
14 अक्टूबर 1888 को वेलिंगटन, न्यूजीलैंड में कैथरीन मैन्सफील्ड (कैथलीन मैन्सफील्ड मरे, ब्यूचैंप) का जन्म हुआ। कैथरीन मैन्सफील्ड न्यूजीलैंड की चर्चित लेखिका, आलोचक आधुनिकतावादी आंदोलन में अहम हस्ती बनीं। कैथरीन मैन्सफील्ड की रचनाएँ दुनिया भर में मशहूर हैं और कई दर्जन भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वेलिंगटन के थॉर्नडन इलाके में टिनाकोरी रोड पर एक घर में जन्मीं, पली-बढ़ीं मैन्सफील्ड, ब्यूचैंप परिवार की तीसरी संतान थीं। कैथरीन मैन्सफील्ड अपनी बहनों के साथ करोरी में स्कूल जाना शुरू किया और बाद में वेलिंगटन गर्ल्स कॉलेज गईं। ब्यूचैंप बहनें बाद में प्रतिष्ठित फिट्जहर्बर्ट टेरेस स्कूल चली गईं, जहाँ मैन्सफील्ड की दोस्ती माटा महुपुकु से हुई, वह उनके शुरुआती काम के लिए प्रेरणा बनीं और जिनके साथ उनका गहरा रिश्ता माना जाता है। मैन्सफील्ड ने अपने ही नाम के एक रूप कैथरीन मैन्सफील्ड के तहत लघु कथाएँ और कविताएँ लिखीं, जिनमें चिंता, कामुकता, ईसाई धर्म और अस्तित्ववाद के साथ-साथ न्यूजीलैंड की उभरती पहचान को भी दिखाया गया। 19 साल की उम्र में कैथरीन मैन्सफील्ड ने न्यूजीलैंड छोड़ दिया और इंग्लैंड में बस गईं, जहाँ वे विख्यात लेखक डी. एच. लॉरेंस, वर्जीनिया वूल्फ, लेडी ओटोलिन मोरेल और ब्लूम्सबरी ग्रुप से जुड़े अन्य लोगों की दोस्त बनीं। 1917 में मैन्सफील्ड को पल्मोनरी टीबी (फेफड़ों की तपेदिक) का पता चला और 34 साल की उम्र में फ्रांस में उनकी मृत्यु हो गई। कैथरीन मैन्सफील्ड को अनेक सम्मान और पुरस्कार मिले। अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने 1960 में अपनी लघु कथाओं के संग्रह अ मूवेबल फीस्ट में #KatherineMansfield के काम की तुलना नियर बीयर (कम अल्कोहल वाली बीयर) से की थी।
यहां प्रस्तुत हैं कैथरीन मैन्सफील्ड के कुछ प्रेरक, विचारणीय उद्धरण
मुझे महान लेखकों की सभी रचनाओं में, खासकर उनके बिना एडिट किए गए पत्रों में, खुद की कोई झलक, कोई निशान मिलता है, कोई समानता, खुद का कोई हिस्सा, जैसे अंधेरे शीशे में मेरे अपने हाथों की हजारों परछाइयाँ हों।
जिंदगी में हम जो कुछ भी सच में अपनाते हैं, उसमें बदलाव आता है। इसलिए दुख को प्यार में बदल जाना चाहिए। यही रहस्य है।
दूसरों की राय या उनकी बातों की परवाह न करें। दुनिया का सबसे मुश्किल काम करें जो आपके लिए हो। अपने लिए काम करें। सच का सामना करें। तुम्हारे लिए मेरे मन में जो भावनाएँ हैं, उन्हें शब्दों में नहीं बताया जा सकता या तो वे जोर से चीखती हैं या फिर दर्दनाक खामोशी में डूबी रहती हैं, लेकिन मैं वादा करती हूँ, ये भावनाएँ शब्दों से कहीं बढ़कर हैं। ये दुनिया से भी बढ़कर हैं। मैं वादा करती हूँ।
उसमें हमेशा एक जादुई बच्चे जैसा अंदाज होता था, जैसे वह हमेशा किसी पार्टी में शामिल हो रही हो।
हमारे प्यार की वजह से पूरी दुनिया हमारी होगी।
मैं गरीब हूँ गुमनाम हूँ, सिर्फ अठारह साल की हूँ, हर चीज पाने की जबरदस्त चाहत रखती हूँ और मेरे उसूल उतने ही हल्के हैं जितनी मेरी जेब।
मुझे बस इसी जिंदगी की परवाह है, लिखना, कभी-कभी बाहर जाना और चीजों को देखते-सुनते हुए खुद को खो देना और फिर वापस आकर दोबारा लिखना। खैर, मैंने यही जिंदगी चुनी है।
ओह, चीजें कितनी तेजी से बदल गईं! खुशी हमेशा क्यों नहीं रही? हमेशा का समय कुछ ज्यादा लंबा भी तो नहीं था।
जिंदगी में हम जिस भी चीज को सच में अपनाते हैं, उसमें बदलाव आता है। इसलिए दुख को प्यार में बदल जाना चाहिए। यही तो रहस्य है।
सूरज उगते देखा। खुबानी के रंग जैसा प्यारा आसमान, जिसमें आग की लपटें जैसी झलक थी और फिर गहरा गुलाबी रंग। हे भगवान, कितना खूबसूरत सूरज उगते देखने के बाद आज मेरा मन प्यार से भरा हुआ है।
उसकी हर बात प्यारी थी, शहद जैसी हल्की पीली। अगर उसके सुनहरे बालों के उलझाव में कोई मधुमक्खी फंसी दिखती, तो आपको हैरानी नहीं होती।
मैं पहले एक लेखिका हूँ और बाद में एक औरत।
सोना उसकी नई खोज थी। यह कितना शानदार है। बस आँखें बंद कर लो, बस इतना ही। यह कितना सुखद है।
जब आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहते हैं जो आपकी ही तरह किताबें पढ़ता है, तो पढ़ने का मजा दोगुना हो जाता है।
जिस मन को मैं पसंद करती हूँ, उसमें कुछ जंगलीपन या खुलापन होना चाहिए।
वाह, उन लोगों के साथ रहने में कितनी खुशी मिलती है जो खुश हैं, हाथ मिलाना, गालों को छूना, आँखों में देखकर मुस्कुराना।
जीवन का यह नियम बना लें कि कभी पछतावा न करें और कभी पीछे मुड़कर न देखें। पछतावा ऊर्जा की भारी बर्बादी है आप उस पर कुछ भी नहीं बना सकते, यह केवल दुख में डूबे रहने के काम आता है।
जिस मन को मैं पसंद करती हूँ, उसमें कुछ जंगलीपन होना चाहिए, एक उलझा हुआ बगीचा जहाँ घनी घास में गहरे रंग के आलूबुखारे गिरते हों, एक छोटा सा घना जंगल, जहाँ एक-दो साँप मिलने की संभावना हो, एक ऐसा तालाब जिसकी गहराई का किसी को पता न हो और मन द्वारा लगाए गए फूलों से सजे रास्ते हों।
आपके लिए जो मैं महसूस करती हूँ, उसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता यह या तो जोर से चिल्लाता है या दर्दनाक रूप से चुप रहता है, लेकिन मैं वादा करती हूँ, यह शब्दों से कहीं बढ़कर है। यह दुनिया से भी बढ़कर है।
मुझे हमेशा लगा कि दोस्ती का सबसे बड़ा विशेषाधिकार, राहत और सुकून यही है कि इसमें किसी चीज को समझाने की जरूरत नहीं पड़ती।
मुझे जिंदगी से बहुत प्यार है। मूर्ख लोग और उनकी बेवकूफियाँ क्या मायने रखती हैं? वे मायने तो रखती हैं, लेकिन किसी तरह वे मेरे लिए जिंदगी के असली स्वरूप को छू नहीं सकतीं। जिंदगी अद्भुत है। मैं इसमें गहराई से जुड़ी रहना चाहती हूँ जीना चाहती हूँ विस्तार करना चाहती हूँ इसमें साँस लेना चाहती हूँ खुशियाँ मनाना चाहती हूँ इसे साझा करना चाहती हूँ। प्यार देना और प्यार माँगा जाना।
अगर हम अपना नजरिया बदल लें, तो न केवल हम जिंदगी को अलग तरह से देखेंगे, बल्कि जिंदगी खुद भी अलग हो जाएगी। जिंदगी का रूप बदल जाएगा क्योंकि हमने खुद अपना नजरिया बदल लिया होगा।
जिस मन को मैं सबसे ज्यादा पसंद करती हूँ, उसमें कुछ जंगलीपन होना चाहिए, एक उलझा हुआ बगीचा जहाँ घनी घास में गहरे रंग के आलूबुखारे गिरते हों, एक छोटा सा घना जंगल, जहाँ एक-दो साँप मिलने की संभावना हो, एक ऐसा तालाब जिसकी गहराई का किसी को पता न हो, और मन द्वारा लगाए गए फूलों से सजे रास्ते हों।
आप मेरे बारे में कभी उत्सुक नहीं रहे आपने कभी मेरी आत्मा को जानने की कोशिश नहीं की।
मैं आपके साथ एक दोस्त जैसा व्यवहार कर रही हूँ, आपसे अपनी वर्तमान कमियों को साझा करने के लिए कह रही हूँ, इस उम्मीद में कि मैं आपसे अपने भविष्य की खुशियों को भी साझा कर सकूँगी। क्या जिंदगी वह हकलाते हुए बोली, क्या जिंदगी लेकिन वह जिंदगी क्या थी, यह वह समझा नहीं पाई। कोई बात नहीं। वह अच्छी तरह समझ गया। है ना, डार्लिंग? लॉरी ने कहा।
मैंने खुद को एक ऐसी टैक्सी में अनंत काल की यात्रा करते हुए देखा, जिस पर समय का कोई असर नहीं होता।
यह कोई चिट्ठी नहीं है, बल्कि बस कुछ पल के लिए तुम्हें अपनी बाहों में भरने जैसा है।
मैंने अपनी जिंदगी का यह उसूल बना लिया है कि कभी पछतावा नहीं करना और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना। पछतावा ऊर्जा की बहुत बड़ी बर्बादी है आप उस पर कुछ बना नहीं सकते वह तो बस उसी में डूबे रहने के काम आता है।
जब हम अपनी नाकामियों को गंभीरता से लेना छोड़ देते हैं, तो इसका मतलब है कि हम उनसे डरना बंद कर रहे हैं।
क्या आप हर तरह की जिंदगी आजमाना नहीं चाहेंगी एक जिंदगी तो बहुत छोटी होती है लेकिन लिखने का यही तो मजा है आप कई लोगों का रूप धर सकती हैं।
मुझे उन टेलीग्राम से बहुत डर लगता है जिनमें पूछा जाता है कि मैं कैसी हूँ!! मेरा तो हमेशा मन करता है कि जवाब दूँ मर गई हूँ।
मेरे साथ क्या हो रहा है? क्या मैं सच में कोई नहीं हूँ, बस हद से ज्यादा घमंडी हूँ? मुझे नहीं पता लेकिन मैं बहुत ज्यादा दुखी हूँ। बस यही बात है। मैं इतनी दुखी हूँ कि काश मैं मर गई होती फिर भी, जब मैंने अभी तक ठीक से जिया ही नहीं है, तो मरना पागलपन होगा।
आप क्या कर सकते हैं जब आप तीस साल के हों और अपनी ही गली के मोड़ पर अचानक आपको खुशी का एकदम परमानंद का एहसास हो? जैसे आपने देर दोपहर की धूप का कोई चमकीला टुकड़ा निगल लिया हो और वह आपके सीने में जल रहा हो, और उसकी चिंगारियाँ आपके शरीर के हर कण, हर उंगली और पैर के अंगूठे तक फैल रही हों?
अभी मैं एकांत में रहती हूँ और लिखने-पढ़ने के अलावा कुछ नहीं करती।
अकेले रहना बहुत बुरी बात है हाँ, है सच में है लेकिन अपना मुखौटा तब तक मत उतारना जब तक कि उसके नीचे दूसरा मुखौटा तैयार न हो चाहे वह कितना भी डरावना क्यों न हो पर मुखौटा जरूर हो।
जिंदा रहना और लेखक होना ही काफी है।
मुझे लगता है कि मैं हमेशा से लिखती रही हूँ। हालाँकि, वह सब बकवास ही होता था। लेकिन कुछ न लिखने से कहीं बेहतर है कि बकवास ही सही, पर कुछ तो लिखा जाए।
मैं ऐसी जिंदगी जीना चाहती हूँ जिसमें मैं अपने हाथों, अपनी भावनाओं और अपने दिमाग से काम करूँ। मुझे एक बगीचा, एक छोटा सा घर, घास, जानवर, किताबें, तस्वीरें और संगीत चाहिए। और इन्हीं चीजों से प्रेरित होकर, इन्हीं को जाहिर करते हुए मैं लिखना चाहती हूँ (भले ही मैं कैब चलाने वालों के बारे में लिखूँ, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता)। लेकिन एक गर्मजोशी भरी, उत्साहपूर्ण और जीवंत जिंदगी जिंदगी से गहराई से जुड़ी हुई जिसमें सीखना, चाहना, महसूस करना, सोचना और काम करना शामिल हो। मुझे बस यही चाहिए। इससे कम कुछ भी नहीं। और मुझे इसी के लिए कोशिश करनी है।
अरे, चेखोव! तुम क्यों मर गए? मैं तुमसे देर शाम किसी बड़े से, थोड़े अंधेरे वाले कमरे में क्यों बात नहीं कर सकती जहाँ बाहर लहराते पेड़ों की वजह से हरी रोशनी आ रही हो? मैं स्वर्ग पर एक सीरीज लिखना चाहूँगी और वह उनमें से एक होगा।
सच तो यह है कि उपन्यासों का हर सच्चा प्रशंसक इस सुखद ख्याल को संजोकर रखता है कि लिखी हुई बातों के बीच छिपे अर्थ को समझकर वह अकेला ही उस लेखक का गुप्त मित्र बन गया है।
वह कितनी खूबसूरत लग रही थी, लेकिन उसे देखने वाला कोई नहीं था, कोई भी नहीं।
डर को स्वीकार करना ही विफलता को जन्म देना है।
बाहर आसमान तारों की रोशनी से जगमगा रहा है।
आज शाम सूर्यास्त के लिए आसमान खुल गया। जब मुझे लगा कि दिन खत्म हो चुका है, तभी स्वर्गीय चमकती पंखुड़ियों की एक बौछार सी हुई।
उसे लगा कि वह इस बात में सचमुच माहिर हो गई है कि कैसे ऐसे सुना जाए जैसे वह सुन ही नहीं रही हो और कैसे लोगों के बीच बस एक पल के लिए बैठा जाए जबकि वे उसके आस-पास बातें कर रहे हों।
खुद पर हँसना सीखना बहुत जरूरी है। -कैथरीन मैन्सफील्ड
Everything we truly embrace in life undergoes change. Quote by Katherine Mansfield, a New Zealand writer, critic, and key figure of the modernist movement
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