3 सितंबर 1940 को मोंटेवीडियो, उरुग्वे में एडुआर्डो गैलियानो (एडुआर्डो जर्मन मारिया ह्यूजेस गैलियानो) का जन्म हुआ। एडुआर्डो गैलियानो काफी चर्चित और प्रतिष्ठित उरुग्वियन पत्रकार, लेखक और उपन्यासकार बने। उन्हें लैटिन अमेरिकी वामपंथ की बड़ी साहित्यिक हस्ती और वैश्विक फुटबॉल जगत के सबसे प्रमुख लेखक के तौर पर जाना जाता है। एडुआर्डो गैलियानो की सबसे मशहूर रचनाएँ हैं – लास वेनास अबिएर्तास डे अमेरिका लैटिना (ओपन वेन्स ऑफ लैटिन अमेरिका, 1971) और मेमोरिया डेल फुएगो (मेमोरी ऑफ फायर, 1982दृ86)। लेखक एडुआर्डो गैलियानो ने खुद के बारे में एक बार कहा था, मैं एक ऐसा लेखक हूँ जिसे याद रखने का जुनून है, अमेरिका और खासकर लैटिन अमेरिका के अतीत को याद रखने का, एक ऐसी जमीन जो अपनी यादें खो देने (एम्नीशिया) के अभिशाप से जूझ रही है। लेखिका इसाबेल अलेंदे (जिन्होंने कहा था कि 1973 में ऑगस्टो पिनोशे के मिलिट्री तख्तापलट के बाद चिली से भागते समय गैलियानो की किताब की उनकी कॉपी उन कुछ चीजों में से एक थी जिन्हें वे साथ ले गई थीं) ने ओपन वेन्स ऑफ लैटिन अमेरिका को बारीक विवरण, राजनीतिक सोच, काव्यात्मक अंदाज और बेहतरीन कहानी कहने की कला का मिश्रण बताया।
#EduardoGaleano गैलियानो ने अप्रैल 2014 में द्वितीय बिएनल ब्रासिल डो लिव्रो ई दा लेइतुरा को दिए एक इंटरव्यू में एडुआर्डो गैलियानो ने लास वेनास अबिएर्तास डी अमेरिका लैटिना की लेखन शैली के कुछ पहलुओं पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा, समय बीत चुका है, मैंने दूसरी चीजें आजमाना शुरू कर दिया है, ताकि मैं आमतौर पर इंसानी हकीकत और खासतौर पर पॉलिटिकल इकॉनमी (राजनीतिक अर्थव्यवस्था) के करीब आ सकूं। ओपन वेन्स एक पॉलिटिकल इकॉनमी की किताब बनने की कोशिश थी, लेकिन मेरे पास इसके लिए जरूरी जानकारी नहीं थी। मुझे इसे लिखने का कोई अफसोस नहीं है, लेकिन यह एक ऐसा दौर था जिसे मैं अब पीछे छोड़ चुका हूँ।
गैलियानो के काम की आलोचना करने वाले कई लोगों ने इस इंटरव्यू का जिक्र किया और अपनी आलोचनाओं को मजबूत करने के लिए उनके इस बयान का इस्तेमाल किया। यद्यपि जॉर्ज माजफुड के साथ एक इंटरव्यू में एडुआर्डो गैलियानो ने कहा, बहुत पहले लिखी गई यह किताब आज भी जिंदा और असरदार है। मैं बस इतनी ईमानदारी से यह मान सकता हूँ कि जिंदगी के इस पड़ाव पर मुझे अपनी पुरानी लेखन शैली थोड़ी बोझिल लगती है, और इसमें खुद को पहचानना मेरे लिए मुश्किल है क्योंकि अब मैं कम शब्दों में और आजाद ढंग से लिखना पसंद करता हूँ। मेरे और ओपन वेन्स ऑफ लैटिन अमेरिका के खिलाफ जो आवाजें उठी हैं, वे बुरी नीयत से भरी हुई हैं। गैलियानो फुटबॉल के प्रशंसक थे और उन्होंने इस पर फुटबॉल इन सन एंड शैडोश् (एल फुटबोल ए सोल वाई सोम्ब्रा) जैसी बेहतरीन किताब लिखी। एडुआर्डो गैलियानो की मौत के बाद एसबी नेशन के लिए एक लेख में फुटबॉल लेखक एंडी थॉमस ने इस किताब (जो इस खेल का इतिहास होने के साथ-साथ लेखक के अपने अनुभवों और राजनीतिक विचारों को भी सामने लाती है) को फुटबॉल पर लिखी गई अब तक की सबसे बेहतरीन किताबों में से एक बताया।
यहां पेश हैं एडुआर्डो गैलियानो के प्रेरक, मनोरंजक, विचारणीय उद्धरण
मैं चैरिटी (दान-पुण्य) में यकीन नहीं रखता। मैं एकजुटता में यकीन रखता हूँ। चैरिटी ऊपर से नीचे की ओर चलती है। एकजुटता बराबरी का रिश्ता है। यह दूसरे व्यक्ति का सम्मान करती है। मुझे दूसरों से बहुत कुछ सीखना है।
चर्च कहता है, शरीर पाप है।
विज्ञान कहता है, शरीर एक मशीन है।
विज्ञापन कहता है, शरीर एक बिजनेस है।
शरीर कहता है, मैं एक उत्सव हूँ।
हम सब तब तक नश्वर हैं जब तक पहली किस और वाइन का दूसरा गिलास नहीं मिल जाता।
आदर्श दुनिया (यूटोपिया) क्षितिज पर होती है, जब मैं दो कदम पास जाता हूँ,, तो वह दो कदम पीछे हट जाती है। अगर मैं दस कदम आगे बढ़ता हूँ, तो वह तेजी से दस कदम आगे खिसक जाती है।
मैं चाहे कितना भी दूर जाऊँ, मैं कभी वहाँ नहीं पहुँच सकता। तो फिर, यूटोपिया का मकसद क्या है? इसका मकसद हमें आगे बढ़ाना है।
मुझे समय बचाने में कोई खास दिलचस्पी नहीं है, मैं उसका आनंद लेना पसंद करता हूँ।
हर इंसान अपनी रोशनी से चमकता है। कोई भी दो लौ एक जैसी नहीं होतीं। बड़ी लौ होती हैं और छोटी लौ, हर रंग की लौ। कुछ लोगों की लौ इतनी स्थिर होती है कि हवा में भी नहीं हिलती, जबकि दूसरों की लौ इतनी बेकाबू होती है कि हवा में चिंगारियाँ भर देती हैं। कुछ बेवकूफ लौ न तो जलती हैं और न ही रोशनी देती हैं, लेकिन दूसरी लौ जीवन की ऊर्जा से इतनी तेज जलती हैं कि आप बिना पलक झपकाए उन्हें देख नहीं सकते, और अगर आप उनके पास जाएँ तो आप भी उस आग में चमकने लगते हैं।
मुझे नींद नहीं आ रही। मेरी पलकों के बीच एक औरत फँसी हुई है। अगर मैं कह पाता तो उससे बाहर निकलने को कहता। लेकिन मेरे गले में भी एक औरत फँसी हुई है।
मैंने कभी किसी की हत्या नहीं की, यह सच है, लेकिन ऐसा इसलिए है क्योंकि मुझमें हिम्मत या समय की कमी थी, न कि इसलिए कि मुझमें इच्छा की कमी थी।
1492 में मूल निवासियों को पता चला कि वे इंडियन हैं, उन्हें पता चला कि वे अमेरिका में रहते हैं, उन्हें पता चला कि वे नग्न हैं, उन्हें पता चला कि पाप का अस्तित्व है, उन्हें पता चला कि उन्हें किसी दूसरी दुनिया के राजा और राज्य और किसी दूसरे आसमान के भगवान के प्रति वफादार रहना है और यह कि इसी भगवान ने गुनाह और कपड़ों का आविष्कार किया था और उन लोगों को जिंदा जलाने का आदेश दिया था जो सूरज, चाँद, धरती और उसे भिगोने वाली बारिश की पूजा करते थे।
जब आवाज सच्ची होती है, जब वह बोलने की जरूरत से पैदा होती है, तो कोई भी इंसान की आवाज को रोक नहीं सकता। जब मुँह से बोलने की इजाजत नहीं होती, तो वह हाथों या आँखों, या शरीर के रोम-रोम, या किसी भी चीज से अपनी बात कहती है। क्योंकि हममें से हर किसी के पास दूसरों से कहने के लिए कुछ न कुछ होता है, कुछ ऐसा जिसे दूसरे सराहें या जिसके लिए माफ करें।
दूसरों की जीत में हमारी हार हमेशा छिपी होती थी, हमारी दौलत ने हमेशा दूसरों, साम्राज्यों और उनके स्थानीय देखरेख करने वालों की समृद्धि को बढ़ाकर हमारी गरीबी को जन्म दिया है। औपनिवेशिक और नव-औपनिवेशिक जादू में, सोना कबाड़ में और खाना जहर में बदल जाता है।
दीवारें ही गरीबों की प्रकाशक होती हैं।
सिर्फ बेवकूफ ही सोचते हैं कि खामोशी खालीपन है। कभी-कभी अपनी बात कहने के लिए चुप रहना ही बेहतर होता है।
हवा से प्यार करने वाले नाविकों के लिए, यादें सफर शुरू करने का एक अच्छा बंदरगाह होती हैं।
दुनिया के बड़े बैंकर, जो पैसे का आतंक फैलाते हैं, राजाओं और फील्ड मार्शल से भी ज्यादा ताकतवर होते हैं, यहाँ तक कि रोम के पोप से भी ज्यादा। वे कभी अपने हाथ गंदे नहीं करते। वे किसी को नहीं मारते, वे बस तमाशा देखकर तालियाँ बजाते हैं।
अगर अतीत के पास वर्तमान से कहने के लिए कुछ नहीं है, तो इतिहास उस अलमारी में आराम से सोता रह सकता है जहाँ सिस्टम अपने पुराने भेष रखता है। एडुआर्डो गैलियानो
वे हमसे फूल छीन सकते हैं, लेकिन कभी भी वसंत नहीं।
नोबडीज (जिनका कोई वजूद नहीं)
पिस्सू खुद के लिए कुत्ता खरीदने का सपना देखते हैं, और नोबडीज (आम लोग जिनका कोई नाम-निशान नहीं) गरीबी से भागने का सपना देखते हैं, कि एक जादुई दिन अचानक उन पर किस्मत की बारिश होगी, जोरदार बारिश। लेकिन किस्मत की बारिश कल, आज, कल या कभी नहीं होती। किस्मत की हल्की फुहार भी नहीं पड़ती, चाहे नोबडीज उसे कितना भी बुलाएँ, चाहे उनके बाएँ हाथ में खुजली हो, या वे नए दिन की शुरुआत दाहिने पैर से करें, या नए साल की शुरुआत झाड़ू बदलकर करें। नोबडीज, किसी के बच्चे नहीं, किसी चीज के मालिक नहीं। नोबडीज, जिनका कोई वजूद नहीं, खरगोशों की तरह भागते हुए, जिंदगी भर मरते हुए, हर तरह से बर्बाद होते हुए। जो अभी नहीं हैं, लेकिन हो सकते हैं। जो भाषाएँ नहीं, बल्कि बोलियाँ बोलते हैं। जिनके पास धर्म नहीं, बल्कि अंधविश्वास हैं। जो कला नहीं, बल्कि हस्तशिल्प बनाते हैं। जिनके पास संस्कृति नहीं, बल्कि लोक-परंपराएँ हैं। जो इंसान नहीं, बल्कि ह्यूमन रिसोर्स (मानव संसाधन) हैं। जिनके चेहरे नहीं, बल्कि हाथ हैं। जिनके नाम नहीं, बल्कि नंबर हैं। जो दुनिया के इतिहास में नहीं, बल्कि स्थानीय अखबार की पुलिस रिपोर्ट में दिखते हैं।
वे आम लोग जिनकी जान लेने वाली गोली भी उन पर खर्च करने लायक नहीं होती। -एडुआर्डो गैलियानो (ओपन वेन्स ऑफ लैटिन अमेरिका फाइव सेंचुरीज ऑफ द पिलेज ऑफ ए कॉन्टिनेंट)
Inspiring, entertaining, and thought-provoking quotes by Uruguayan journalist, football writer, and novelist Eduardo Galeano