23 मई 2012 को डफोर्ड, ओरेगन में प्रसिद्ध अमेरिकी सांस्कृतिक, साहित्यिक इतिहासकार, लेखक, आलोचक और विश्वविद्यालय प्रोफेसर पॉल फुसेल जूनियर (जन्म 22 मार्च 1924, पासाडेना, कैलिफोर्निया) निधन हुआ। पॉल फुसेल के लेखन में विभिन्न विषयों को शामिल किया गया है, जिसमें अठारहवीं सदी के अंग्रेजी साहित्य पर विद्वतापूर्ण कार्यों से लेकर अमेरिका की वर्ग व्यवस्था पर टिप्पणियाँ व्यापक रूप से शामिल हैं। फुसेल ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 103वीं इन्फैंट्री डिवीजन में सेवा दी और फ्रांस में लड़ाई के दौरान घायल हो गए। अमेरिका लौटने के बाद फुसेल ने बड़े पैमाने पर लेखन कार्य किया और रटगर्स विश्वविद्यालय और पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय सहित कई शिक्षण पदों पर कार्य किया। पॉल फुसेल को मुख्य रूप से प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के बारे में उनकी लेखनी के लिए जाना जाता है जिसमें उन्होंने उस अंतर को दर्शाया है जो उनके अनुसार युद्ध के बारे में बनी रोमांटिक कहानियों और उसकी असलियत के बीच मौजूद थी। उन्होंने इस असलियत को छिपाने या उसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से इनकार करने को ही अपना पेशा बना लिया।
चिकनशिट (कायरतापूर्ण हरकत) को तुरंत पहचाना जा सकता है, क्योंकि इसका युद्ध जीतने से कोई लेना-देना नहीं होता।
मध्यम वर्ग के लोग घुमावदार शब्दों का सहारा इसलिए नहीं लेते कि वे तथ्यों से बचने में मददगार होते हैं, बल्कि वे उन्हें इसलिए भी पसंद करते हैं क्योंकि ये उनकी सामाजिक दिखावे की चाहत को पूरा करने में सहायक होते हैं। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि ज्यादातर घुमावदार शब्दों में बोलने वाले को ज्यादा शब्दांश इस्तेमाल करने की छूट मिल जाती है, और मध्यम वर्ग के लोग शब्दों की इस भारी-भरकम संख्या को ही उनका महत्व और मूल्य मान बैठते हैं।
मेरी जानकारी में दुनिया में अमेरिकी ही एकमात्र ऐसे लोग हैं जिनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर चिंता उन्हें अपनी कारों की पिछली खिड़कियों पर अपने कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नाम या लोगो लगाकर दिखाने के लिए उकसाती है।
आप जिस खेल को देखते हैं, उसमें शारीरिक टकराव जितना ज्यादा हिंसक होगा, वह खेल उतना ही निचले तबके का माना जाएगा।
अमेरिका में किसी व्यक्ति के सामाजिक वर्ग को मापने का एक कमोबेश सटीक पैमाना उसके टीवी का आकार है, आपका टीवी जितना बड़ा होगा, आप उतने ही निचले सामाजिक वर्ग के माने जाएँगे।
खोज-यात्रा का संबंध पुनर्जागरण काल से है, आम यात्रा का संबंध बुर्जुआ युग से, और पर्यटन का संबंध हमारे मौजूदा सर्वहारा युग से है। खोजकर्ता उन चीजों की तलाश करता है जो अभी तक खोजी नहीं गई हैं यात्री उन चीजों को देखता है जिन्हें इतिहास के प्रवाह में मानव-मस्तिष्क द्वारा पहले ही खोजा जा चुका है, जबकि पर्यटक उन चीजों का अनुभव करता है जिन्हें व्यावसायिक सूझ-बूझ के जरिए खोजा गया है और बड़े पैमाने पर किए गए प्रचार-प्रसार के माध्यम से उसके लिए तैयार किया गया है। जहाँ एक ओर खोजकर्ता अनजानी और अस्पष्ट चीजों से जुड़े जोखिमों की ओर बढ़ता है, वहीं दूसरी ओर पर्यटक पूरी तरह से घिसी-पिटी और जानी-पहचानी चीजों की सुरक्षा की ओर उन्मुख होता है। यात्री इन्हीं दोनों ध्रुवों के बीच अपना संतुलन बनाता है।
जिन लोगों ने युद्ध लड़ा है, वे अपने बारे में एक ऐसा राज जानते हैं जो बिल्कुल भी सुखद नहीं है। उन्होंने गुपचुप तरीके से और निजी तौर पर अपने भीतर छिपी उस स्वाभाविक मानवीय प्रवृत्ति का अनुभव किया है जो उन्हें क्रूरता और परपीड़कता की ओर धकेलती है… मैंने न केवल किसी के गले में पीछे से पियानो के तार का फंदा डालकर उसे मारना सीखा, बल्कि मैंने इस तरह से किसी की जान लेने के विचार का आनंद लेना भी सीख लिया।
इस प्रकार, अपनी जवानी को पीछे छोड़कर आगे बढ़ जाने का सारा दुख और विडंबना, यात्रा के हर आनंदमय पल में ही निहित होती है, यात्री यह भली-भांति जानता है कि यात्रा के उस पहले आनंद को दोबारा कभी नहीं पाया जा सकता, इसलिए एक समझदार यात्री अपनी पिछली सफलताओं को दोहराने के बजाय, हर बार नई-नई जगहों पर जाने का प्रयास करता है।
इस लिहाज से, अपने सबसे सच्चे रूप में यात्रा करना एक विरोधाभासी अनुभव है, और सबसे बेहतरीन यात्री वे ही माने जाते हैं जो एक ही समय पर अपने मन में दो या तीन परस्पर विरोधी विचारों को एक साथ सँजोकर रखने की क्षमता रखते हैं। या जो खुद को एक ही समय में गंभीर व्यक्ति और जोकर मान सकें।
युद्ध आम नागरिकों के समाज को उतना ही नुकसान पहुँचाते हैं, जितना वे दुश्मन को पहुँचाते हैं। सैनिक कभी भी इस सदमे से उबर नहीं पाते।
अगर मेरे पास लिखने का सहारा न होता, तो मैं सड़कों पर दौड़ता हुआ लोगों के चेहरों पर ग्रेनेड फेंक रहा होता।
जिसे कोई प्रकाशित नहीं करवाना चाहता, वही असली पत्रकारिता है, बाकी सब तो बस प्रचार है।
हम जिस सब कुछ अच्छा है वाली दुनिया में रहते हैं, उसमें जो कोई भी अप्रिय तथ्यों की ओर ध्यान दिलाता है, उसे अक्सर एक चिड़चिड़ा या बदमिजाज व्यक्ति मान लिया जाता है।
अगर हम मर्दानगी की परिभाषा को फिर से तय नहीं करते, तो युद्ध होना तय है।
जो कोई भी अपनी यात्राओं के बारे में बताता है, वह जरूर झूठा होगा, क्योंकि अगर कोई यात्री अपनी कहानी को कल्पना की भावना और तकनीकों के साथ पेश नहीं करता, तो कोई भी उसे सुनना नहीं चाहेगा। पर्यटन के विकास से पहले, यात्रा को एक तरह की पढ़ाई माना जाता था, और इसके परिणामों को मन की शोभा बढ़ाने वाला और निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करने वाला माना जाता था।
यात्री सिर्फ विदेशी रीति-रिवाज, अनोखे खान-पान, अनजान मान्यताएँ और शासन के नए तरीके ही नहीं सीखते। अगर वे किस्मत वाले होते हैं, तो वे विनम्रता भी सीखते हैं।
व्यंग्य आशा का साथी है, और आशा का ईंधन है मासूमियत।
अतीत को समझने के लिए यह दिखावा करना पड़ता है कि आप वर्तमान के बारे में कुछ नहीं जानते। इसके लिए जरूरी है कि आप अतीत के दबाव को अपनी नब्जों में महसूस करें, बिना किसी बाद की जानकारी या रोशनी के।
जिन्होंने युद्ध लड़ा है, वे अपने बारे में एक राज जानते हैं, और वह राज कुछ बहुत अच्छा नहीं है।
बेहतरीन दर्जे के खेलों में इस्तेमाल होने वाली गेंदें, आम तौर पर दूसरे खेलों में इस्तेमाल होने वाली गेंदों से छोटी होती हैं।
युद्ध के बारे में सबसे बुरी बात थीकृबस बैठे रहना और यह सोचते रहना कि आप नैतिक रूप से क्या कर रहे हैं।
पर्यटन की माँग है कि आप जानी-पहचानी चीजों को देखें, और उन्हें भी एक पारंपरिक या तय तरीके से ही देखें।
मुझे आशावाद से ज्यादा निराशाजनक और कुछ नहीं लगता।
खोज-यात्राओं का संबंध पुनर्जागरण काल घ्घ्से है, आम यात्राओं का संबंध बुर्जुआ युग से, और पर्यटन का संबंध हमारे आज के आम लोगों के दौर से है। -पॉल फुसेल
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