वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सनक और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बहकावे में आकर ईरान के खिलाफ अनैतिक, गैरकानूनी युद्ध तो शुरु कर दिया, ईरान का काफी नुक्सान भी कर दिया लेकिन ईरान से ज्यादा अमेरिका का नुक्सान हो चुका है और यह युद्ध अमेरिका को बहुत भारी पड़ गया है। इस बर्बर कृत्य से सारी दुनिया अलग परेशान है। अब युद्ध से बाहर निकलना भी अमेरिका के लिए मुश्किल पड़ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव को लेकर वॉशिंगटन में अब युद्ध को आगे बढ़ाने के बजाय उससे बाहर निकलने की रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। बताया जाता है कि अमेरिका को एहसास हो गया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में उसके विकल्प बेहद सीमित रह गए हैं। ऐसे में अमेरिकी प्रशासन अब ऐसा रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहा है, जिससे संघर्ष से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकला जा सके। रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू होने के बाद अमेरिका ने कई सैन्य विकल्पों का इस्तेमाल किया, लेकिन अब आगे की कार्रवाई से अपेक्षित परिणाम हासिल होने की संभावना कम दिखाई दे रही है।
बीते कुछ दिनों में जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई प्रमुख सलाहकारों के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि ईरान के साथ टकराव को और बढ़ाने वाले सैन्य विकल्प उल्टा असर डाल सकते हैं। केन का आकलन बताया जा रहा है कि केवल हवाई शक्ति के इस्तेमाल से ट्रंप द्वारा निर्धारित सभी सैन्य और रणनीतिक लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में संघर्ष को लंबा खींचने के बजाय इससे बाहर निकलने के विकल्पों पर विचार करना जरूरी है। जनरल केन ने युद्ध से बाहर निकलने की संभावनाओं पर ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अलग-अलग बातचीत की है। इनमें सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हैं। इन चर्चाओं का उद्देश्य केवल युद्ध समाप्त करने की संभावनाओं पर विचार करना नहीं था, बल्कि अलग-अलग सरकारी और सैन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय कायम करना भी था। बताया गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ होने वाली बैठकों से पहले सैन्य विकल्पों, उनकी सीमाओं और उनसे जुड़े जोखिमों को लेकर प्रशासन के प्रमुख लोगों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की जा रही है।
अमेरिका के सैन्य नेतृत्व की चर्चा में एक अहम बात यह भी सामने आई है कि ईरान में जमीनी सैनिक उतारना जरूरी नहीं माना जा रहा। जनरल केन की ओर से कथित तौर पर सैन्य विकल्पों की सीमाओं और संभावित जोखिमों को रेखांकित किया गया है। अमेरिकी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सैन्य दबाव बनाए रखने और संघर्ष को अनियंत्रित रूप से बढ़ने से रोकने के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए। इसी वजह से युद्ध के संभावित अंत और उससे बाहर निकलने के रास्तों पर विचार किया जा रहा है।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ हमले शुरू होने के बाद संघर्ष को करीब पांच महीने हो चुके हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि युद्ध की शुरुआत में जिन उद्देश्यों और दावों को लेकर अभियान शुरू किया गया था, उन्हें हासिल करने में अमेरिका और इजरायल को अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। ऐसे में अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी की ओर से कथित तौर पर यह आकलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इस संघर्ष का कोई आसान सैन्य समाधान नहीं है। युद्ध को आगे बढ़ाने से मिलने वाले संभावित लाभ और उससे पैदा होने वाले जोखिमों के बीच संतुलन अब अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है। जनरल डैन केन राष्ट्रपति ट्रंप के सामने सैन्य विकल्पों के संभावित नुकसान और सीमाओं को रखते समय सावधानी बरत रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चेयरमैन बनने के बाद से केन ने राष्ट्रपति तक अपनी सैन्य आकलन सीधे और नियमित रूप से पहुंचाने की कोशिश की है। बताया गया है कि उन्होंने व्हाइट हाउस में अपने लिए कार्यालय की व्यवस्था कराने की भी कोशिश की, ताकि राष्ट्रपति को लगातार स्थिति की जानकारी दी जा सके। अब अगर युद्ध से बाहर निकलने की रणनीति अमेरिकी नीति का हिस्सा बनती है, तो यह ट्रंप प्रशासन के लिए सैन्य कार्रवाई से कूटनीतिक समाधान की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।
US Military Faces Setback Against Iran; Efforts Underway to Persuade Trump to End Conflict—War Yields Only Losses, No Gains