17 अक्टूबर 1813 को जर्मनी के रीडस्टैड में जॉर्जे बुचनर (कार्ल जॉर्जे बुचनर) का जन्म हुआ। जॉर्जे बुचनर जर्मन नाटककार और कवि-लेखक बने। उन्हें यंग जर्मनी आंदोलन का हिस्सा और क्रांतिकारी भी थे। जॉर्जे बुचनर चिकित्सक तथा दार्शनिक लुडविग बुचनर (फ्रेडरिक कार्ल क्रिश्चियन लुडविग बुचनर, जाने माने जर्मन दार्शनिक, शरीर विज्ञानी और चिकित्सक, 19वीं सदी के वैज्ञानिक भौतिकवाद के प्रमुख समर्थकों में से एक) के भाई थे। 23 साल की छोटी उम्र में जॉर्जे बुचनर का हो जाने के कारण उनका साहित्यिक काम सीमित रहा फिर भी जर्मनी में उनके काम को बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। #GeorgBüchner के नाटकों ने नेचुरलिज्म (यथार्थवाद), एक्सप्रेशनिज्म (अभिव्यंजनावाद) और बाद में यूरोपीय थिएटर के विकास पर गहरा प्रभाव डाला। 21 साल की उम्र में बुचनर ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर द हेसियन कूरियर नाम का एक पर्चा लिखा था। इसे द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो (कम्युनिस्ट घोषणापत्र) से पहले 19वीं सदी का सबसे क्रांतिकारी घोषणापत्र माना जाता है। 1870 के दशक तक जर्मनी में लोग बुचनर को लगभग भुला चुके थे किंतु तभी कार्ल एमिल फ्रांजोस ने उनके कार्यों का संपादन किया। इन्हीं कार्यों ने नेचुरलिज्म और एक्सप्रेशनिज्म आंदोलनों पर बड़ा प्रभाव डाला। आर्नोल्ड ज्विग ने लेंज (बुचनर की एकमात्र गद्य कथा-कृति) को आधुनिक यूरोपीय गद्य की शुरुआत बताया है। वॉयजेक नाटक कई रूपांतरणों का आधार बना, इनमें अल्बान बर्ग का प्रसिद्ध एटोनल ओपेरा वोजेक (जिसका प्रीमियर 1925 में हुआ था) और वर्नर हर्जोग की 1979 की फिल्म वॉयजेक शामिल हैं। जर्मनी में 12वीं कक्षा के छात्रों के पाठ्यक्रम में वॉयजेक को शामिल किया गया है। जर्मनी में हर साल जॉर्ज बुचनर पुरस्कार दिया जाता है, जिसकी शुरुआत 1923 में हुई थी।
यहां प्रस्तुत हैं जॉर्जे बुचनर के कुछ विचारणीय उद्धरण
हमने क्रांति नहीं की है, बल्कि क्रांति ने हमें बनाया है।
हत्या वहाँ से शुरू होती है जहाँ आत्मरक्षा खत्म होती है।
अमीरों का जीवन एक लंबे रविवार की तरह होता है।
हर व्यक्ति के भीतर के अनूठे सार तक पहुँचने के लिए इंसानियत से प्यार करना जरूरी है, कोई भी व्यक्ति इतना नीच या बदसूरत नहीं हो सकता कि वह प्यार के लायक न हो। -जॉर्जे बुचनर
किसी कुलीन व्यक्ति की साँसें, आजादी की अंतिम आह (मौत की आहट) होती हैं।
जो कोई क्रांति को आधा-अधूरा छोड़ देता है, वह अपनी कब्र खुद खोदता है।
हम हमेशा एक मंच पर होते हैं, यहाँ तक कि तब भी, जब अंत में हमें सचमुच छुरा घोंप दिया जाता है।
जनता की शक्ति और तर्क की शक्ति एक ही हैं।
इंसान एक गहरी खाई की तरह है, जब मैं उसमें नीचे झाँकता हूँ, तो मुझे चक्कर आने लगते हैं।
सर्वोच्च सत्ता सभी लोगों या बहुमत की इच्छा में निहित होती है।
आसमान में तारे ऐसे बिखरे हुए हैं जैसे चमकते हुए आँसू जिस आँख से ये गिरे होंगे, उसमें कितना गहरा दर्द रहा होगा!
झोपड़ियों में शांति हो! महलों के खिलाफ जंग हो!
सरकार एक ऐसे पारदर्शी लिबास की तरह होनी चाहिए जो लोगों के शरीर से कसकर चिपका रहे।
मानवता की चाल बहुत धीमी होती है, इसे सदियों में ही मापा जा सकता है।
थकी हुई आँखों के लिए हर रोशनी बहुत तेज होती है, थके हुए होंठों के लिए हर साँस बहुत भारी होती है, और थके हुए कानों के लिए हर शब्द बहुत ज्यादा लगता है।
एक अच्छा इंसान, जिसका जमीर साफ हो, वह इतनी तेजी से नहीं चलता।
यह दुनिया अराजकता है। शून्यता ही इस दुनिया का वह ईश्वर है जिसका अभी जन्म होना बाकी है।
क्रांति शनि देव की तरह है, जो अपनी ही संतानों को खा जाती है।
हम जैसे लोग इस दुनिया में भी दुखी रहते हैं और अगली दुनिया में भी। अगर हम स्वर्ग पहुँच गए, तो शायद हमें वहाँ गरज पैदा करने में मदद करनी पड़ेगी।
मौत सबसे सुखद सपना है।
सिर्फ एक ही चीज कायम रहती है, एक अनंत सुंदरता, जो एक रूप से दूसरे रूप में जाती है, हमेशा बदलती रहती है और हर बार नए रूप में सामने आती है।
तुम औरतें तो किसी को झूठ बोलकर भी अपने प्यार में फँसा सकती हो।
यह एक बहुत लंबा शब्द है, हमेशा के लिए!
अपने आस-पास देखो! सब कुछ सख्त, कठोर और अँधेरा है, इन सबके नीचे क्या छिपा है? कुछ ऐसा जिसे हम समझ नहीं पाते। ईश्वर जा चुके हैं। सब कुछ खत्म हो गया है।
हम जैसे गरीब लोग, हाँ, पैसा, बस पैसा। देखिए कैप्टन, अगर आपके पास पैसा न हो, तो इस दुनिया में सिर्फ उसूलों के सहारे मुझ जैसे इंसान को पालकर तो दिखाइए। इंसान भी तो हाड़-मांस का बना होता है।
जरा धीरे, वॉयजेक, थोड़ा धीरे चलो। एक-एक करके काम करो। तुम्हारे इस तरह भागने से तो मुझे चक्कर आने लगते हैं। इस तरह जल्दबाजी करके जो दस मिनट तुम बचाते हो, उनका मैं क्या करूँ? मेरे किस काम के हैं वे? जरा सोचो, वॉयजेक, अभी तुम्हारे पास पूरे तीस साल बचे हैं। तीस साल! यानी तीन सौ साठ महीने .. और फिर दिन, घंटे और मिनट भी तो हैं! इतने सारे समय का तुम क्या करोगे, बताओ? थोड़ा आराम से चलो, वॉयजेक।
अगर हम स्वर्ग गए, तो कैप्टन, वे हमसे गरज पैदा करने का काम करवाएंगे।
सृष्टि इतनी फैल गई है कि कहीं कोई खाली जगह नहीं बची। हर तरफ हलचल है, सब कुछ उबल रहा है। शून्यता ने खुद को ही नष्ट कर लिया है, सृष्टि उसका घाव है, हम उसके खून की बूंदें हैं, और यह दुनिया वह कब्र है जिसमें वह सड़ रही है।
शून्यता ने खुद को खत्म कर लिया है, सृष्टि उसका घाव है, हम उसके खून की बूंदें हैं, और यह दुनिया वह कब्र है जिसमें वह धीरे-धीरे सड़ रही है। -जॉर्जे बुचनर
Peace to the huts! War against the palaces! — Thought-provoking quote by Georg Büchner, German playwright, poet, writer, and revolutionary
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