
पपीता पोषक तत्वों से भरपूर और कम कैलोरी वाला एक ट्रॉपिकल फल है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और पाचन में सहायक एंजाइम पपेन होता है। पका पपीता खाने में स्वादिष्ट और पोषक गुणों से भरपूर होता है। कच्चे पपीते की सब्जी और अन्य व्यंजन भी बनाए जाते हैं। लेकिन पपीते के पत्ते भी बड़े काम की चीज हैं। पपीते के पत्तों का अर्क, जूस और चाय सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, खासकर डेंगू बुखार के दौरान ब्लड प्लेटलेट बढ़ाने में। डेंगू का इलाज, पपीते के पत्तों का जूस कम प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने और डेंगू बुखार से ठीक होने में मदद करता है। इसका प्रचलन विगत करीब 15 साल से खूब बढ़ा है। डेंगू का प्रकोप बढ़ने से भारी संख्या में हर साल लाखों लोगों को डेंगू होता है जिसमें खून में प्लेटलेट्स घट जाती हैं। प्लेटलेट्स बढ़ाने और डेंगू में जल्द स्वास्थ्य बेहतर करने के लिए पपीते के पत्तों का रस काफी कारगर साबित हो रहा है।
पपीते के पत्तों का जूस डेंगू, मलेरिया, वायरल किसी अन्य बुखार या बीमारी के कारण प्लेटलेट्स गिरने की स्थिति में लाभदायक है। इसके लिए पपीते 4-6 पत्ते लेकर उसे ग्राइंडर में ग्राइंड करके या सिल पर पीस कर उसका जूस निकाल कर पिएं। इसकी अधिकत मात्रा न लें। एक बार में अधिकतम 10-15 ग्राम। यह 4-5 घंटे के अंतराल पर दिन में 3 बार लिया जा सकता है।
पपीते के पत्तों के जूस में पपेन एंजाइम होता है, जो बड़े प्रोटीन को तोड़ता है और गैस, पेट फूलने और सीने में जलन जैसी समस्याओं से राहत देता है।
पपीते के पत्तों का जूस फ्लेवोनोइड्स और विटामिन ई जैसे तत्व शरीर की सूजन को कम करने और फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं।
पारंपरिक चिकित्सा में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए इन पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है, इंसानों पर इसके असर के सबूत अभी सीमित हैं।
पपीते के पत्तों का जूस ऊपर से लगाने (टॉपिकल इस्तेमाल) से मुँहासे ठीक हो सकते हैं और स्कैल्प से अतिरिक्त तेल हट सकता है।
पपीते के पत्तों में जरूरी विटामिन (ए, सी और ई) और कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और आयरन जैसे जरूरी मिनरल भरपूर मात्रा में होते हैं। इनमें ऐसे प्लांट कंपाउंड भी होते हैं जिनमें जबरदस्त एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं।
विज्ञान के हिसाब से पपीता कारिका पपाया प्रजाति का पौधा है, यह कारिकेसी परिवार के कारिका जीनस की 3 मान्य प्रजातियों में से एक है। इसे सबसे पहले मेसोअमेरिका में उगाया गया था, जो आज के दक्षिणी मैक्सिको और मध्य अमेरिका का इलाका है। इसे ट्रॉपिकल जलवायु वाले कई देशों में उगाया जाता है। भारत में और खासतौर पर उत्तर भारत में पपीते की खेती व्यापक पैमाने पर की जाती है, पपीता करोड़ों लोगों के रोजगार और कारोबार का बड़ा जरिया है।
पपीते के पत्तों के जूस का अधिक मात्रा में सेवन से पेट खराब हो सकता है, जी मिचला सकता है या एलर्जी हो सकती है।
पपीते के पत्तों का जूस खून पतला करने वाली दवाओं और डायबिटीज की दवाओं के साथ असर डाल सकते हैं।
गर्भवती महिलाओं को पपीते के पत्तों के रस की कम मात्रा लेने की सलाह दी जाती है।
Papaya leaf juice helps alleviate various physical ailments and aids in rapid recovery from conditions like dengue and other fevers by boosting blood platelet counts
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