
27 अप्रैल 1759 को स्पिटलफील्ड्स, लंदन में मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट का जन्म हुआ। मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट विख्यात अंग्रेज लेखिका और दार्शनिक बनीं। 18वीं सदी में मुख्य रूप से महिलाओं के अधिकारों की वकालत के लिए जानी गईं। मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट ने 18वीं, 19वीं 20वीं सदी करोड़ों महिलाओं को अपने अधिकार हासिल करने के लिए संघर्ष के लिए प्रेरित किया। उनकी लेखन की तुलना में महिला अधिकारों के लिए अधिक ध्यान मिला। वोलस्टोनक्राफ्ट को नारीवादी दर्शन की संस्थापकों में से एक माना जाता है, नारीवादी अक्सर उनके जीवन और उनके कार्यों, दोनों को अपने लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत के रूप में उद्धृत करते हैं। अपने संक्षिप्त करियर के दौरान मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट ने उपन्यास, शोध-निबंध, यात्रा-वृत्तांत, फ्रांसीसी क्रांति का इतिहास, एक आचार-संहिता पुस्तक और बच्चों के लिए एक पुस्तक लिखी। वोलस्टोनक्राफ्ट मुख्य रूप से अपनी कृति अ विन्डिकेशन ऑफ द राइट्स ऑफ वुमन (1792) के लिए जानी जाती हैं, जिसमें उन्होंने यह तर्क दिया है कि महिलाएं स्वाभाविक रूप से पुरुषों से हीन नहीं होतीं, बल्कि वे केवल इसलिए हीन प्रतीत होती हैं क्योंकि उनमें शिक्षा का अभाव होता है। मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट सुझाव देती हैं कि पुरुषों और महिलाओं के साथ तर्कशील प्राणियों जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए, वह एक ऐसे सामाजिक ताने-बाने की कल्पना करती हैं जो तर्क-बुद्धि पर आधारित हो। यहां पेश हैं मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट के कुछ प्रेरणादायक, विचारणीय, अनुकरणीय उद्धरण
मैं यह नहीं चाहती कि महिलाओं को पुरुषों पर अधिकार मिले, बल्कि मैं चाहती हूँ कि उन्हें स्वयं पर अधिकार मिले।
महिलाओं के मस्तिष्क का विस्तार करके उसे सशक्त बनाइए और फिर अंधानुकरण या आँख मूँदकर आज्ञापालन करने का सिलसिला समाप्त हो जाएगा।
पुरुषों के बीच जितनी अधिक समानता स्थापित होगी, समाज में सद्गुण और सुख का उतना ही अधिक साम्राज्य होगा।
महिलाओं को भी अधिकारों में हिस्सेदारी दीजिए, और वे पुरुषों के सद्गुणों का ही अनुकरण करेंगी क्योंकि जब वे बंधन-मुक्त होंगी, तो वे निश्चित रूप से और भी अधिक परिपूर्ण बनेंगी।
केवल वही शिक्षा, जिसे हम जोर देकर मस्तिष्क का परिष्कार कह सकते हैं, वास्तव में उस शिक्षा की हकदार है जो युवाओं को यह सिखाती है कि उन्हें सोचना कैसे शुरू करना है।
किसी भी नई शुरुआत का सही समय हमेशा आज ही होता है।
महिलाएं पुरुषों पर अधिकार नहीं चाहतीं वे तो केवल स्वयं पर अधिकार चाहती हैं।
जब हम किसी बात को गहराई से महसूस करते हैं, तो हम उस पर अत्यंत गहनता से विचार-विमर्श भी करते हैं।
इस संसार में जिस चीज का अभाव है, वह दान-दक्षिणा नहीं, बल्कि न्याय है।
बचपन से ही यह सिखाए जाने के कारण कि सौंदर्य ही नारी का राजदंड है, उसका मस्तिष्क अपने शरीर के अनुरूप ही ढल जाता है और फिर वह अपने उस सुनहरे पिंजरेश्(शरीर) के इर्द-गिर्द ही भटकती रहती है, तथा केवल अपने उस कारागार को सजाने-सँवारने में ही लगी रहती है।
सद्गुणों का विकास केवल उन्हीं लोगों के बीच हो सकता है जो एक-दूसरे के समान (बराबर) हों।
कोई भी मनुष्य किसी बुराई को इसलिए नहीं चुनता कि वह बुराई है, बल्कि वह तो उसे ही सुख या भलाई समझ बैठता है, जिसकी उसे वास्तव में तलाश होती है। सामान्यतः पुरुष अपनी बुद्धि का इस्तेमाल पूर्वाग्रहों को खत्म करने के बजाय उन्हें सही ठहराने के लिए करते हैं।
महिलाओं को जान-बूझकर नीचा दिखाया जाता है, जब उन्हें वे छोटी-मोटी तवज्जो मिलती है जिसे पुरुष अपनी मर्दानगी समझते हैं, जबकि असल में, पुरुष अपमानजनक तरीके से अपनी ही श्रेष्ठता साबित कर रहे होते हैं।
पुरुषों और महिलाओं की शिक्षा काफी हद तक उस समाज की राय और तौर-तरीकों से तय होती है जिसमें वे रहते हैं।
जिस मन के पास सहारा लेने के लिए सिर्फ पूर्वाग्रह हों, वह हमेशा अस्थिर रहेगा।
जीवन को एक तटस्थ दर्शक की नजर से नहीं देखा जा सकता।
प्रेम अपने स्वभाव से ही क्षणभंगुर होता है। कोई ऐसा राज खोजना जो इसे स्थायी बना दे, उतना ही बेतुका है जितना कि पारस पत्थर या सर्व-रोग नाशक दवा की खोज करना और अगर ऐसा कोई राज मिल भी जाए, तो वह उतना ही बेकार, या बल्कि मानवता के लिए नुकसानदेह ही साबित होगा। समाज का सबसे पवित्र बंधन दोस्ती है।
जिस मन के पास सहारा लेने के लिए सिर्फ पूर्वाग्रह हों, वह हमेशा अस्थिर रहेगा और जब उस मन की गति को रोकने के लिए कोई बाधा नहीं होगी, तो वह विनाशकारी रूप से उग्र हो उठेगा।
अगर हम इतिहास पर नजर डालें, तो हम पाएँगे कि जिन महिलाओं ने अपनी अलग पहचान बनाई है, वे न तो अपनी जाति की सबसे सुंदर महिलाएँ थीं और न ही सबसे सौम्य।
दोस्ती एक गंभीर भावना है, सभी भावनाओं में सबसे श्रेष्ठ, क्योंकि यह सिद्धांतों पर आधारित होती है और समय के साथ और भी मजबूत होती जाती है।
जब गरीबी को बुराई से भी ज्यादा शर्मनाक माना जाता है, तो क्या नैतिकता को गहरी चोट नहीं पहुँचती?
जो लोग अपनी सोच रखते हैं, उनकी आवाज में किसी भी सरकार से कहीं ज्यादा ताकत होती है, भले ही वह सरकार इंसानी अक्ल से बनी कितनी भी बेहतरीन क्यों न हो, और जो भी सरकार इस पवित्र सत्य से अनजान रहेगी, वह किसी न किसी दिन अचानक ही सत्ता से बेदखल हो जाएगी।
मैंने हमेशा से आजादी को जीवन का सबसे बड़ा वरदान और हर सद्गुण का आधार माना है, और मैं अपनी जरूरतें कम करके हमेशा अपनी आजादी को सुरक्षित रखूँगी, भले ही मुझे किसी बंजर और वीरान जगह पर ही क्यों न रहना पड़े।
अच्छी और समझदारी भरी किताबें हमारे मन को विशाल बनाती हैं और हमारे दिल को बेहतर बनाती हैं। -मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट
कृपया हमारी Hindi News Website : https://www.peoplesfriend.in देखिए, अपने सुझाव दीजिए ! धन्यवाद !
प्रेस / मीडिया विशेष – आप अपने समाचार, विज्ञापन, रचनाएं छपवाने, समाचार पत्र, पत्रिका पंजीयन, सोशल मीडिया, समाचार वेबसाइट, यूट्यूब चैनल, कंटेंट राइटिंग इत्यादि प्रेस/मीडिया विषयक कार्यों हेतु व्हाट्सऐप 9411175848 पर संपर्क करें।

