ये बंदे, बंदगी कर के भी बंदे बन नहीं सकते और हम मयखाने से निकलते हैं खुदा बन कर, प्रखर अंग्रेजी पत्रकार, संपादक, राजनयिक, टिप्पणीकार खुशवंत सिंह के विचार
ये बंदे, बंदगी कर के भी बंदे बन नहीं सकते और हम मयखाने से निकलते हैं खुदा बन कर खुशवंत सिंह का शेर उन लोगों पर कटाक्ष है जो धर्म…

