
31 अगस्त 1908 को फ्रेस्नो, कैलिफोर्निया में विलियम सारोयन का जन्म हुआ। अर्मेनियाई मूल के विलियम सारोयन प्रसिद्ध अमेरिकी उपन्यासकार, नाटककार, कथाकार और लेखक बने। उन्हें 1940 में नाटक के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला और 1943 में फिल्म द ह्यूमन कॉमेडी के लिए सर्वश्रेष्ठ कहानी का अकादमी पुरस्कार मिला। जब स्टूडियो ने उनके मूल 240-पृष्ठ के ट्रीटमेंट को अस्वीकार कर दिया, तो उन्होंने इसे द ह्यूमन कॉमेडी नामक उपन्यास में बदल दिया। सारोयन ने कैलिफोर्निया में अर्मेनियाई आप्रवासियों के जीवन के बारे में विस्तार से लिखा। उनकी कई कहानियाँ और नाटक उनके गृहनगर फ्रेस्नो पर आधारित हैं। उनकी कुछ सबसे प्रसिद्ध कृतियाँ, द टाइम ऑफ योर लाइफ, माई नेम इज आराम और माई हार्ट्स इन द हाइलैंड्स इत्यादि हैं। 1930 के दशक में उनकी कहानियों के दो संग्रह – इनहेल एक्सहेल (1936) और द डेरिंग यंग मैन ऑन द फ्लाइंग ट्रैपेज (1934) को उनकी प्रमुख उपलब्धियों और संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी तट के उस दौर के सांस्कृतिक इतिहास के महत्वपूर्ण दस्तावेजों के रूप में माना जाता है। डिकिंसन कॉलेज की एक समाचार विज्ञप्ति में #WilliamSaroyan को 20वीं सदी के मध्य के सबसे प्रमुख साहित्यिक व्यक्तित्वों में से एक बताया गया है और स्टीफन फ्राई ने उन्हें ख्20वीं, सदी के सबसे कम आंके गए लेखकों में से एक कहा है। फ्राई का कहना है कि वे स्वाभाविक रूप से हेमिंग्वे, स्टीनबेक और विलियम फॉल्कनर के साथ अपनी जगह बनाते हैं। कर्ट वोनगुट ने कहा है कि सारोयान सभी अमेरिकी न्यूनतमवादियों में पहले और अभी भी महानतम थे
जब हँसो, तो जी-भरकर हँसो। और जब गुस्सा आए, तो खूब गुस्सा करो। जिंदादिल बने रहो। मरने के बाद तो वैसे भी हमेशा के लिए शांत हो ही जाना है।
सबसे बड़ी खुशी यह जानना है कि आपको खुशी की जरूरत नहीं है।
खुद जैसा बने रहने के लिए बहुत अभ्यास की जरूरत होती है।
मुझे नहीं पता कि लेखक क्या बनाता है, लेकिन शायद खुशी तो नहीं।
मैं हर चीज की इतनी परवाह करता हूँ कि असल में किसी चीज की परवाह नहीं करता।
हर किसी को मरना है, लेकिन मुझे हमेशा लगता था कि मेरे मामले में कोई अपवाद होगा।
वह थोड़ा रोई, लेकिन सिर्फ मन ही मन, क्योंकि उसने बहुत पहले तय कर लिया था कि उसे रोना पसंद नहीं है, क्योंकि अगर आप एक बार रोना शुरू करते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे रोने के लिए इतनी सारी बातें हैं कि आप रुक ही नहीं पाएँगे, और उसे यह बिल्कुल पसंद नहीं था।
याद रखो कि हर इंसान तुम्हारा ही एक रूप है।
तुम्हें बेरहम नहीं होना चाहिए, खासकर तब जब तुम सही हो।
मैं ज्यादा देर तक नफरत नहीं कर सकता। यह इसके लायक नहीं है।
हमेशा याद रखो कि तुम्हारे पास जो कुछ भी है, उसे बाँटो। यहाँ तक कि नासमझी में भी बाँटो। दिल खोलकर बाँटो। जो भी तुम्हारी जिंदगी में आए, उसे कुछ न कुछ दो। तब कोई भी चीज या कोई भी इंसान तुम्हें ठग नहीं पाएगा, क्योंकि अगर तुम किसी चोर को कुछ देते हो, तो वह तुमसे चोरी नहीं कर सकता, और तब वह खुद चोर नहीं रह जाता। और जितना ज्यादा तुम बाँटोगे, उतना ही ज्यादा तुम्हारे पास बाँटने के लिए होगा।
अच्छे लोग इसलिए अच्छे होते हैं क्योंकि उन्होंने नाकामियों से समझदारी सीखी है। सफलता से हमें बहुत कम समझदारी मिलती है, पता है न?
हमने कुछ नहीं कहा क्योंकि कहने के लिए बहुत कुछ था, और उसे कहने के लिए कोई भाषा नहीं थी।
हर किताब जिंदगी या उसके किसी हिस्से को और खूबसूरत बना सकती है।
पढ़ना, सीखना, सवाल करना, सोचना-विचारना, खोजना, आविष्कार करना, सुधारना, बहाल करना, सँजोना, बनाना और देना, ये सब अर्मेनियाई लोगों की फितरत में है।
हो सकता है कि तुम्हें कैंसर उस चीज से हो जो तुम्हें इतना ज्यादा धूम्रपान करने के लिए उकसाती है, न कि खुद धूम्रपान से।
जो लेखक असल में लेखक होता है, वह एक बागी होता है जो कभी नहीं रुकता।
जब तक किसी इंसान में दया नहीं होती, वह असल में इंसान नहीं होता।
अगर कोई इंसान दुनिया के दुख को देखकर रोया नहीं, तो वह आधा इंसान ही है, और दुनिया में दुख तो हमेशा रहेगा ही, पर इसका मतलब यह नहीं कि इंसान निराश हो जाए। एक अच्छा इंसान चीजों से दुख दूर करने की कोशिश करेगा। एक बेवकूफ इंसान इसे खुद के अलावा कहीं और नहीं देखेगा, और एक बेचारा, बदकिस्मत और बुरा इंसान दुख को चीजों में और गहरा कर देगा और जहाँ भी जाएगा, उसे फैलाएगा।
अपनी जिंदगी के समय में, ऐसे जियो, कि उस अद्भुत समय में तुम दुनिया के दुख और परेशानी को न बढ़ाओ, बल्कि उसकी अनंत खुशी और रहस्य को देखकर मुस्कुराओ।
कला का काम ऐसी दुनिया बनाना है जिसमें रहा जा सके।
तुम्हारा क्या मतलब है, उसे क्या हुआ है? उसे कुछ नहीं हुआ है, और उसे सब कुछ हुआ है, वही सब जो बाकी सबके साथ होता है। वह बिल्कुल ठीक है। कभी-कभी वह भावनाओं में बह जाता है, और उसे समझ नहीं आता कि अपनी बात कैसे कहे या क्या महसूस कर रहा है, इसलिए वह रोता है और थोड़ी दूर भाग जाता है, यह सोचने की कोशिश में कि आखिर कहाँ जाए। कहाँ जा सकते हो तुम?
मुझे पता है कि तुम्हें यह याद रहेगा, कि कोई भी अच्छी चीज कभी खत्म नहीं होती। अगर ऐसा होता, तो दुनिया में कोई इंसान नहीं होता, कहीं भी कोई जिंदगी नहीं होती। और दुनिया तो लोगों और अद्भुत जिंदगी से भरी हुई है।
डरपोक लोग अच्छे होते हैं, दिलचस्प होते हैं, सौम्य होते हैं, वे कभी किसी टॉवर से परेड में लोगों पर गोली चलाने के बारे में नहीं सोचेंगे। वे जीना चाहते हैं, ताकि अपने बच्चों को देख सकें। वे बहुत बहादुर होते हैं।
कभी-कभी सबसे समझदारी वाला काम होता है कुछ न करना, खासकर ऐसा कुछ न करना जो भावनाओं की बेवकूफी से भरा हो।
मैं तुम्हें क्या बता सकता हूँ, सिवाय उस थोड़ी-सी बेवकूफी भरी जानकारी के जो मेरे पास है?
मैं बहुत ज्यादा समझदार भी हूँ और बहुत ज्यादा अज्ञानी भी।
लोग तो लोग ही होते हैं। उनसे डरो मत।
Inspiring and entertaining quote by the American novelist, playwright, short story writer, and comedian William Saroyan
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