदगी की थकान का एहसास हुआ, जहाँ हर रास्ता अचानक तय करना पड़ता था और जागते हुए समय का एक बड़ा हिस्सा बस अपने पैरों को देखते हुए गुजरता था।
मेरा कल मेरे साथ चलता है। वे मेरे साथ कदम से कदम मिलाते हैं, वे ऐसे चेहरे हैं जो मेरे कंधे पर से झांकते हैं।
बात यह है डर आपको सपने से ज्यादा नुकसान नहीं पहुँचा सकता।
हमने वही सब किया जो बड़े लोग करते हैं। क्या गलत हुआ?
पिगी ने कहा, मुझे उससे डर लगता है, और इसीलिए मैं उसे जानता हूँ। जब आप किसी से डरते हैं, तो आप उससे नफरत करते हैं, लेकिन उसके बारे में सोचना बंद नहीं कर पाते। आप खुद को यकीन दिलाते हैं कि वह असल में ठीक-ठाक है, और फिर जब आप उसे दोबारा देखते हैं तो यह अस्थमा जैसा लगता है और आप साँस नहीं ले पाते।
मेरा मानना है कि इंसान अपनी ही फितरत के बारे में बहुत कम जानता है। मैं अपनी बात इस यकीन के साथ कहता हूँ कि शायद यह सच के करीब हो।
मुझे लगता है कि औरतें बेवकूफी करती हैं जब वे मर्दों के बराबर होने का दिखावा करती हैं। वे कहीं ज्यादा बेहतर हैं और हमेशा से रही हैं। आप औरत को जो भी देंगे, वह उसे और बेहतर बना देगी। अगर आप उसे स्पर्म देंगे, तो वह आपको बच्चा देगी। अगर आप उसे मकान देंगे, तो वह आपको घर देगी। अगर आप उसे राशन देंगे, तो वह आपको खाना देगी। अगर आप उसे मुस्कान देंगे, तो वह आपको अपना दिल दे देगी। उसे जो भी मिलता है, वह उसे कई गुना बढ़ा देती है। इसलिए अगर आप उसे कोई बकवास देंगे, तो ढेर सारी गंदगी झेलने के लिए तैयार रहिए! -विलियम गोल्डिंग
सबसे अच्छे विचार सबसे सरल होते हैं।
यह सोचना कि जानवर ऐसा कुछ था जिसे तुम शिकार कर सको और मार सको! तुम जानते थे, है ना? मैं तुम्हारा हिस्सा हूँ? बहुत करीब, बहुत करीब! मैं इस बात की वजह हूँ कि सब कुछ वैसा ही क्यों है?
हम कौन हैं? इंसान? या जानवर? या जंगली?
अगर चेहरे ऊपर या नीचे से रोशनी में अलग दिखते थे, तो चेहरा क्या था? कुछ भी क्या था?
दुनिया, वह समझ में आने वाली और नियमों वाली दुनिया, गायब हो रही थी।
मास्क अपने आप में एक चीज थी, जिसके पीछे जैक शर्म और आत्म-चेतना से मुक्त होकर छिप गया।
वे साथ-साथ चले, अनुभव और भावना के दो महाद्वीप जो एक-दूसरे से बात नहीं कर पाए।
इस कहानी के इतने सारे मतलब निकाले गए हैं कि मैं उनमें से किसी एक को नहीं चुनूंगा। आप खुद तय करें। ये अलग-अलग राय एक-दूसरे से अलग हैं। असल में जो बात मायने रखती है, या कहानी का जो मतलब सबसे जरूरी है अगर आप कोई मतलब चाहते हैं तो वह आपका अपना मतलब है। न आपके टीचर का, न आपके प्रोफेसर का, न मेरा, न किसी आलोचक का और न ही किसी अधिकारी का। सबसे जरूरी बात यह है कि पहले आप कहानी का अनुभव करें, उसे महसूस करें। उसके बाद आप जो भी मतलब निकालना चाहें, निकालें। अगर वह आपका अपना मतलब है, तो वही सही है क्योंकि किताब में वह नहीं होता जो लेखक ने सोचा था कि उसने उसमें डाला है, बल्कि वह होता है जो पाठक उससे समझता है।
मैं स्वभाव से आशावादी हूँ और बौद्धिक रूप से निराशावादी। -विलियम गोल्डिंग
Who are we? Humans? Or animals? Or savages? Thought-provoking quotes by the Nobel Prize-winning British novelist, playwright, and poet William Golding
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