
27 अगस्त 1635 को मैड्रिड, स्पेन में स्पेनिश नाटककार, कवि और उपन्यासकार फेलिक्स लोपे डे वेगा वाई कार्पियो (जन्म 25 नवंबर 1562, मैड्रिड, स्पेन) का निधन हुआ। वे बारोक साहित्य के स्पेनिश स्वर्ण युग की एक प्रमुख हस्ती थे। स्पेन के साहित्य में, लोपे डे वेगा को अक्सर मिगुएल डे सर्वेंट्स के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण लेखक माना जाता है। सर्वेंट्स ने लोपे डे वेगा को बुद्धि का फीनिक्स और प्रकृति का अद्भुत नमूना कहा था। कहते हैं कि जब स्पेनिश थिएटर आम लोगों की संस्कृति (मास कल्चर) बन गया, तब लोपे डे वेगा ने उसमें नई जान फूँकी, लोपे डे वेगा ने नाटककार पेड्रो काल्डेरॉन डे ला बारका और टिरसो डे मोलिना के साथ मिलकर मानवीय स्थितियों की गहरी समझ के आधार पर स्पेनिश बारोक थिएटर की विशेषताओं को परिभाषित किया। लोपे डे वेगा के साहित्यिक कार्यों में 3,000 सॉनेट (14 पंक्तियों की कविताएँ), 3 उपन्यास, 4 लघु-उपन्यास (नोवेला), 9 महाकाव्य और लगभग 500 नाटक शामिल हैं। व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में लोपे डे वेगा लेखक फ्रांसिस्को डे क्वेवेडो के मित्र और नाटककार जुआन रुइज डे अलारकोन के शत्रु थे। लोपे डे वेगा के साहित्य की विशाल मात्रा ने उन्हें सर्वेंट्स और लुइस डे गोंगोरा जैसे समकालीनों की ईर्ष्या का पात्र बना दिया, जोहान वोल्फगैंग वॉन गोएथे ने उनके इतने विशाल और विविधतापूर्ण कार्यों की प्रशंसा की। लोपे डे वेगा, मेड्रानो अकादमी (मैड्रिड की काव्य अकादमी) के संस्थापक और अध्यक्ष सेबेस्टियन फ्रांसिस्को डे मेड्रानो के करीबी दोस्त थे।
लोपे डे वेगा ने अपने समकालीनों के प्रचलित स्कूल के नियमों को नजरअंदाज करते हुए स्पेनिश नाटक में तीन-अंकों वाली कॉमेडी को एक निश्चित रूप के तौर पर स्थापित किया। अपने कलात्मक घोषणापत्र उन्होंने अपनी उस शैली का बचाव किया था जिसने जगह, समय और घटना की एकता के स्थापित नियमों को तोड़ा था, उन्होंने दिखाया कि उन्हें कविता के स्थापित नियम पता थे, लेकिन उन्होंने उनका पालन करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि आम स्पेनिश लोगों को इन नियमों की कोई परवाह नहीं थी, तो आइए, हम उनसे मूर्खों की भाषा में बात करें, क्योंकि वही हमें पैसे देते हैं ये उनके घोषणापत्र की मशहूर पंक्तियाँ हैं।
LopedeVega ने गर्व से कहा कि वह पूरी तरह से स्पेनिश हैं। लोपे डे वेगा का कहना था कि लेखक का काम इस तरह लिखना है कि लोग उसे समझ सकें, और उन्होंने आम बोलचाल की भाषा का पक्ष लिया। लोपे डे वेगा पर मुख्य रूप से लैटिन-इतालवी साहित्य का प्रभाव था। उन्होंने देश की परंपरा और पुरानी कैस्टिलियन भाषा की सादगी का बचाव किया, लेकिन साथ ही उन्होंने अपनी यूनिवर्सिटी की शिक्षा और क्लासिक्स (प्राचीन साहित्य) के जानकार लोगों और आम लोगों के बीच के अंतर पर भी जोर दिया। उनकी ज्यादातर रचनाएँ जल्दबाजी में और ऑर्डर मिलने पर लिखी गई थीं। लोपे ने खुद माना था कि मेरे सौ से ज्यादा नाटक ऐसे हैं जिन्हें म्यूज (प्रेरणा) से थिएटर के मंच तक पहुँचने में सिर्फ 24 घंटे लगे। उनके जीवनी लेखक पेरेज डी मोंटलबान लिखते हैं कि कैसे टोलेडो में लोपे ने उतने ही दिनों में 15 अंक (ंबजे) लिखे, यानी दो हफ्तों में पाँच नाटक।
लोपे डे वेगा की रचनाओं और विचारों में जलन का दर्द, शक का जाल और उस कल का इंतजार करने की इंसानी आदत झलकती है जो कभी नहीं आता। उनका तर्क था कि चूँकि थिएटर को पैसे देने वाली जनता ही चलाती है, इसलिए लेखक का मुख्य मकसद उनका मनोरंजन करना होना चाहिए।
यहां प्रस्तुत हैं लोपे डे वेगा के कुछ विचारणीय उद्धरण
चाहे जो भी हो, मैं हमेशा इस सज्जन की अद्भुत प्रतिभा का सम्मान और आदर करूँगाय जो मैं समझ पाता हूँ उसे विनम्रता से अपनाऊँगा और जो नहीं समझ पाता, उसकी श्रद्धा के साथ प्रशंसा करूँगा।
इच्छा, भूख (या लालसा) की दलाल होती है।
सामंजस्य ही शुद्ध प्रेम है, क्योंकि प्रेम एक संगीत-रचना (कॉन्सर्टो) की तरह है।
मेरे बगीचे में कुछ फूल, आधी दर्जन तस्वीरें और कुछ किताबें हैं, मैं बिना किसी जलन के रहता हूँ।
प्यार से बड़ी कोई महिमा नहीं है, और जलन से बड़ी कोई सजा नहीं है।
एक बार में एक ही काम करें, और जो काम आज हो सकता है उसे कभी भी कल पर न टालें।
लेकिन जिंदगी छोटी है, जब तक इंसान जिंदा रहता है, हर चीज की कमी रहती है, और जब वह मर जाता है, तो हर चीज बेकार हो जाती है। -लोपे डे वेगा
Inspiring quote by the Spanish playwright, poet, and novelist Félix Lope de Vega

